मैना साल्हो, मैना साल्हो किरुखा जोराये...कर्मा गीत-
ग्राम-देवरी, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से कैलास सिंह पोया एक सरगुजिहा कर्मा गीत सुना रहे हैं :
मैना साल्हो, मैना साल्हो किरुखा जोराये-
हाय रे मैना साल्हो रे काकर पिहा बांधल जाये-
काकर पियार भाई संगला बटोरे हाय रे मैना-
मैना साल्हो, मैना साल्हो किरुखा जोराये-
हाय रे मैना साल्हो रे काकर पिहा बांधल जाये-
काकर पियार भाई संगला बटोरे हाय रे मैना...
Posted on: May 27, 2019. Tags: CG KAILASH SINGH POYA SONG SURAJPUR VICTIMS REGISTER
हमारे वार्ड में पानी की समस्या है, आवेदन करने पर अधिकारी ध्यान नहीं देते...मदद की अपील-
ग्राम-देवरी, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से कैलास सिंह पोया बता रहे हैं| उनके गांव के वार्ड क्रमांक 1 में पानी की समस्या है| उन्होंने कई बार अधिकारियों के पास आवेदन किया| कई साल से आवेदन दे रहे हैं| लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है | इसलिये वे सीजीनेट के साथियों से अपील कर रहे हैं, कि दिये गये नंबरों पर अधिकारियों से बात कर पानी की समस्या को हल कराने में मदद करें : PHE@8120171919, सरपंच@7987796026. कैलास सिंह पोया@7970041518.
Posted on: May 27, 2019. Tags: CG KAILASH SINGH POYA SONG SURAJPUR VICTIMS REGISTER WATER PROBLEM
आलसी कर दिना आवे गर्मी मा अकर बकर जीवा लागे...गीत
ग्राम-देवरी, पोस्ट-चंदोरा, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से कैलास सिंह पोया एक गीत सुना रहे हैं :
जंगल झाड़ी हरा भरा सुग्घर लागे-
सब हमन घरे जाबो-
आलसी कर दिना आवे गर्मी मा अकर बकर जीवा लागे-
गुइया रे अब हमन घरे जाबो-
रेंगल साथी गुइया रे अब हमन घरे जाबो...
Posted on: May 26, 2019. Tags: CG KAILASH POYA PRATAPPUR SINGH SONG SURAJPUR VICTIMS REGISTER
गाना हर हरा-भरा सुग्गर लागे संगी रे, दिनक राते पानी पहटे...गीत
ग्राम-देवरी, तहसील-प्रतापपुर, जिला-सूरजपुर, (छत्तीसगढ़) से कैलाश सिंह पोया एक गीत सुना रहे हैं:
गाना हर हरा-भरा सुग्गर लागे संगी रे-
दिनक राते पानी पहटे-
गाना कुशियार हर हरा-भरा सुग्गर लागे संगी रे-
गोरी रे दिनक राते पानी पहटे-
राती-राती हाथी झुण्डत-झुण्डत करे परीशान-
साथी रे हरा-भरा सुग्गर लागे संगी र...
Posted on: May 26, 2019. Tags: CG KAILASH POYA PRATAPPUR SINGH SONG SURAJPUR VICTIMS REGISTER
उनके मन में लोभ नहीं है, पाप नहीं, परवाह नहीं...कविता-
ग्राम-देवरी, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से कैलास सिंह पोया एक कविता सुना रहे हैं :
उनके मन में लोभ नहीं है,
पाप नहीं, परवाह नहीं,
जग का सारा माल हड़प कर,
जीने की भी कोइ चाह नहीं,
जो मिलता है अपने छम से
उतना भर लेते हैं,
औरों के हित उसे छोर देते हैं...
