खोजो न घरी-घरी तोके ढूढ़ों न दूरा कोना मोये...मसीह गीत-
ग्राम-धवलपुर,जिला-सरगुजा (छत्तीसगढ़) से अनुष्का तिग्गा एक गीत सुना रही हैं:
खोजो न घरी-घरी तोके ढूढ़ों न दूरा कोना मोये-
कहां भेटाबे प्रभु तोये-
मिले ले तरसो न मोये-
तुझ बिना प्रभु मोके-
शांति न मिले रे-
प्रार्थना करके तोके ढूढ़ों न तोके खोजो न...(AR)
Posted on: Mar 15, 2021. Tags: ANUSHKA TIGGA CG SONG SURGUJA
आज मोके बुला थे यीशु राजा रे...मसीह गीत-
ग्राम-धवलपुर,जिला-सरगुजा (छत्तीसगढ़) से अनुष्का तिग्गा एक गीत सुना रही हैं:
आज मोके बुला थे यीशु राजा रे-
आज मोके बुला थे मसी राजा रे-
प्यार से बुला थे-
दुलार से बुला थे-
लड़ाई झगडा छोड़ के चले आबा रे...(AR)
Posted on: Mar 15, 2021. Tags: ANUSHKA TIGGA CG SONG SURGUJA
दुनिया के कोने कोने में गूंज रहा यीशु का नाम...मसीह गीत-
जिला-जांजगीर चांपा (छत्तीसगढ़) से कृष्ण कन्हैया एक गीत सुना रहे हैं:
दुनिया के कोने कोने में-
गूंज रहा यीशु का नाम-
कितना प्यारा यीशु का नाम-
दुनिया में हाल यू लिया-
इस दिल के कोने कोने में-
गूंज रहा यीशु का नाम...(AR)
Posted on: Mar 15, 2021. Tags: CG CHAMPA JANJGIR KRISHN KANHAIYA
सुनाबे मोला बासुरी के तान...गीत-
पामगढ़, जिला-बिलासपुर, छत्तीसगढ़ से पिंकी जयसवाल एक भजन सुना रही हैं:
मै आहूँ कान्हा रे-
अ जाहू यमुना के पार-
सुनाबे मोला बासुरी के तान-
कोयली मयूर के सुनाबे मीठ बोली-
दोनों जन खेलबो गा अंखि मिचोली-
वृंदावन मा घुमाबे मोला यार-
सुनाबे मोला बासुरी के तान...(AR)
Posted on: Mar 15, 2021. Tags: BILASPUR CG PINKI JAYASWAL SONG
पर्व, विवाह और जीविका के लिये वनों का प्रयोग और उनका संरक्षण
धनेली कन्हार, उत्तर बस्तर कांकेर, छत्तीसगढ़ से विरेन्द्र कुमार मार्गीया बता रहे हैं, आदिवासी सामुदाय वनों से अपनी जीविका का साधन एकत्र करते थे| प्रकृति में जो फल होते हैं, जिसे सामुदाय उपयोग करता है उसके नाम पर एक पर्व मनाया जाता था, आज भी ये परम्परा देखने को मिलती है| विवाह के लिये निवासी जंगल से जामुन पेड़ की डाली, डूमर का फल का उपयोग करते हैं, मण्डप के लिये चार के पेड़ और महुआ के पेड़ का उपयोग करते हैं| पेड़ो के संरक्षण के लिये विवाह के समय इनके पौधे लगाये जाते हैं और उन्हें बड़ा करने तक उसकी देख रेख भी जाती है, जिससे पेड़ो का केवल दोहन न हो उनका संरक्षण भी हो|
