ओस की बूंद सी कोमल होती है बेटियाँ..एक कविता
ओस की बूंद सी कोमल होती हैं बेटियाँ
ममता की मूरत होती हैं बेटियाँ
बाबुल की प्यारी होती हैं बेटियाँ
फर्श खुरदुरा हो तभी रोती हैं बेटियाँ
रोशन करेगा बेटा तो केवल एक कुल को
दो दो कुलों की लाज होती हैं बेटियाँ
विधि का विधान है विधाता की रस्म है
मुट्ठी मै भरी नीर सी होती है बेटियाँ
