शाम सुंदर की सुंदर मुरतिया...गीत-
राजनगर, अनूपपुर (मध्यप्रदेश) से मारकंडे सिंह एक गीत सुना रहे हैं:
शाम सुंदर की सुंदर मुरतिया-
हमरो मन सखी मोह लिहे-
मुकुट शीश और कानन कुण्डल-
सुंदर पीताम्बर अति माधुर-
शाम सुंदर की सुंदर मुरतिया... (AR)
Posted on: Oct 07, 2020. Tags: HINDI SONG SONG VICTIMS REGISTER
Impact : सीजीनेट में सन्देश रिकॉर्ड करने के बाद मजदूरी भुगतान मिल गया है...
ग्राम-ख़ुशी नगर धमनी, जिला-सूरजपुर छत्तीसगढ़ से देवबरसन बता रहे है कि उनके साथ के भानमति और देवंती ने मनरेगा के तहत आंगनवाडी में काम किये थे उसका मजदूरी भुगतान नहीं मिल रहा था उसके लिए सरपंच को भी बोले थे तो आज मिलेगा कल मिलेगा बोलकर टाल रहे तो उन्होंने सीजीनेट सीजीनेट स्वर में एक सन्देश रिकॉर्ड किये करने के बाद सीजीनेट के साथियों की मदद से उनको मजदूरी भुगतान मिल गया है | इसलिए साथी सीजीनेट के साथियों को और अधिकारियो को धन्यवाद दे रहे है, जिन्होंने उनकी मदद की | संपर्क@8462927713.
Posted on: Oct 07, 2020. Tags: IMPACT STORY SONG VICTIMS REGISTER
भारत के सैनिक बनके फर्ज निभैबा कि न...गीत-
सीजीनेट श्रोता गुड्डू भारती जो दृष्टिहीन हैं, एक गीत सुना रहे हैं:
भारत के सैनिक बनके फर्ज निभैबा कि न-
बोला देशवा के खातिर गर्दन कटईबा कि न-
भारत माता के भूमि के जितैबा कि न-
भारत के सैनिक बनके फर्ज निभैबा कि न-
बोला देशवा के खातिर गर्दन कटईबा कि न...(AR)
Posted on: Oct 07, 2020. Tags: HINDI SONG SONG VICTIMS REGISTER
यदि समय को पहचान ली आपने महकते हुए सुबह होगी....पंक्तिया-
सुरेश कुमार बड़वानी मध्य प्रदेश से पंक्ति सुना रहे हैं :
समय की पहचान-
यदि समय को पहचान ली आपने महकते हुए सुबह होगी-
खुशियां भरी रात होगी-
वर्षा के प्रत्येक दिन किस्मत आपके साथ होगी-
जब सफलताओं का दौर चलेगा जीत आपकी साथ होग-
नाम और शोहरत आपकी नई की सौगात होगी-
हर दौर यह महफिल में सबसे पहले आप की शुरुआत-
यदि समय को पहचान लिया आपने तो किस्मत आपके साथ होंगी-
दो कदम जरा हौसले बढ़ाना मंजिल आपके साथ होंगी-
यदि समय को पहचान लिया आपने तो किस्मत आपके साथ होंगी...
Posted on: Oct 07, 2020. Tags: SONG VICTIMS REGISTER
वा झुलनी मा झूल राहों वा झुलनी मा झूल राहों रे-छत्तीसगढ़ी गीत सुना रही है...
जाया मुडा खैरागढ़, जिला-राजनांदगाँव, छत्तीसगढ़ से छतीसगढ़ी गीत सुना रही है-
वा झुलनी मा झूल राहों वा झुलनी मा झूल राहों रे-
गाय रे गवैया रे वा झुलनी मा झूल राहों रे-
कौन ने कोडाये तर ओ सगुरिया कौन बाधाये होके पार-
वो झुलनी झूल रहो रे,राम कोडाये ताल हो सगुरिया – लखन बाधाये होक पार या झुलनी मा झूल राहों रे-
गाय रे गवैया रे वा झुलनी मा झूल राहों रे-
कौन बनाये अकाल बकल तोरे कौन बनाये-
कौन बनाये गजमोहर ओ झुलनी झूल राहों रे-
सोनारा बनाये अकाल बकल चुरी लोहरा बनाये गजमोहर-
वो झुलनी मा झूल राहों रे,गाय रे गवैया रे वा झुलनी मा झूल राहों रे...
