लोगवा तंग भइले वन विभाग के उत्पाती से...एक गीत
लोगवा तग भइले वन विभाग के उत्पाती से
कही हम मारब लाठी से २
तो परेसान लोगवा प्रशासन के जाती से
तोहरे हम मारब लाठी से
मारब हम लाठी से हो काहे मारब लाठी से २
तो परेसान ...
कहवा से अइले ई वन अधिकारी
सजल सजावल उजारले वन हमारी २
गारी सुन तारे ई हो वनवासी से २ ...
कही हम मारब ...
लोगवा तंग ...२
ढेर घुसखोर भइले सारे अधिकारी
देखि-देखि लोगवा सब देती बड़ी गारी २
कहिया इनसाफ मिली हम बनवासी के २ ...
कही हम...
लोगवा तंग...२
मारब हम लाठी से हो...२
तो परेसान लोगवा...२
कही हम मारब लाठी से
Posted on: Jan 07, 2013. Tags: Chandan Kumar
Poem by a child on his teacher
गुरुजी हमारे कितने प्यारे
पाठ पढाए प्यारा प्यारा
याद न हमको न्यारा न्यारा
जब कक्षा में गुरुजी बोले
बेटा पाठ सुनाओ
हम तो गए भैया भूल
गुरुजी को गुस्सा आया
खूब मारा रूल
याद आई हमको नानी
खतम हुई कहानी
चन्दन कुमार
