बकरी चराने वाले समारू और मंगलू उरांव की छत्तीसगढ़ी कहानी...
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडियारी एक कहानी सुना रहे हैं: चिर्रू नाम का एक उरांव रहता था, उसके दो बेटे थे जिसका नाम समारू और मंगलू जिसमे सम्हारु बहुत होशियार था, मंगलू होशियार नही था, चिर्रू खतम हो गया और उसके पत्नी वृद्ध हो गई घर के सभी जिम्मेदारी दोनों भाई के ऊपर आ गया| वे दोनों गाँव के बकरी चाराने लगे एक दिन समारू, मगलू से कहा जा रे बकरियों को चारा-चराकर ले आओ, वह थोड़ा चना रखा और चला गया मंझनिया के समय बकरियों को पानी पिला के और महुआ के छाया में सो गया, बकरी बैठ के चारा को पागुर ले रहे थे मंगलू अपने मन में विचार किया, ये बकरी मुझे लड़ने को कह रहे हैं, ये सोचकर जंगली पासा में सभी बकरियों के मार दिया सभी बकरी मर गये, और वे घर वापस अ गया समारू, मंगलू से पूछा बकरियाँ कहाँ हैं, बताया वो मुझे लड़ने के लिए चगली कर रहे थे तो मै उन्हें पासा से मार दिया, फिर मंगलू सोचा कि बकरी हमें नही छोड़ते और वह जाके सभी बकरी को भुदरा में ले जाके छुपा दिया और बकरियों के मालिकों को कह दिया सभी बकरियों को (बिग्वा) चीता खा गया, सभी लोग अपने-अपने बकरियों को खोजने गये, लेकिन एक भी नही पाए सभी मालिक चुपचाप रह गये, अर्थात ये कि व्यक्ति को हमेशा होशियार रहना चाहिए:
Posted on: Sep 17, 2018. Tags: CG CHHATTISGARHI KANHAIYALAL PADIYARI RAIGARH SONG STORY VICTIMS REGISTER
पडोसी ठीक रहे या न रहे साथ तो निभाना ही पड़ता है, समझौता करना ही पड़ता है...कविता
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडियारी एक कविता सुना रहे हैं: पत्नी ने कहा पडोसी कैसा है मैने कहा अच्छा है- जब रात के अँधेरे में कांच के टुकड़े बिखेर देता है दरवाजे के बाहर पत्नी को समझा दिया हूँ- बच्चों को नंगे पैर निकलने नही देना- बूढी माँ पैर पर चप्पल पहनकर निकले- पडोसी के बच्चों से सम्मान स्नेह रखें- पत्नी को समझ दिया हूँ- पत्नी ने पूछा पडोसी कैसा है- मैंने कहा अच्छे हैं- छन्न से कांच के टुकड़े कि आवाज आई मैंने समझ गया पडोसी अच्छा नही है- पडोसी ठीक रहे या न रहे साथ तो निभाना ही पड़ता है- समझौता करना ही पड़ता है: कन्हैयालाल पडियारी@9981622548.
Posted on: Sep 17, 2018. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI POEM RAIGARH SONG VICTIMS REGISTER
बड़ा महंगा पड़ता तुम्हारा आना जाना...बाल कविता
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़, (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडियारी एक बाल कविता सुना रहे हैं:
चूहा भैया चूहा भैया मेरे घर तुम न आना-
मेरे घर में आकर तुम बिल न बनाना-
चूहा भैया चूहा भैया मेरे घर तुम न आना-
मेरे घर पर आकर तुम मेरे कपड़े को न कुतरना-
बड़ा महंगा पड़ता है फिर से उनको फिर सिलाना-
चूहा भैया चूहा भैया मेरे घर तुम न आना-
मेरे घर पर आकर तुम कोठी के धान न खाना-
बड़ा महंगा पड़ता तुम्हारा आना जाना-
बहार जो भी मिल्रे उसी को तुम खाना...
Posted on: Sep 16, 2018. Tags: CG CHILDREN KANHAIYALAL PADIYARI POEM RAIGARH SONG VICTIMS REGISTER
बारह भाई चोर की कहानी...
एक गाँव में 12 भाई चोर रहा करते थे, वे रोज रात में सबके सोने के बाद चोरी करने निकला करते थे ची गाँव में एक लाढूआ (चोरी करने वाला) रहा करता था वे उनके घाट ( रास्ते) में बैठे रहा करता था, और उनके आवाज पाने से पूछा कौन है, वे कहे हम 12 भाई चोर हैं| लाढूआ बोला मेरे को ले जाओगे या नही, वे बोले नही, बोला मै चिल्ला दूंगा वे बोले हाँ ले जायेंगे, फिर वे चोरी करने गाँव के गौटिया के घर में गये, सभी अच्छे-अच्छे सामान चुरा लिए लाढूआ मांदर चुराया, उसको वो पीछे रखा, मांदर के बजने से गौटिया जाग गया चोर भाग गये और लाढूआ पकड़ा गया उसको बहुत पिटाई किये, दूसरे दिन फिर से 12 भाई चोरी करने निकले और लाढूआ फिर से उनके साथ चला गया और घर में जाकर 12 भाई अच्छे सामान चुराए लाढूआ सीका में गुड रखा था उसको चुराया और उसको तोड़ दिया, उसके शरीर में गुड लगा जिसको वह रुई में पोछ दिया और बगल के बेढा में जाकर सो गया, और फिर से पकड़ा गया, और उसकी पिटाई हुई, तीसरे दिन भी चोरी करने गये और कनकी (चावल) चुराया और रास्ते में आग और पानी मिलने से वे बनाया खाया और मुहं खोल के सो गया गौटिया आ के चावल मुहं में डाल दिया, और पिटाई भी किये वे सभी भाई भाग गये चौथा दिन फिर से चोरी करने गये लाढूआ जाता (दराई-पिसाई करने वाला) ले भाग रहा था उसी रास्ते से बरात आ रहा था, वह बरगद में चढ़ गया, उसी बरगद के नीचे सभी बाराती आराम करने लगे, लाढूआ जाता (दराई-पिसाई करने वाला) को दुल्हा के सिर में गिरा दिया और वह मर गया|
Posted on: Sep 16, 2018. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI RAIGARH SONG STORY VICTIMS REGISTER
खाले मूढा ऊपर मूढा, कारीबंद नागर मुढ़ा...छत्तीसगढ़ी किसानी गीत
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक छत्तीसगढ़ी किसानी गीत सुना रहे हैं:
खाले मूढा ऊपर मूढा, कारीबंद नागर मुढ़ा-
धान होत रहिस कूढा-कूढा, जम्मो ला ले गई बोरी जिंदल बुढा-
सरदार दीपा, जमनी खार, तेलाई खार, साव मूडा-
बराही खार छोटे सेमरिया, बड़े सेमरिया कुदरी-
बेल पथरा जभा नार, जम्मो होगिस नार खार-
बूचा जरिया कदम मुड़ा, नारी खार केरा मुड़ा-
टीपा खार किसिम किसिम के धान होत रहिस...
