गोंडी संस्कृति के अनुसार जब युवती को मासिकधर्म हो रहा है वह उस समय गोटुल में नहीं जा सकती...
ग्राम-मेकावाही, पंचायत-शंकरनगर, ब्लॉक-कोयलीबेडा, जिला-उत्तर बस्तर कांकेर (छत्तीसगढ़) से बस्तुराम भोगा, जुन्गुराम आचला, सीताबाई, हिन्दूबाई, सेवंता और छन्नोबाई गोंडी भाषा में गोटुल संस्कृति के बारे में जानकारी बता रहे हैं |गोटुल में क्या-क्या होता है: गोटुल में गाँव में कोई भी समस्या हो कोई गलती करता है इन सब का गोटुल में ही फैसला किया जाता है और गोटुल में शाम को सिर्फ़ वे लोग ही जा सकते है जिनका शादी नहीं हुआ है जैसे बच्चे से लेकर युवक-युवतियां ही नाच गाना कर सकते है |जो युवती मासिकधर्म से रहती हैं, उसका गोटुल में प्रवेश वर्जित है जितने दिन तक उसका पीरियड होता है उतने दिन तक गोटुल में नहीं जा सकती | पीरियड होने के बाद ही गोटुल में जा सकती है|
Posted on: Sep 06, 2018. Tags: BASTURAM BHOGA CG CULTURE GONDI GOTUL KANKER KOYLIBEDA
कसूर घूटे पराड येलो दुवार तूने नेराड़ा हो...गोंडी गीत
ग्राम-पिंडकसा, पंचायत-कुरेनार, तहसील-पखांजूर, जिला-उत्तर बस्तर कांकेर (छत्तीसगढ़) से मोंगरी, सोगीबाई, रतोबाई और पोलोबाई गोंडी भाषा में एक गीत सुना रहे हैं:
रे रे लोयो रेला रेला रे रे लोयो रेलाय हो-
कसूर घूटे पराड येलो-
दुवार तूने नेराड़ा हो-
जाति बाती पेकोर हो-
जाति बाती पेकोर-
कसूर घूटे पराड येलो-
दुवार तूने नेराड़ा हो...
Posted on: Sep 06, 2018. Tags: CG GONDI KANKER MOGRI PAKHANJUR RATOBAI SOGIBAI SONG
हमारे गाँव में ज्यादा लोग छत्तीसगढ़ी बोलते हैं पर हमलोग मातृभाषा गोंडी को बचाकर रखना चाहते हैं...
ग्राम-भुरभुसी, पंचायत-जबेली, तहसील-पखांजूर, ब्लाक-कोयलीबेडा, जिला उत्तर बस्तर कांकेर (छत्तीसगढ़) से रैनूराम कोला और सालेकराम टोप्पो सीजीनेट के अमर मरावी को उनके गाँव में बोले जाने वाले भाषाओं के बारे में बता रहे है कि वहां के आदिवासी गोंडी भाषा में बहुत कम बोलते है छत्तीसगढ़ी भाषा में ज्यादा बातचीत करते है और घर में अपने परिवार के साथ गोंडी भाषा में बात करते हैं जो आदिवासियों की मातृभाषा है |उस भाषा को भूलते जा रहे है अब धीरे-धीरे मातृ भाषा लुप्त होते जा रही है| लेकिन अब आदिवासी लोग अपनी भाषा को बचाकर रखना चाहते है| उनके गाँव में सीजीनेट की यात्रा पहली बार गया हुआ था| वहां के लोगो को बहुत अच्छा लगा |
Posted on: Sep 06, 2018. Tags: CG KANKER LANGUAGE PAKHANJUR RAINURAM KOLA SALEKRAM TOPPO SONG VICTIMS REGISTER
ये आप के हम जान दे परिवर्तन की इस बेला में...स्वागत गीत
ग्राम-सावेर, पोस्ट-बांदे, ब्लाक-कोयलीबेडा, तहसील-पखांजूर, जिला-कांकेर (छत्तीसगढ़) से रुकमनी उसेंडी एक स्वागत गीत सुना रही है:
ये आप के हम जान दे-
परिवर्तन की इस बेला में-
मधुर मुस्कान से करते हम स्वागत-स्वागत-
शुभ स्वागतम् शुभ स्वागतम्-
पाऊल पाऊल धरती पे-
पड़े जो आपके शुभ कदम...
Posted on: Sep 06, 2018. Tags: CG KANKER PAKHANJUR RUKMANI USENDI SONG VICTIMS REGISTER
हमारे गाँव का नाम रेंगावाही कैसे पड़ा : एक गाँव की कहानी (गोंडी भाषा में)
सीजीनेट जन पत्रकारिता जागरूकता यात्रा आज ग्राम-रेंगावाही, ब्लाक-कोयलीबेडा, जिला-उत्तर बस्तर कांकेर (छत्तीसगढ़) में पहुँची है वहां मोहन यादव की मुलाक़ात गाँव के बुजुर्ग गांडूराम धुर्वा से हुई है जो उनको उनके गाँव का नाम रेंगावाही कैसे पड़ा उसके बारे में गोंडी भाषा में बता रहे है वे कह रहे हैं कि पहले के ज़माने में उनके गाँव में बहुत ज्यादा रेंगा (बेर) के पेड़ हुआ करते थे जिसको काटकर यह गाँव बसाया गया है उसी के कारण उनके गाँव का नाम रेंगावाही पड़ा | उनको यह जानकारी उनके दादी दादा के माध्यम से पता चला ऐसा वे बता रहे है|
