लाओ लाओ रे सखी, ले आओ तेल हल्दी पीस के...कविता-
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडीयारी एक कविता सुना रहे हैं :
लाओ लाओ रे सखी, ले आओ तेल हल्दी पीस के-
बेटी जीवन की सगाई भयो-
लगन के ठाड़ भयो समधिन पठायो-
न्योता न्योती साजन देई आयो-
लल्लन ब्राम्हण देवता मिली वेदी बनायो-
लाओ लाओ रे सखी, ले आओ तेल हल्दी पीस के...
Posted on: Jul 31, 2018. Tags: KANHAIYALAL PADIYARI SONG VICTIMS REGISTER
आओ साथियो मिल जुल कर कुछ करें...कविता-
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडीयारी एक कविता सुना रहे हैं :
आओ साथियो मिल जुल कर कुछ करें-
अपने आस-पड़ोस को श्रमदान कर, खाली जगहों पर फलदार पौधे लगायें-
धरती कि सेवा माँ बाप की सेवा, होती है ईश्वर की सेवा-
उन सेवाओं से बड़ा न कोई जगत में, हुआ न कोई दूसरा सेवा-
अपने आस-पास कि सफाई कर एक फलदार वृक्ष लगायें-
वृक्ष लगाकर पुण्य कमायें वृक्ष होता महान-
वृक्ष से फल-फूल मिलता वृक्ष ही है भगवान...
Posted on: Jul 29, 2018. Tags: KANHAIYALAL PADIYARI SONG VICTIMS REGISTER
माटी के घर ला फोड़ के मनात है तिहार...छत्तीसगढ़ी कविता
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडियारी एक छत्तीसगढ़ी कविता सुना रहे है:
माटी के घर ला फोड़ के-
मनात है तिहार-
ईटा सीमेंट कुदरू गिट्टी के-
हो गए है भरमार-
बैला गाडी भैसा गाडी नंदा गए-
ट्रेक्टर डम्पर के आगे बहार-
पटपटी में चढ़ के बेटा-
चले है मनाये दशहरा त्यौहार-
आगू पीछे हावे उदा-उदा-
दोस्त और संगवारी यार-
दाई दादा के बेच के गुदा-
खावत आवे जेहरिले खुसियात...
Posted on: Jun 20, 2018. Tags: KANHAIYALAL PADIYARI SONG VICTIMS REGISTER
जात्ता जतरी म दरद पिटत रहन हो...छत्तीसगढ़ी कविता
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडियारी एक छत्तीसगढ़ी कविता सुना रहे है:
जात्ता जतरी म दरद पिटत रहन हो-
आइस मशीन जमाना खेला ठगवा होइन वो-
एकी गुसड म उलट चलत रहन वो-
आइस मील जमाना खेला ठगवा होइन वो...
Posted on: Jun 16, 2018. Tags: KANHAIYALAL PADIYARI SONG VICTIMS REGISTER
आज धरती माँ अपने तक़दीर पर रो रही है...कविता
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडियारी एक कविता सुना रहे हैं:
आज धरती माँ अपने तक़दीर पर रो रही है-
जिन्हें खोया उन्हें खोज रही है-
काला बाजारी मक्कारी भी शरमा रही है-
आँखों ही आँखों में आंसू बहा रही है-
हैवानियत को सीमा पार हो गई है-
अस्मत के लुटेरो का बाजार हो गई-
आज धरती माँ अपने तक़दीर पर रो रही है...

