ए री ए मैं कैसे घर जाऊं...गीत-
सेक्टर-C, राजनगर जिला-अनुपपूर (मध्यप्रदेश) से मारकंडे राग़ वाद्य्श्री सुना रहे हैं-
ए री ए मैं कैसे घर जाऊं-
घर जाऊं मितवा तुम्हरी दिन्ग्वा-
राह चलत मगरो के ठाड़ो ठगवा-
ए री ए मैं कैसे घर जाऊं-
ए री ए मैं कैसे घर जाऊं-
मन तडपत है उनके दरश को-
बहुत दिनन और बीत गए जुगवा...
Posted on: Oct 20, 2020. Tags: HINDI SONG SONG VICTIMS REGISTER
स्वास्थ्य स्वर: बुखार, सर्दी, जुकाम, खासी, पथरी, दस्त, रोगों का वनऔषधि उपचार...
ग्राम-कांडोली (पटेलपारा) ब्लाक-बस्तानार, जिला-बस्तर (छत्तीसगढ़) से मनोज कुमार बुखार, सर्दी, जुकाम, खासी, पथरी, दस्त, रोगों का वनऔषधि उपचार बता रहे हैं जंगली जड़ी-बूटी खोजकर उसे चूर्ण या काढ़ा बनाकर उपचार के लिए देते हैं, उनका कहना है सभी मौसम में यह औषधि मिलता है किन्तु गर्मी के मौसम में पहचानने में दिक्कत होती है|जड़ी बूटी के बदले में लोगों से कुछ नही लेते, सेवा की भाव से वे लोगों की मदद करते हैं. अधिक जानकारी के लिए संपर्क@6395663840.
Posted on: Oct 20, 2020. Tags: HEALTH DEPARTMENT SONG VICTIMS REGISTER
लाली लाली चुनरी ले ले ओ...जस गीत-
ब्लॉक-खैरागढ़, जिला-राजनांदगांव (छत्तीसगढ़) जया मुंडे एक नवरात्रि गीत सुना रहीं हैं-
लाली लाली चुनरी ले ले ओ-
फीता संग मुंदरी ले ले न-
नवरात्र मा मैया जी के करले सिंगरी-
माथे बर टिकली, आंखी बर काजल-
गले बर लेना हार ओ-
जसन मन तोर लागे हो दीदी-
अपन मन के निमार ओ-
रेशम लागे सुतरी ले ले ओ-
आनी-बानी मुंदरी ले ले न-
नवरात्र मा मैया जी के करले सिंगरी...
Posted on: Oct 20, 2020. Tags: BHAJAN SONG SONG VICTIMS REGISTER
रामे लखन बोये हे जवारा- हो माते श्री तोर भुवन मा..जसगीत-
ब्लॉक-खैरागढ़, जिला-राजनांदगांव से जया मुंडे एक जसगीत सुना रही है-
रामे लखन बोये हे जवारा-
हो माते श्री तोर भुवन मा-
माता श्री तोर भुवन मा-
दुर्गा दाई तोर भुवन मा-
के ओरी जोते खेत महा माई-
के ओरी बोये फुलवरिया-
के ओरी जले कलश महा माई-
दियरा माता श्री तोरे भुवन मा-
नौ ओरी जले खेत मा हमर-
दस ओरी फुलवरिया-
के ओरी जले कलश महा माई-
दियरा माता श्री तोर भुवन मा-
रामे लखन बोये हे जवारा हो-
माते श्री तोर भुवन मा...
Posted on: Oct 20, 2020. Tags: BHAJAN SONG SONG VICTIMS REGISTER
कहानी -"कभी भी अहंकार नहीं करना चाहिये"...
ग्राम – बड़वानी, मध्यप्रदेश से सुरेश जी अहंकार को लेकर एक कहानी बता रहे हैं दो हस्ठ-पुष्ठ बैल एक बैलगाड़ी को खींच रहे थे दोनों बैलों के बीच एक कुत्ता भी चल रहा था उसका अहंकार था कि बैलगाड़ी मैं खींच रहा हूँ गाड़ीवान ने अपने चाबुक से कुत्ता को मारा वो दुम उठाकर भागा और उसको एहसास हो गया था कि असल में गाड़ी बैल ही खींच रहे थे उसका अहंकार मिट चुका था झूठ के साथ अहंकार रहता है किन्तु सच के सामने आते ही झूठ चूर-चूर हो जाता है इसलिए कभी भी अहंकार नहीं करना चाहिये|संपर्क नम्बर@9669682196
