वनांचल स्वर: चाहचढ़ नाम पड़ने का इतिहास...
ग्राम-चाहचढ़, तहसील-भानुप्रतापुर, जिला-कांकेर (छतीसगढ़), से सन्तु सलाम बताते हैं, हमारे पूर्वजों ने कई बार चाहचढ़ नाम के पीछे की कहानी हमें बताई है जो काफ़ी दिलचस्प है| यहाँ पर एक झरना है जिसका नाम चाह्चिहुढ़ और उस झरने के आस पास चाहची नाम का पक्षी रहता था जिससे यहाँ का नाम चाहचढ़ पड़ा| बड़े बुजुर्ग बतातें हैं कि वन में फल, फूल और जानवर खूब थे| औषधियाँ भी मिलती थी जिनसे मलेरिया और कई बीमारियाँ ठीक होती है| लेकिन अब यह सब बहुत तेज़ी से खत्म हो रहा है खनन की वजह से| सम्पर्क@7647070617. (185513) GT
Posted on: Feb 10, 2021. Tags: CG KANKER SANTU SALAM VANANCHAL SWARA
वनांचल स्वर: घटते जंगलों के कारण जानवर भू घट रहे हैं और प्रदुषण भी बढ़ा है ...
ग्राम-चाहचढ़, तहसील-भानुप्रतापुर, जिला-कांकेर (छतीसगढ़), से लखराम सलाम 1960-1965 की बात बतातें हैं उस समय जंगल बड़े हुआ करते थे| जंगले में बाघ, हिरण, सांभर, वनभैंसा, मयूर, बरहा(जंगली सुवर), खरगोश, गिलहरी और गैंडा हुआ करते थे| पेड़ों की बाते करें तो बांस के पेड़ थे| मैं उस समय 5 साल का था| जब 20-25 वर्ष का हुआ तो चीता, बरहा, खरगोश और पक्षी समय के साथ गायब होने लगे| हम लोग शिकार पर भी जाते थे| जानवरों के गायब होने का मुख्य कारण खनन है| खुदाई होते हुए 7-8 साल हो गया है, वहां से कई तरह क जहरीले पदार्थ निकलते हैं और रही बात फायदे की तो वह बाहरियों का ही हो रहा| (185556) GT
Posted on: Feb 10, 2021. Tags: CG KANKER LACHHURAM SALAM VANANCHAL SWARA
वनांचल स्वर: खनन से प्रदूषित होते जंगल...
ग्राम-चाहचढ़, तहसील-भानुप्रतापुर, जिला-कांकेर (छतीसगढ़), से लच्छूराम सलाम बताते हैं, चाहचढ़ की भूमि पर खनन होता है| वनभूमि ग्राम कि है जो कई ग्रामों के अंतर्गत आती है| खनन की वजह से लाल पानी निकलता है जो जहरीला है| लाल पानी की वजह से खेती पर भी असर हो रहा है, लोगों के स्वस्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है| पानी में लोहेकी मात्र ज्यादा है| इन खदानों में गाँव के 18 मजदूर भी काम करते हैं| खदान के मालिक कहते हैं कि खादानों से ग्रामवासियों का भी फायदा है, और यह झूठ है| ड्राईवर, मजदूर और अन्य कर्मचारी सभी बाहर के हैं| यह खनन का कार्य 2013 से शुरू हुआ और बनने में 2 साल का समय लगा| खनन कार्य 72 एकड़ में फैला हुआ है| खनन की वजह से आस पास की जगह पर हमेशा धुल उड़ती है| जिसके कारण ग्रामवासियों का स्वस्थ्य ख़राब होता है| खनन कार्य को रोकने के लिए हम लोग हर साल 15 दिनों के लिए आन्दोलन भी करते हैं, लेकिन इस साल महामारी कि वजह से आन्दोलन नहीं किया जा सका| खदान मालिकों ने लोगो को खूब बहलाया फुसलाया और लालच भी दिया, जरूरत का सामान भी दिया था|(185553) GT
Posted on: Feb 10, 2021. Tags: CG KANKER LACHHURAM SALAM VANANCHAL SWARA
पीडितो का रजिस्टर : चुनाव के समय वोट मांगने के लिए आते है, लेकिन कोई मदद मांगने से मदद नहीं करते है..
गावं-तोके, जिला-नारायणपुर (छत्तीसगढ़) से हड़मा समस्या बता रहे है| बता रहे है की हड़मा का घर परिवार है ,खेत है | एक दिन हड़मा को गावं से पुलिस वाले ने पकड़ कर जंगल ले गए और दो दिनों तक अपने साथ रखे और घुमा के छोड़ दिए इससे मवादियो को शक लगा की हड़मा दो दिन पुलिस के साथ रहा कर कहानी बताई है और जान से मारने की धमकी दी जा रही थी जिसके कारण गावं छोड़कर भाग आना पड़ा है |और अब वहा नारायणपुर में ही कुमार पारा में रहता है |उसे अपने गावं परिवार को छोड़ आने के लिए मजबूर होना पड़ा | हड़मा का कहना है की वह अगर गावं के लोग उन्हें लेने आने से वह घर जाना चाहता है |कुमार पारा में आने को तीन साल हो रहा है |यह उन्हें रहने कमाने खाने के लिए जगह नहीं है | मजदूरी कर किराया में रहना पड़ता है | सरकार से कोई मदद नहीं कर रहे है न हीं कोई मदद करने के लिए तैयार है | चुनाव के समय वोट मांगने के लिए पहले पहले आ जाते है अब कोई मदद करने के लिए नहीं आते | संपर्क@ 9407638988
Posted on: Feb 10, 2021. Tags: NARAYANPUR CG SONG VICTIMS REGISTER VICTIM REGISTER
वनांचल स्वर: जंगली पेड़ों के लाभ...
ग्राम-चाहचड़, तहसील भानुप्रतापपुर, जिला-कांकेर (छत्तीसगढ़) से संतराम सलाम बताते हैं कुसुम के बीज से जो तेल मिलता है, उसे लगाने से खुजली खत्म होती है। महुआ का पेड़ भी बहुत महत्त्व रखता है, इसको देवी देवताओं में भी चढ़ाया जाता है और खाया भी जाता। फल टोरी बीनते हैं। तेल खाने, लगाने में उपयोग किया जाता है। क्योटी का तेल घी के बराबर स्वाद देता है। भेलवा का तेल कांटा या खूंटा चुभने पर लगाया जाता है| दवाई के रूप में, यह जहरीला भी होता है। इसको गर्म करके लगाया जाता है। अंगुड का तेल एक ही बेल में कई सारे लगते हैं, इसके बीज का तेल दर्द और घाव पर लगातें हैं। भोईनीम सबसे ज्यादा कड़वा होता है, और ज्यादा असरदार भी है। इसका उपयोग लोग अभी भी करते हैं। ये पेड़ अभी भी हैं।
संपर्क@7647070617. (185781) GT
