सावन की महीना पवन मारे झकझोर...व्यंग्य गीत-
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडीयारी एक व्यंग्य गीत सुना रहे हैं :
सावन की महीना पवन मारे झकझोर-
जियरा मोरे डोले गांव शहर में चोर-
राम गजब आये ये बेशरम चोर-
पुलिस वाले भईया संभालो गांव शहर के बाग़ डोर-
तुम्ही हो खेवईया ना चले किसी का जोर-
सावन का महीना पवन मारे झकझोर...
Posted on: Aug 14, 2018. Tags: KANHAIYALAL PADIYARI RAIGARH CHHATTISGARH SONG VICTIMS REGISTER
सावन महीने में अमावस्या के दिन त्यौहार के रूप में घर, गली आदि सभी जगह की सफाई की जाती है...
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडियारी बता रहे हैं, सावन महीने के अमावस्या के दिन घर, गली सभी जगह की साफ सफाई की जाती है, देवी देवताओं की पूजा कर मनौती करते हैं, आज के दिन पौधे लगाने चाहिए, उनके गांव में इस त्योहार को विशेष रूप से मनाया जाता है, लोग पूजा स्थल पर पूजा करते और नारियल प्रसाद, मदार, बेल पत्ती अदि चढ़ाते है, उनकी मान्यता है कि इस प्रकार कार्य करने से देवी देवता और प्रकृति खुश रहती है |इस तरह के त्यौहारों का न सिर्फ धार्मिक बल्कि प्राकृतिक महत्त्व भी है जिसको हमें समझना चाहिए और इस तरह की स्वस्थ परम्पराओं को समझ बनाकर औरो को समझाना चाहिए जिससे यह त्यौहार और अधिक मनाया जाए
Posted on: Aug 13, 2018. Tags: CULTURE KANHIYALAL PADIYARI RAIGARH CHHATTISGARH SONG VICTIMS REGISTER
पेड़ो के झुरमुटो से आती है पैगाम, मैं शांति की प्रतीक हूँ मुझसे ही तुम महान...कविता-
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडियारी एक कविता सुना रहे हैं :
पेड़ो के झुरमुटो से आती है पैगाम-
मैं शांति की प्रतीक हूँ मुझसे ही तुम महान-
मुझसे तुम हो महान, तुमसे मै नही-
मै तो प्रकृति की देन हूँ,
पवन मुझे उबलाती है, पवन मुझे उठाती है-
पवन के झोको से बिखरकर, अपने आप उग आती हूँ...
Posted on: Aug 13, 2018. Tags: KANHIYALAL PADIYARI POEM RAIGARH CHHATTISGARH SONG VICTIMS REGISTER
पेड़ो की झुरमुठों से आती है पैगाम...पेड़ पर कविता
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडियारी पेड़ो पर आधारित एक कविता सुना रहे हैं:
पेड़ो की झुरमुठों से आती है पैगाम-
मैं शांति की प्रतीक हूं उससे तुम महान-
तुमसे मैं नही मैं तो प्रकृति की देन हूँ-
पवन मुझे सुलाती है पवन मुझे उठाती है-
पवन के झोकों से बिखर कर अपने आप उगती हूँ-
मेघों को मैं ही बुलाकर जमकर बारिश कराती हूँ-
मुझसे भी ये ऊँचे-ऊँचे पर्वत में नदी नाला बनती हूँ...
Posted on: Aug 12, 2018. Tags: HINDI POEM KANHAIYALAL PADIYARI RAIGARH SONG VICTIMS REGISTER
चम-चम बिजली चमके, काले-काले बदल छाया...सावन कविता-
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडियारी वर्षा ऋतु पर एक कविता सुना रहे हैं :
चम-चम बिजली चमके काले-काले बादल छाया-
उमड़-घुमड़कर बादल गरजा, सुहानी वर्षा ऋतु आया-
मोतियाँ टपके पानी बनकर, टप-टपाकर धरती माँ को नहलाया-
हरित हुआ नवपल्लव से, विविध जीव जंतु जनम पाया-
दूल्हन जैसी कर नवश्रंगार सबके मन को पुलक कर निभाया-
चले किसान हल बैला लेकर, धरती माँ को खूब उकसाया...
