एकता की कहानी...
ग्राम- तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडियारी अपने नाती से एक कहानी सुन रहे हैं जो कक्षा दूसरी का छात्र है वह बता रहा है – एक किसान था जिसके 5 बेटे थे जो हमेशा आपस में लड़ते झगड़ते रहते थे. एक दिन किसान ने पाँचों बेटों को बुलाया और एक-एक डंडा सभी को पकड़ने को कहा और कहा इसको तोड़ो तो सभी ने अपने डंडे तोड़ दिये। इसके बाद बड़े बेटे को बोला सभी डंडों को एक साथ बाँध दो और फिर तोड़ने के लिए कहा लेकिन कोई नहीं तोड़ पाया इसलिए किसान ने कहा कि सभी मिल जुलकर रहोगे तो कभी हानि नहीं पहुंचेगी पर अलग-अलग रहोगे तो तुम्हारे विरोधी एक-एक कर तुम सभी को हरा देंगे, एकता में शक्ति है | कन्हैयालाल पडियारी@9981622548
Posted on: May 21, 2017. Tags: KANHAIYALAL PADHIYARI SONG VICTIMS REGISTER
हमारे पिछड़े इलाके के सरकारी कालेज में 496 विद्यार्थयों और तीन कोर्स के लिए सिर्फ 4 शिक्षक...
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडियारी आज स्थानीय शासकीय कॉलेज में भ्रमण कर रहे हैं वहां उन्होंने पाया कि उनके यहाँ कॉलेज में तीन कोर्सेस है B.A, B.Com, B.Sc. और यहाँ करीब 496 बच्चे है लेकिन यहाँ पर मात्र 4 शिक्षक है जिसके कारण ढंग से पढाई नहीं हो पा रही है और विद्यार्थियों को बहुत परेशानी हो रही है प्राचार्य भी बहुत परेशान है और अधिक शिक्षकों के लिये अधिकारियों और स्थानीय नेताओं से कई बार अनुरोध कर चुके है पर कोई ध्यान नहीं दे रहे है इसलिए वे सीजीनेट सुनने वाले साथियों से अपील कर रहे है कि कृपया स्थानीय विधायक@9303007906 को फोन कर दबाव बनाकर इस पिछड़े इलाके के विद्यार्थियों की मदद करें. कन्हैयालाल@9981622548
Posted on: Apr 19, 2017. Tags: KANHAIYALAL PADHIYARI SONG VICTIMS REGISTER
मैंने देखा है तपता हुआ सूरज को...कविता
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडियारी एक कविता सुना रहे हैं :
मैंने देखा है तपता हुआ सूरज को-
मैंने देखा है समन्दर से उठते भाप को-
मैंने देखा ठिठुरते शिशिर मास को-
मैंने देखा है बरसते हुए बरसात को-
ये कुदरत का खेल है-
इसमें बहुत बड़ा मेल है-
यहाँ पर इनका उपकार है,
हर जीव-जन्तु का पुकार है-
जग में जब एक ही ऋतु होता
सुख संपदा का अभाव होता-
ना कोई बड़ा ना कोई छोटा होता...
Posted on: Apr 09, 2017. Tags: KANHAIYALAL PADHIYARI SONG VICTIMS REGISTER
कलम कमाई खाते है नहीं लेते है घूस...व्यंग्य रचना
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडियारी एक स्वरचित व्यंग्य रचना सुना रहे है:
कलम कमाई खाते है नहीं लेते है घूस-
पान गुटखा खाकर हँसते रहते मुच मुच-
अरे पाप पुण्य को कौन देखता है-
अभी तो कुछ कर लेने दो-
बाद में कौन देखता है-
अभी तो घर भर लेने दो-
समय पल दो पल का साथ हमारा-
एक पल तो चैन से जी लेने दो...
