वनांचल स्वर : जंगल से हमें बांस, करील, तेंदू, चार, महुआ, हर्रा और शाक सब्जी भाजी मिलता है...

ग्राम-भुरभुसी, पंचायत-तेकामेठा, तहसील-पखांजूर, जिला-कांकेर (छत्तीसगढ़) से सत्तूराम यादव उनके गाँव के जंगल से क्या-क्या फायदे होते है उसके बारे में बता रहे है जैसे बांस, करील, तेंदू, चार, महुआ, हर्रा, टोरी और बेहडा इन चीजो का फायदा उन लोगो को जंगल से मिलता है और उसके साथ शाक सब्जी भाजी भी मिलता है जैसे- चिरोटा, खिलयारी भाजी, कोयलारी भाजी और चुनचुनिया भाजी भी मिलता है और यह बाजार वाला भाजी से जंगल वाला भाजी खाने में अच्छा लगता है और उससे समय और पैसा दोनों बचते है| जंगल से हमे शुद्ध हवा भी मिलता है उससे हमारा स्वास्थ्य भी अच्छा रहता है|जंगल है तो बारिश होता है जंगल ख़तम हो जाएगा तो कुछ नहीं बचेगा...

Posted on: Sep 05, 2018. Tags: CG KANKER PAKHANJUR SATTURAM YADAV SONG VANANCHAL SWARA VICTIMS REGISTER

तिना नामोर नानो रे नानो रे ये ये ये...गोंडी गीत...

ग्राम पंचायत-ताडवाली, विकासखण्ड-कोयलीबेडा, जिला उत्तर बस्तर कांकेर (छत्तीसगढ़) से गणेश आयाम के साथ गाँव के ग्रामीण गोंडी भाषा में एक गीत सुना रहे हैं:
तिना नामोर नानो रे नानो रे ये ये ये-
गायतन लोनु वेहट रा लयोरी-
पुनवाय माने बुम तोर रा लयोरी-
ढोलता नुकंग बाते रा लयोरी-
बस्तर बुम ता आन्दोम रा लयोरी –
पुनवान्क पुछे मायतोरोम लयोरी-
वेहोम आयो वेह्तोम रा लयोरी...

Posted on: Sep 05, 2018. Tags: CG GANESH AYAM GONDI KANKER KOELIBEDA SONG

पढ़ना कभी न छोड़ेंगे हम हर दिन पढ़ने जायेंगे...कविता

ग्राम पंचायत-ताड़वेली, विकासखंड-कोयलीबेडा, जिला-उत्तर बस्तर कांकेर (छत्तीसगढ़) से अनीश कुमार और नवीन कुमार एक कविता सुना रहे हैं:
छोटे-छोटे कदम हमारे आगे बढ़ते जायेंगे-
पढ़ना कभी न छोड़ेंगे हम हर दिन पढ़ने जायेंगे-
छोटे-छोटे हाथ हमारे गड्ढे खूब बनायेंगे-
इन गड्ढे में अच्छे सुन्दर पौधे खूब लगायेंगे-
घर आँगन को साफ रखेंगे गलियाँ साफ़ बनायेंगे-
कैसे जीना हमें चाहिए जीकर हम दिखलायेंगे...

Posted on: Sep 05, 2018. Tags: CG GANESH AYAM HINDI KANKER KOELIBEDA POEM SONG VICTIMS REGISTER

ओरछा गाँव का नाम कैसे पड़ा: एक गाँव की कहानी (गोंडी)

ग्राम-ओरछा, पंचायत-इरपानार, ब्लाक-दुर्गकोंदल, जिला-कांकेर (छत्तीसगढ़) से दुर्गुराम कवाची (सरपंच) उनके ओरछा गाँव का नाम कैसे पड़ा उसके बारे में गोंडी में बता रहे है कि बहुत समय पहले उनके गाँव के आसपास पूरा जंगल था वहां पर 10-12 घर थे और ओरछा के पेड़ सबसे ज्यादा थे लेकिन वहां पर सरकार ने पूरे ओरछा के पेड़ कटवा दिए तो फिर वहां पर जनसँख्या बढ़ने लगी और उन्ही पेड़ो के कारण उस गाँव का नाम ओरछा रखा गया और यह जानकारी उनके गाँव के बुजुर्गो के माध्यम से मिली |आदिवासी गाँव अक्सर उनके आसपास पाए जाने वाले प्राकृतिक वस्तुओं पर रखे जाते हैं ओरछा को गराड़ी या गर्रा या विषफल भी कहते हैं घरों में बल्ली और खेतों में बागड़ की तरह यह उपयोग में लाया जाता है

Posted on: Sep 05, 2018. Tags: CG DURGKONDAL DURGURAM KAVACHI GONDI KANKER STORY

किसान स्वर: जैविक खेती से स्वास्थ्य अच्छा रहता है पर हम सब रासायनिक खाद उपयोग करते हैं...

सीजीनेट जन पत्रकारिता यात्रा आज ग्राम-भुरभुसी, पंचायत-जबेली, पोस्ट-तेकामेटा, तहसील-पखांजूर, जिला-उत्तर बस्तर कांकेर (छत्तीसगढ़) पहुँची है वहां से अमर मरावी को गाँव के किसान रैनू राम कोला बता रहे हैं कि उनके गाँव (क्षेत्र) में सबसे अधिक धान की खेती करते हैं इस खेती की शुरुआत जुलाई महीने से होती है, इसमें वे समय-समय पर कम्पोस्ट खाद, डी.ए.पी. यूरिया, पोटाश आदि देते हैं| कीटनाशक 2-4-D का छिडकाव भी करते हैं, जिससे किसी भी तरह का कीट नही लगते हैं, यद्यपि इस क्षेत्र में अधिकतर किसान अभी रासायनिक खाद का उपयोग करते है पर वे कह रहे हैं कि जैविक खाद में अधिक पोषक तत्व होने के कारण इसे खाने में भी स्वाद और शरीर स्वास्थ्य को वह भोजन अधिक ताकत प्रदान करता है...

Posted on: Sep 04, 2018. Tags: AGRICULTURE CG KANKER KISAN SWARA PAKHANJUR RAINURAM KOLA SONG VICTIMS REGISTER

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