इक बार चले आओ...भजन-

ग्राम-मटियाआलम,जिला-कुशीनगर (उत्तरप्रदेश) से सुकई कुसवाहा एक भजन सुना रहे हैं:
इस दिल ने पुकारा है इक बार चले आओ-
ये सारे गिले सिकवे-
गले मिल के मिटा जाओ-
हमने तेरे चाहत में सारा जग छोड़ा है-
हमने तेरे खातिर सारा रस्मो को तोडा है-
तुम बिन मै जियूं कैसे इतना तो बता जाओ...(AR)

Posted on: Mar 15, 2021. Tags: KUSHINAGAR SUKAI KUSWAHA UP

सुनाबे मोला बासुरी के तान...गीत-

पामगढ़, जिला-बिलासपुर, छत्तीसगढ़ से पिंकी जयसवाल एक भजन सुना रही हैं:
मै आहूँ कान्हा रे-
अ जाहू यमुना के पार-
सुनाबे मोला बासुरी के तान-
कोयली मयूर के सुनाबे मीठ बोली-
दोनों जन खेलबो गा अंखि मिचोली-
वृंदावन मा घुमाबे मोला यार-
सुनाबे मोला बासुरी के तान...(AR)

Posted on: Mar 15, 2021. Tags: BILASPUR CG PINKI JAYASWAL SONG

कैसे आयेंगे भगवान...भक्ति गीत-

जिला-बड़वानी (मध्यप्रदेश) से सुरेश कुमार एक गीत सुना रहे हैं:
हमने आंगन नहीं बोहारा, कैसे आयेंगे भगवान-
मन का मेल नहीं रे उतारा-
कैसे आयेंगे भगवान-
हर कोने कलम कससाये की-
लगी हुई है ढेरी-
नहीं ज्ञान की किरन कहीं है, हर कोठरी अँधेरी...(AR)

Posted on: Mar 15, 2021. Tags: BARWANI BHAKTI SONG MP SURESH KUMAR

खड़ा हिमालय बता रहा है...गीत-

सीजीनेट श्रोता किशननंद विसकर्मा एक कविता सुना रहे हैं:
खड़ा हिमालय बता रहा है-
डरो न आंधी पानी से-
खड़े रहो तुम अचल होकर-
सब संकट तूफानी में-
जीवन अपने पहाड़ से तुम-
सब कुछ पा सकते हो प्यारे...

Posted on: Mar 15, 2021. Tags: KISHAN VISKARMA POEM

पर्व, विवाह और जीविका के लिये वनों का प्रयोग और उनका संरक्षण

धनेली कन्हार, उत्तर बस्तर कांकेर, छत्तीसगढ़ से विरेन्द्र कुमार मार्गीया बता रहे हैं, आदिवासी सामुदाय वनों से अपनी जीविका का साधन एकत्र करते थे| प्रकृति में जो फल होते हैं, जिसे सामुदाय उपयोग करता है उसके नाम पर एक पर्व मनाया जाता था, आज भी ये परम्परा देखने को मिलती है| विवाह के लिये निवासी जंगल से जामुन पेड़ की डाली, डूमर का फल का उपयोग करते हैं, मण्डप के लिये चार के पेड़ और महुआ के पेड़ का उपयोग करते हैं| पेड़ो के संरक्षण के लिये विवाह के समय इनके पौधे लगाये जाते हैं और उन्हें बड़ा करने तक उसकी देख रेख भी जाती है, जिससे पेड़ो का केवल दोहन न हो उनका संरक्षण भी हो|

Posted on: Mar 15, 2021. Tags: CG KANKER STORY VIRENDRA KUMAR

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