हाय रे गोकुल मा हीर रहे नहीं पाए...करमा गीत
ग्राम-डफनीपानी, पंचायत-कटरा, जिला-बिलासपुर (छत्तीसगढ़) से पूरण सिंह एक करमा गीत सुना रहे हैं :
हाय रे गोकुल मा हीर रहे नहीं पाए-
कानस बैरी अधिक तोर सताए-
साधू बाबा सुपान लेके सर पर लेय चढ़ाये-
आगे-पाछे तय नहीं सोचे तय मथुरा मा धाय-
हाय रे गोकुल मा हीर रहे नहीं पाए...
Posted on: Jun 20, 2017. Tags: POORAN SINGH SONG VICTIMS REGISTER
Today's News from newspapers in Gondi : 20th June 2017-
आदिवासी इलाकों में बनेंगे 28 छात्रावास 18 महीनों में पूरा करने का लक्ष्य- दैनिक भास्कर-
अधिकारियों की मिलीभगत से लूटी जा रही आदिवासियों की जमीन : बंधु तिर्की रांची- प्रभात खबर-
आदिवासी बाहुल्य वाले कुंडम में जलसंकट- दैनिक भास्कर-
छात्रों की टीम आदिवासी गांवों तक पहुंची ग्रामीणों को दिलाया योजनाओं का लाभ- इंडिया टुडे-
Posted on: Jun 20, 2017. Tags: DINESH WATTI NEWS SONG VICTIMS REGISTER
हाय रे हाय रे बहेरा दाना यार...करमा गीत
ग्राम-डाहीबहरा, विकासखंड-गौरेला, जिला-बिलासपुर (छत्तीसगढ़) से अमृतबाई एक करमा गीत सुना रही हैं :
हाय रे हाय रे बहेरा दाना यार-
फोड के तै देख ले बरोबर माया रे-
सबके नीता लागी लबेदा-
मोर नीता तलवार हाय रे मोर नीता तलवार-
सबके हावे दाई भाई मोर
नइया परिवार मोला निकलन दे परदेश...
Posted on: Jun 20, 2017. Tags: GANESH SINGH AYAAM SONG VICTIMS REGISTER
किसान स्वर: मवेशी के चोट लगने का उपचार...
सीजीनेट जनपत्रकारिता जागरूकता यात्रा आज ग्राम-जिल्दा, ब्लाक-पेंड्रा जिला-बिलासपुर (छत्तीसगढ़) में पहुँची है वहां यात्रा के साथी बाबूलाल नेटी की मुलाक़ात एक बुजुर्ग बुधराम सिंह से से हुई है जो यह दावा कर रहे हैं कि जब किसान के मवेशी को चोट लगती है तो लोग बहुत सारा खर्च करते हैं पर उसका एक घरेलू और सरल उपाय है. वे दावा करते हैं कि जब भी किसी मवेशी को चोट लग जाए तब रविवार के दिन उसे सेमी की ढाई पत्तियों खिला देने से उसका चोट सही हो जाती है ध्यान रखें कि पत्तों में कीड़े न लगे हुए हों. इस उपचार से घाव में कीड़े नहीं पड़ते और इससे मवेशी के नुक्सान होने से बच जाते हैं, अधिक जानकारी के लिए आप बुधुराम वैद्य से@8126488837 पर संपर्क करें |
Posted on: Jun 20, 2017. Tags: BUDHURAM SINGH SONG VICTIMS REGISTER
छेरी बैला जंगल में चराई हमन...छत्तीसगढ़ी गीत
ग्राम-देवरी, पोस्ट-चंदोरा, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से कैलाश सिंह पोया एक गीत सुना रहे हैं :
छेरी बैला जंगल में चराई हमन-
धर लेथन खाना पीना शाम के घर आई-
दिन भर गुमत रहती छेरिया घोड़ा भाई-
आइके घर ला हमन खाना ला खाई-
छेरी बैला भाई जंगल में चराई...

