न कोऊ हमारे हैं, बड़े दुखियारे हैं...एक बुन्देलखंडी गीत

न कोऊ हमारे हैं, बड़े दुखियारे हैं
बड़े भोर दातुन पानी कोटे में हमें नइया
आँख मीडत साऊ आगए कारे उठो नइया

कि आठ बजे तक बना के रोटी कटिया खवैया. पेंच लगवे रे फटना न कईया फिर काटन जइयों
लगे काटने दोई धार इन को नइया को नऊआ लगे करमन के बचका रे
लड़का बिटिया लगे खेलने न तन पर उन्ना रे
न कोऊ हमारे हैं, बड़े दुखियारे हैं
काम करत में बात न करते आँख में अंशु आए, ई जीवन को काम भला है
रोटी ना खाए उठा के रोटी पिया को देदे, नून मिर्च बांटो
दो दो रोटी सबने खाए फिर चारो काटो कि इ घर सर का ले चंगे
काहो को बेटा रोहे , रोहे परे बेटा के मारे
ततो पानी पी पी रोवे लड़का- बिटिया रे
न कछु के छारे है न कोऊ हमारे हैं
उन्ना लगता कोऊ को नैया साया फट गए मोरे
फूटी कौड़ी घर में नैया कहे को आए तिजोरे
न डाक्टर करे दवाई पांच हजार लेक देने न मिले नाज दवाई
सुने न कोई सरकार ,लूटे ससो नेता रे तो सरकार
पूंजी पतियाँ से मांगो दस दस रूपया रे
न कोऊ हमारे हैं

Posted on: Jul 12, 2013. Tags: Dashrath Kushwaha

A folk song from the time of childbirth from Khandwa, Madhya Pradesh...

Dashrath Kawde is helping us listen to a song which is sung by women from the family of girls side after child birth when they come to the house of new born with gifts

Posted on: Jul 01, 2013. Tags: DASHRATH KAWDE KHANDWA

संतरा सेवेना बाई न, अन्ना मामा ना बगिचाते ओयेना...गोंडी विवाह गीत

यह गाना दशरथ कवडे मामाडोह खंडवा मप्र द्वारा तुलसा बाई से रिकॉर्ड कराया है गाने में युवा अपने होने वाली पत्नी को मिलते समय संतरे देने की कल्पना करते हुवे कह रहा है की मै अपने प्रेयसी से मामा के बगीचे में मिलने जाऊंगा और उसे संतरा भेट करूँगा| मोहनी द्वारा मेरे लिए सम्मोहित करूँगा | गोरतलब है कि कोयतुर ,गोंड समुदाय में मामा के लड़के के साथ विवाह करने की सामजिक मान्यता है ,इस गाने के बोल है ,संतरा सेवेना बाई न अन्ना मामा ना बगिचाते ओयेना | यह गाना शादियों के समय गाया जाता है | इस बारे मे अधिक जानकारी के लिए दशरथ जी से 08889778509 पर संपर्क कर सकते हैं |

Posted on: Jun 24, 2013. Tags: Dashrath Kawde

मै तुमको विश्वास दूँ, तुम मुझको विश्वास दो...

मै तुमको विश्वास दू तुम मुझको विश्वास दो 2
शंकाओं के सागर हम तर जायेंगे
मातृभूमि को मिलकर स्वर्ग बनायेंगे
मै तुमको विश्वास दू तुम मुझको विश्वास दो 2
प्रेम बिना तो यह जीवन अनजाना है
सब अपने है कौन यहाँ बेगाना है
हर पल अपना अर्थवान हो जायेगा
बस थोडा सा मन में प्यार जगाना है
इस जीवन को साज दो मौन नहीं आवाज दो
इन्सानो में मीठी प्यास जगायेंगे
मरुधरा को मिलकर स्वर्ग बनायेंगे
मै तुम को विश्वास दू ....................
अलगाव से आदत लगने लगती है
उपवन की हर साँस छलकने लगती है
हर आँगन में सिर्फ सिसकियाँ उठती है
हर बन्दों की सांस उखड़ने लगती है
भेदभाव को त्याग दो, बस सबको अनुराग दो
सन्नाटे में हम सरगम बन जायेंगे
मातृभूमि...........
जन्म भूमि को ........
मै तुमको बिश्वास दू ....
ढूढ सको तो इस माटी में सोना है
हिम्मत का हथियार नहीं बस खोना है
मुस्कुरा दो तों हर मौसम मस्ताना है
बीत गया जो समय उसे क्या रोना है
लो हाथो में हाथ लो
एक दूसरे का साथ दो
इस धरती का खोया प्यार जगायेंगे
मातृभूमि को मिलकर स्वर्ग बनायेंगे
जन्मभूमि को मिलकर स्वर्ग बनायेगे
मरुधरा को मिलकर स्वर्ग बनायेंगे
मै तुझको विश्वास दू ..........

Posted on: Jun 23, 2013. Tags: Dashrath Kawde

Adivasis have started visiting hospitals instead of traditional healers here...

Dashrath Kawde from Khalwa block of Khandwa district is talking to some health workers who tell him that earlier the adivasis of this area never visited hospitals and relied on traditional healers. But now after their intervention they have started visiting hospitals and also take their children there. They tell him that the adivasis often thank them for this advise. For more Kawde Ji can be reached at 08889778509

Posted on: Jun 22, 2013. Tags: Dashrath Kawde

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