जब गुस्सा मे बरल बा दुलार...रचना
मालीघाट, जिला-मुजफ्फरपुर, (बिहार) से सुनील कुमार,
कुमार विरल की रचना सुना रहे है:
जब गुस्सा मे बरल बा दुलार-
प्रभु जी भुजिया के प्यार हो गइल-
केहू प्यार से जे देवे दुत्कार-
त भुजिया की प्यार हो गइल
चाहब की चेहरा इआद नाहीं आवे-
चाहब की मिलला पे मन नाहीं-
बाकि देखला पे झरे हरसिंगार-
त भुजिया के प्यार हो गइल...
Posted on: Apr 02, 2017. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
बुद्ध का अंतिम भोजन-
गांव के एक गरीब आदमी के निमंत्रण को स्वीकार कर बुद्ध उसके यहाँ भोजन करने गए. गरीबी के कारण बिहारी गरीब लोग जो बरसात के दिनों में जो लकड़ी पर कुकुरमुत्ता पैदा होता हैं उसे इकटठा कर सुखा लेते हैं एवं सब्जी बनाकर खाते हैं .कभी-कभी कुरकुरमुत्ता में जहर मिल जाने से जहरीला हो जाता हैं.बुद्ध के द्वारा गरीब का भोजन आनन्दपूर्वक खाते रहे जबकि जहरीला कुकुरमुत्ते सख़्त कड़वे मुँह में रखना भी मुश्किल था और गरीब व्यक्ति से कहते रहे कि मैं बहुत आनंदित हूं .बुद्ध के घर से निकलने पर जब गरीब आदमी ने सब्जी चखा तो तुरंत भागा हुआ बुद्ध के पास पहुँचा और कहने लगा कि सब्जी तो जहर थी और गरीब आदमी छाती पीटकर रोने लगा .इसपर बुद्ध ने कहा तू चिंता मत कर क्योंकि में जानता हूं अमृत हैं. बुद्ध ने कहा तू धन्यभागी है तू सौभाग्यशाली हैं .आनंदित हो कि हजारों वर्षो मे बुद्ध जैसा व्यक्ति पैदा लेता हैं .दो ही व्यक्ति को उसका सौभाग्य मिलता हैं पहला भोजन कराने का अवसर उसकी माँ को मिलता हैं और अंतिम भोजन कराने का अवसर तुझे मिला हैं.तू सौभाग्यशाली हैं आनंदित हो इसपर बुद्ध के शिष्य कहने लगे यह आदमी हत्यारा हैं .बुद्ध ने कहा भूलकर भी ऐसी बात नहीं कहना अन्यथा उसे लोग परेशान करेंगें .जाओ गांव में डुंडी पीटकर बता दो की यह आदमी सौभाग्यशाली हैं क्योंकि इसने बुद्ध को अंतिम भोजन दान दिया हैं. सुनील कुमार@9308571702
Posted on: Apr 01, 2017. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
दिव्यांगों के लिए सरकार की अनेक योजनाएं हैं पर इस बालिका के लिए कोई सुविधा नहीं पहुँची है...
ग्राम-रक्षा, पोस्ट-फुनगा, तहसील-जैतहरी, जिला-अनूपपुर, (मध्यप्रदेश) में सुखसागर सिंह पावले ग्रामीणों से चर्चा कर रहे है जहाँ पर एक बच्ची है जो दिव्यांग है उसे बचपन से आँखों से दिखाई नही देता है, जिसको अभी तक सरकार की और से कोई सुविधा नही मिली है जबकि दिव्यांग बच्चो के लिए कई तरह की योजनाऐं चलाई जा रही है लेकिन वास्तव में लोगो को योजना का लाभ नही मिल पा रहा है, तो उनका अनुरोध है कि आप कृपया ग्रामीण बालिका प्रेमवती सिंह की मदद करने के लिए आप इन नम्बरों पर फ़ोन कर दबाव बनाए-
जिला कलेक्टर अनुपपूर@9425168667, विधायक@9425473007, जैतहरी सीईओं@9753725845. पावले@9111070571
Posted on: Apr 01, 2017. Tags: SONG SUKHSAGAR SINGH PAWLE VICTIMS REGISTER
हम विधवाओं को पेंशन नहीं मिल रही, अधिकारी मदद नहीं करते, कृपया उनको फोन कर दबाव डालें...
सीजीनेट जन पत्रकारिता जागरूकता यात्रा के साथ चल रहे सुखसागर सिंह पावले ग्राम-रक्सा, पोस्ट-छुन्गा, ब्लॉक-जैतहरी, जिला-अनुपपूर, (मध्यप्रदेश) में ग्रामीण महिलाओं चनिया बाई और ओमबती से चर्चा कर रहे हैं जो बता रही हैं कि वे विधवा हैं पर पेंशन नही मिल रही है, जिससे उनको जीवन यापन में परेशानी हो रही है जबकि सरकार के द्वारा योजना चलाई जा रही है, लेकिन कई ग्रामीणों को इसका लाभ नही मिल रहा है, वे अनुरोध कर रहे हैं कि कृपया इन गरीब महिलाओं की मदद करने के लिए आप इन नम्बरों पर भी फ़ोन कर सकते है- सरपंच@9644712901, सचिव@7773039583,जैतहरी ब्लॉक C.E.O.@9753725845. सुखसागर सिंह पावले@9111070571
Posted on: Mar 31, 2017. Tags: SONG SUKHSAGAR SINGH PAWLE VICTIMS REGISTER
हर बिखरे अनुभव के रेशे को समेट कर लिखता है...भवानी प्रसाद मिश्र की कविता-
सुनील कुमार भवानी प्रसाद मिश्र की कविता सुना रहे हैं:
बुनी हुई रस्सी को घुमायें उल्टा-
तो वह खुल जाती हैं-
और अलग अलग देखे जा सकते है-
उसके सारे रेशे-
मगर कविता को कोई/ खोले ऐसा उल्टा-
तो साफ नहीं होंगे हमारे अनुभव-
इस तरह/क्योंकि अनुभव तो हमे-
जितने इसके माध्यम से हुए हैं-
उससे ज्यादा हुए हैं दूसरे माध्यमों से-
व्यक्त वे जरूर हुए हैं यहाँ-
कविता को/ बिखरा कर देखने से-
सिवा रेशों के क्या दिखता है-
लिखने वाला तो-
हर बिखरे अनुभव के रेशे को-
समेट कर लिखता हैं...


