कृष्ण कन्हैया मुरली वाला...कृष्णा जन्माष्टमी भजन-
ग्राम-शकलपुर, पोस्ट-संगरा, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से शिवलाल मानिकपूरी कृष्ण जन्माष्टमी केअवसर पर भजन सुना है-
कृष्ण कन्हैया मुरली वाला-
ऐसी बजाये मुरली-
मुरली जादू भारी-
कृष्ण कन्हैया मुरली वाला-
ऐसी बजाये मुरली-
मुरली जादू भारी-
कृष्णा कन्हैया मुरली वाला-
ऐसी बजाये मुरली-
मुरली जादू भारी...
Posted on: Aug 11, 2020. Tags: HINDI SONG SONG VICTIMS REGISTER
झूम झूम हर कली बार बार के चली... गीत-
ग्राम-सुरंदवाडा, पंचायत-कोलावाड़ा, ब्लाक-जगदलपुर, जिला-बस्तर (छत्तीसगढ़) से चमेली नाग गीत सुना रही है-
झूम झूम हर कली बार बार के चली-
आप जो पधारे तो महक उठी गली गली-
प्यार बड़ी फलको में हमको पाला पोसा है-
हर कदम पे साथ का दिया हमे भरोसा है-
खुशनुमा है जिंदगी रांहे जैसे मकमली-
आप जो पधारे तो महक उठी गली गली-
झूम झूम हर कली बार बार के चली...
Posted on: Aug 11, 2020. Tags: HINDI SONG SONG VICTIMS REGISTER
स्वास्थ्य स्वर : लकवा रोग के घरेलू उपचार...
ग्राम-नरई, थाना-पटना, जिला-कोरिया (छत्तीसगढ़) से वैद्यराज केदारनाथ पटेल जो लकवा रोग के घरेलू उपचार बता रहा है औषधि प्रयोग के अजमोद, पीपल, गिलोय, सोठ अश्वगंधा, शतावरी और सौप इन सभी को सामान भाग में लेना है और चूरन बनाना है और इस चूर्ण को गाय के घी के साथ सेवन करने से लकवा प्रभावित स्थान में लाभ होता है. सम्पर्क@9826040015.
Posted on: Aug 11, 2020. Tags: HEALTH DEPARTMENT SONG VICTIMS REGISTER
मेरी नैया में बैठे भगवान, गंगा मैया धीरे चलो...भक्ति गीत-
ग्राम पंचायत-घुमन, तहसील-जवा, जिला-रीवा (मध्यप्रदेश) से दिनेश पाल भजन सुना रहा है-
मेरी नैया में बैठे भगवान, गंगा मैया धीरे चलो-
काहे काट की नैया बनी है, काहे काट की नैया बनी है-
काहे के लगे तीर वार गंगा मैया धीरे चलो-
मेरी नैया में लक्षमण राम, गंगा मैया धीरे चलो-
चन्दन काट की नैया बनी है-
ओहिन के लगे तिरवार गंगा मैया धीरे चलो-
मेरी नैया में बैठे भगवान गंगा मैया धीरे चलो...
Posted on: Aug 11, 2020. Tags: HINDI SONG SONG VICTIMS REGISTER
खेती में हम लोग धान ज्यादा लगाते है, जंगल से जड़ी-बूटी, फल-फूल, लकड़ी, महुआ आदि का संग्रह करतें है...
ग्राम पंचायत-कंडोली, ब्लाक-बास्तानार, जिला-बस्तर (छत्तीसगढ़) से बाबूलाल नेटी और उनके साथ है ग्रामीण युवा साथी सुनील कुमार बता रहा हैं अपने गाँव में खेती कैसे और किस समय करते है इसके अलावा और भी व्यवसाय करते है, ज्यादातर गाँव में धान की खेती की जाति है और गर्मी के समय में खेती नहीं करते है ढलान व पटारी क्षेत्र के कारण पानी की समस्या होती है| तो साल में एक ही बार खेती करते है,बताया रहा है खेतों के पास से जो जंगल है वह विविध प्रकार की जड़ी-बूटी, फल-फूल, लकड़ी, महुआ आदि का संग्रह करते है. जंगलों से एकत्रित महुआ को हम बाजार में बेंचते है जिसका मूल्य मिलता है कुछ लोग महुआ का शराब बनाते है.
