सास बहू की कहानी...

ग्राम-रक्षा, पोस्ट-फुनगा, जिला-अनूपपुर (मध्यप्रदेश) से उषा सिंह उईके एक कहानी सुना रही हैं:
किसी गांव में सास और बहू रहते थे एक दिन सास ने कहा मै तीर्थ जा रही हूँ, जो दूध दही होता है उसे बेच कर पैसा एकत्र कर लेना इसके बाद वो चली गई, चैत्र वैशाख का महीना था उनकी बहू सारा दूध दही पीपल, तुलसी के पेढ पर डाल देती और खाली बर्तन ला कर रख देती, तीर्थ करने के बाद जब सास वापस आई तो पैसे मांगी तो बहू ने सारा दूध पीपल पर डालने की बात बता दी इस पर सास ने कहा जैसा भी हो मुझे पैसे चाहिए, तब बहू पीपल और तुलसी के पास जाकर बैठ गई कहा कि मेरी सास मुझे दूध दही के पैसे मांग रही है मुझे पैसे दो तब पीपल कहता है बेटी हमारे पास पैसे नही है, कंकड़ पत्थर है इन्हें ले जा वह उठा कर अपने घर ले आई जब सुबह सास ने पूछा पैसे दो तो बहू ने अपना कमरा खोला तो देखा कि हीरे मोतीयों से पूरा कमरा जगमगा उठा बहू ने कहा ले लो अपने पैसे, यह देखकर सास के मन में भी लालच आया और वह भी बहू के जैसे ही रोज़ दूध दही पीपल और तुलसी में डालने लगी और बदले में एक दिन बहू जैसे पैसे मांगने लगी पर उसे कुछ नहीं मिला इस कहानी से यह संदेश जाता है कि लालच नही करना चाहिए-

Posted on: Sep 01, 2017. Tags: SONG USHA SINGH UIKE VICTIMS REGISTER

बांसुरी की धुन...

सीजीनेट जन पत्रकारिता जागरूकता यात्रा आज ग्राम-रक्सा, पोस्ट-फुनगी, जिला-अनूपपुर (मध्यप्रदेश) में पहुँची हैं जहां यात्रा के साथी सुखसागर सिंह पावले, धनसाय मरकाम और गीता टेकाम का परिचय गाँव के साथी रामनाथ सिंह मरावी से हुई है जो उनको बांसुरी की एक धुन सुना रहे है जो वे हम सभी के साथ यहां साझा कर रहे हैं :

Posted on: Sep 01, 2017. Tags: SONG SUKHSAGAR SINGH PAWLE VICTIMS REGISTER

ग्राम सभा में सब बोले, बन्द जबानो को खोले...कविता

ग्राम-देवरी, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से कैलाश सिंह पोया ग्राम सभा को लेकर एक कविता सुना रहे है:
ग्राम सभा में सब बोले, बन्द जबानो को खोले-
साफ रहेगा जल जीवन, स्वस्थ रहेगा जन-जन उतना-
एक आदमी एक औरत को, हमने तो जाना-
एक चादर का ताना पूजा है, चादर का बाना...

Posted on: Sep 01, 2017. Tags: KAILASH SINGH POYA SONG VICTIMS REGISTER

पानी बरसे अषाढ़ हरा हरा दिखथे पहाड़...गीत

ग्राम-देवरी, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से कैलाश सिंह पोया एक गीत सुना रहे हैं :
पानी बरसे अषाढ़ हरा हरा दिखथे पहाड़-
नार बेवार जमे जमथे गाय के अहार-
जंगल झाड़ दिखे, दिखथे फहाड़-
देखके सगा जन पर्वत के झाड़-
जंगल में गाय भैस चरथे असाड-
हमार जीव हरियर दिखथे पहाड़...

Posted on: Aug 31, 2017. Tags: KAILASH SINGH SONG VICTIMS REGISTER

छिप-छिप अश्रु बहाने वालो, मोती व्यर्थ लुटाने वालो...कविता

ग्राम-बसंतनगर, भानुप्रतापपुर, जिला-कांकेर (छत्तीसगढ़) से काशीराम सिन्हा एक कविता सुना रहें है :
छिप-छिप अश्रु बहाने वालो, मोती व्यर्थ लुटाने वालो-
कुछ सपनो के मर जाने से, जीवन नहीं मरा करता है-
सपना क्या है नैन सेज पर सोया हुआ आंख का पानी-
और टूटना है उसका ज्यों जागे कच्ची नीद जवानी-
गीली उमर बनाने वालो दोबे बिना नहाने वालो-
कुछ पानी के बह जाने से सावन नहीं मरा करता है...

Posted on: Aug 31, 2017. Tags: KASHIRAM SINHA SONG VICTIMS REGISTER

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