घरी-घरी तोर सुरता आवे, भुलाओं नही संगवारी...छत्तीसगढ़ी गीत-

ग्राम-बगडापारा, सरईडोहर, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से देवानंद एक छत्तीसगढ़ी प्रेम गीत सुना रहे हैं:
घरी-घरी तोर सुरता आवे, भुलाओं नही संगवारी-
देखे बिना मोर जीवरा नई माने कैसे करो संगवारी-
मोर जिवारा ला मोर नयना ला झन तरसाओ गोरी-
अरे आ रे दीवानी मोर संग आजा रे-
माया पिरित के बंधा गेहे बंधना अमर हो गए है निशानी...

Posted on: Aug 16, 2018. Tags: CHHATTISGARHI DEVANAND SONG SURAJPUR CHHATTISGARH VICTIMS REGISTER

वनांचल स्वर: हल्दी वनों में पाई जाती है और घरो में भी लोग लगाते हैं, यह भोजन भी है और दवाई भी -

सीजीनेट जन पत्रकारिता जागरूकता यात्रा आज ग्राम-बईहा सालेभाट, तहसील-अंतागढ़, जिला-उत्तर बस्तर कांकेर (छत्तीसगढ़) में पहुँची है वहां बस्तीराम नागवंशी गाँव के गजेन्द्र सिंह वट्टी से बात कर रहे हैं जो उनको हल्दी के बारे में बता रहे हैं जो उनकी बाड़ी में लगा हुआ है वे बता रहे हैं कि हल्दी के पौधे को वे लोग जुलाई माह में लगाते हैं, और जब उसका पौधा सूख जाता है तो उसका कंद निकालते हैं, वही हल्दी है इस हल्दी का उपयोग खांसी होने पर दूध के साथ सेवन करते हैं, शादी में इसका लेप दूल्हा-दुल्हन के शरीर पर लगाते हैं, भोजन में भी उसका उपयोग होता है, चेहरे की फुंसिया दूर करने में भी उपयोग करते है, ये जंगल में पाया जाता है और लोग घरो में भी लगाते हैं |

Posted on: Aug 16, 2018. Tags: GAJENDRA SINGH WATTI KANKER CHHATTISGARH SONG VANANCHAL SWARA VICTIMS REGISTER

पीपल की ऊँची डाली पर बेठी चिड़िया गाती है...बाल कविता

ग्राम-मेंढारी, पोस्ट-करमडीहा, तहसील-वाड्रफनगर, थाना-बसंतपुर, जिला-बलरामपुर (छत्तीसगढ़) से अंजनी नेटी एक कविता सुना रही है:
पीपल कि ऊँची डाली पर बेठी चिड़िया गाती है-
तुम्हे याद अपनी बोली में क्या सन्देश सुनाती है-
चिड़िया बेठी प्रेम प्रीत की रीत हमें सिखलाती है-
वह जग के बंधी मानव को मुक्त मन्त्र बतलाती है-
सब मिल जुलकर रहते है वे सब मिल झूल कर खाते है-
आसमान ही उनका घर है जहाँ चाहते जाते है-
रहते जहाँ वही अपना घर बसाते है...

Posted on: Aug 16, 2018. Tags: ANJNI NETI BALRAMPUR CHHATTISGARH HINDI POEM SONG VICTIMS REGISTER

किसिम किसिम के नवा-नवा धान, वोला खाके गवाबो प्राण...छत्तीसगढ़ी कविता-

ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडियारी एक कविता सुना रहे हैं :
किसिम किसिम के नवा-नवा धान, वोला खाके गवाबो प्राण-
लुचाई गुरमटिया बछा भोग, ये जम्मो ला लागिस रोग-
भाठा दुबराज लक्ष्मिभोग, येमन ला छोड़ेन आज के लोग-
सफरी, भाठा सफरी, जौफूल ओला हमन गए हन भूल-
तुलसी फूल, तुलसी गुरमंजरी गुरमटिया
बुडहा, बूढी, कोड़ा सिराकार, वोला ले गईस पलरिया बुखार...

Posted on: Aug 16, 2018. Tags: CHHATTISGARHI KANHIYALAL PADIYARI POEM RAIGARH CHHATTISGARH SONG VICTIMS REGISTER

वनांचल स्वर : नेत्र ज्योति बढ़ाने का घरेलू नुस्खा-

सेत गंगा, जिला-मुंगेली (छत्तीसगढ़) से वैद्य रमाकांत सोनी नेत्र ज्योति वर्धक एक घरेलू नुस्खा बता रहे हैं, जिन व्यक्तियों के आँखों में कमजोरी आ रही हो, कम दिखाई देता हो वे आधा चम्मच पिसी काली मिर्च, आधा चम्मच पिसी मिश्री और एक चम्मच शुद्ध पिसी गो घृत मिलाकर सुबह खाली पेट सेवन करें, उसके बाद दूध पी लें, ऐसा 6 माह तक लगातार करने से नेत्र ज्योति बढ़ाने में लाभ मिल सकता है, अधिक जानकारी के लिए इस नंबर पर संपर्क कर सकते है. हमारे आसपास पाए जाने वाले वनस्पतियों की मदद से हम स्वस्थ रह सकते हैं, इसके बारे में हमें यदि जानकारी हो तो हम दूकान की दवा पर लगने वाला धन भी बचा सकते हैं : संपर्क नंबर@9165400513.

Posted on: Aug 16, 2018. Tags: HEALTH MUNGELI CHHATTISGARH RAMAKANT SONI SONG VANANCHAL SWARA VICTIMS REGISTER

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