पीड़ितों का रजिस्टर: पति के मौत के बाद अब घर के हालात खराब हैं...
ग्राम पंचायत-मुरकीनार, ब्लाक-उसूर, जिला-बीजापुर (छत्तीसगढ़) से नरसी आलम बता रही हैं कि उनके पति को 2005 में मुदकपाल बाजार के दिन नक्सलियों के द्वारा ह्त्या कर दिया गया | सरकार के तरफ से उन्हें एक लाख रूपये मात्र दिए गये हैं, सरकार ने वादा किया था उन्हें सरकारी नौकरी देने की लेकिन अभी तक नही दिए हैं | वे गरीबी से बहुत परेशान है, दिन मजदूरी करके अपना जीवन का गुजारा कर रहे हैं| वे सलवा जुडूम में जुड़े थे |सम्पर्क नम्बर@9479117140.
Posted on: Jan 23, 2021. Tags: BIJAPUR CG SONG USUR VICTIMS REGISTER VICTIM REGISTER
पीड़ितो का रजिस्टर: नक्सलियों के डर से विस्थापित हुए ग्रामीण...
ग्राम-पंचायत अरेंज, ब्लाक-कुस्कुरी, जिला-बीजापुर, (छत्तीसगढ़) से अजय धुर्वा बता रहे है 2010 में नक्सलियों के डर से उन्होंने अपने गांव छोड़कर बीजापुर जेल वाड़ा में आकर अभी रह रहे हैं के गांव में उनके चाचा चाची रह रहे हैं कभी कभी अपने गांव में जाते हैं लेकिन उनको डर बना रहता है अभी अपने मम्मी पापा के साथ वर्तमान में बिजापुर जेल वाड़ा में अपना जीवन यापन कर रहे हैं|
Posted on: Jan 17, 2021. Tags: BIJAPUR CG SONG VICTIMS REGISTER VICTIM REGISTER
वनांचल स्वर: आदिवासियों के बीच कुसुम का वित्तीय महत्व...
ग्राम-चाहचढ, तहसील-भानुप्रतापुर, जिला-कांकेर (छतीसगढ़), से लच्छूराम सलाम कुसुम का पेड़ के बारे में जानकारी दे रहे हैं| कुसुम का पेड़ को साल में दो बार छ:-छ: माह के अंतराल पर उगाया जाता है| छ: महीने में तैयार हो जाने पर काटते हैं| बाज़ार में इसकी कीमत 420 रुपया प्रति किलो है| समय के साथ दाम भी बढ़ता है| गाँव में हर आदमी लगभग 15 पेड़ उगाते हैं, वनवासी अपने ही पेड़ों को काटते हैं| 2-3 क्विंटल का उत्पादन होता है|
संपर्क@7647070617. (185559) GT
Posted on: Jan 09, 2021. Tags: CG KANKER LACHHURAM SALAM VANANCHAL SWARA
हरी डाल पर लगी हुई थी...कविता-
ग्राम पंचायत-दुरली, जिला-दंतेवाड़ा (छत्तीसगढ़) से मलिका एक कविता सुना रही हैं:
हरी डाल पर लगी हुई थी-
नन्ही सुंदर एक कली-
तितली उससे आकार बोली-
तुम लगती हो बड़ी बड़ी-
अब जागो तुम आंखे खोलो-
और हमारे संग खेलो...
Posted on: Jan 06, 2021. Tags: DANTEWADA CG POEM SONG VICTIMS REGISTER
छत्तीसगढ़ी कहानी...
नया रायपुर जिला रायपुर राज्य छत्तीसगढ़ से अनमोल कुमार चंद्राकर (कक्षा 5 वीं में पढता है) एक शहर में ढोकरी रहिसे गीतन ढोकरा मछली पकड़कर आओ धमकाता ये ढोकरी तय मछली यहां रख देबे चल मैं बना आके खाऊगी कह ही गीतन ढोकरा यहां कह हो जी ढोकरी हा सोचत रहिसे मन मन में चल मै टीक करतावहु सोचात रही जी ताहन ढोकरी हा चिखन सबकाला खा दिस जी तहन ढोकरा नहाके आतहे जी ढोकरी ला बोलीस जी चल मोर लिए खाना निकलदे हम दोनों जन खाबो मच्छली कहिस जी तहान ढोकरी हा सच सच बता दिस जी मै सब मच्छली खा दियेव जी तहन ढोकरी ला एक डंडा डंडा मारिसे छुटगए!
