पीड़ितों का रजिस्टर : मै नक्सली संगठन में थी 2017 में आत्मसमर्पण की सरकार कोई मदद नही कर रहे है
मोतीनगर रायपुर, (छत्तीसगढ़) से शान्ति बाई बता रहे हैं कि वे अब से पहले पांच साल तक नक्सली संगठन में जुडी रही, वे सन 2017 में पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया और शासन के तरफ से उन्हें एक लाख मिलना था लेकिन वह मदद राशि भी नही मिला न ही कोई सरकारी नौकरी जिससे वे बहुत परेशान है| ये साथी सरकार से मदद की अपील कर रहे हैं कि उन्हें सरकारी रोजगार के साथ उन्हें आर्थिक मदद मिले जिससे वे अपना जीवन सुखमय बना सकें| सम्पर्क नम्बर@8305216254. (184042)
Posted on: Feb 04, 2021. Tags: RAIPUR CG SONG VICTIMS REGISTER VICTIM REGISTER
पीड़ितों का रजिस्टर: मै गोपनीय सुरक्षा गार्ड में भर्ती था बिना कारण ही नौकरी से निकाला गया हूँ...
ग्राम-सिंगपुर, जिला-नारायणपुर, (छत्तीसगढ़) से पंकूराम कडियाम बता रहे हैं कि वे गोपनीय सुरक्षा गार्ड में भर्ती थे लेकिन कुछ दिनों बाद उन्हें सरकार ने निकाल दिया जबकि वे गाँव के बहुत से नक्सली लोगों को आत्मसमर्पण करवाया था| बिना कारण ही उसे बर्खाश्त कर दिया गया जिससे वे बहुत परेशान हैं, उनके पास अब किसी तरह का रोजगार नही है| बन्नी मजदूरी करके अपना जीवन चला रहे हैं| वे सरकार से मदद की मांग करते हैं कि उन्हें किसी तरह का रोजगार दिलाने में मदद करें, जिससे अपने परिवार को चला सकें| सम्पर्क नम्बर@9302108929. SP@94792 63731. (184043 )
Posted on: Feb 04, 2021. Tags: NARAYANPUR CG VICTIM REGISTER
हाथो में तेरा हुआ प्यारा...गीत
जिला-मुंगेली (छत्तीसगढ़) से मुकेश राजपुत एक गीत सुना रहे हैं:
हांथों में तिरंगा प्यारा-
तेरे गोद का मुझको सहारा-
जय जय हो भारत भूमि-
जय जय हो भारत माता-
मै कब से तरस रहा था-
ये तिरंगा तन को छू ले-
इतनी सी खुशी के बदले-
चाहे सारा जीवन ले ले...
Posted on: Feb 01, 2021. Tags: CG MUKESH RAJPUT MUNGELI SONG
मोरो नागरिहा आवत होही ओ...छत्तीसगढ़ी गीत
राजनांदगाँव, छत्तीसगढ़ से जया मुंडे एक गीत सुना रही हैं:
कोठा म पैरा डालेच नई हंव-
आगी घलो बारेच नई हंव-
का कईहो आंव गोठियावय नहीं-
आज मोरो बात आवय नहीं-
होगे नागर ढीले के बेरा जवारा-
मोरो नागरिहा आवत होही ओ...
Posted on: Feb 01, 2021. Tags: CG JAYA MUNDE RAJNANDGAON SONG
जैसा मैंने सोचा था...गीत-
ग्राम-भोजपुर, तहसील-सारंगगढ़, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से घासीदास महंत गीत सुना रहे हैं:
चाँद सी महबूबा हो मेरी-
कब ऐसा मैंने सोचा था-
हाँ तुम बिलकुल वैसी हो-
जैसा मैंने सोचा था-
न कसमे हैं न रसमे हैं-
न सिकवे है न वादे है...
