लड़की ही रसोई क्यों करे, बेटी में नहीं क्या जान...रचना-
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक रचना सुना रहे हैं :
लड़की ही रसोई क्यों करे, बेटी में नहीं क्या जान-
बेटा रसोई क्यों न करे, बेटा नहीं क्या इंसान-
बेटा ही तो मुकुट बांधकर जाता है बारात-
बेटी भी मुकुट बांधकर जाये लेकर बारात-
बेटा ही क्यों ले आता किसी पराई बेटी-
बेटी भी जाकर ले आये, माँ बाप का बेटा...
Posted on: Jun 01, 2019. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI RAIGARH RCHANA SONG VICTIMS REGISTER
मेरे नन्हें-नन्हें चूजो दूर कभी न जाना...कविता-
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडियारी एक बाल कविता सुना रहे हैं :
मेरे नन्हें-नन्हें चूजो दूर कभी न जाना-
जो भी हो पास तुम्हारे मिल बाँट खा लेना-
नन्हें-नन्हें पंख तुम्हारी उड़ने भी ढंग से नह सीखे हो-
कोमल-कोमल हाथ पाँव तुम्हारी संभलना भी नही सीखे हो-
ऊँची-ऊँची पहाड़ पर्वत ऊँची गहरी खाई है-
ठौर-ठौर पर ब्याध का पहरा उनके आँखे ऊँची ललचाई है...
Posted on: Jun 01, 2019. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI POEM RAIGARH SONG VICTIMS REGISTER
देख तो नोनी कैसन करथे झड़ी, छोड़त नई आय एको घरी...रचना-
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक रचना सुना रहे हैं :
देख तो नोनी कैसन करथे झड़ी-
छोड़त नई आय एको घरी-
हेर चाउर दार ला और ओला छर डार-
कछू साग नइये, गिद ला दर डार-
निकलथे बतकिरी, झन करबे रात-
अंजोर-अंजोर खाबो दार भात...
Posted on: May 29, 2019. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI RACHANA RAIGARH SONG VICTIMS REGISTER
माँ मुझे तू अपने आँचल मै ढक कर सुलाया-कविता
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक कविता सुना रहे हैं:
माँ मुझे तू अपने आँचल मै ढक कर सुलाया-
माँ मुझे तू अपने सीने से लगा कर दोध पिलाया-
माँ मुझे तू ऊँगली पकड़ कर चलना सिखाया-
माँ मुझे तू दुन्य मै चलने का रीत समझाया-
माँ मुझे हर सुख दुख से तू खुद झेल मुझे बचाया...
Posted on: May 23, 2019. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI POEM RAIGARH SONG VICTIMS REGISTER
त्यौहार हमारे जीवन में महत्वपूर्ण है, बीते पलों की याद दिलाती है...काव्य
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से एक मनकाव्य सुना रहा है:
आज गाँव शहर में चहल-पहल और पूर्णिमा है |आज रक्षाबंधन का दिन वर्ष में एक ही बार आता है |इस दिन बहन अपने भाई के कलाई में राखी बांधकर भाई के लम्बी उम्र का कामना करती है |लडकियां नया पोशाग पहनकर इधर से उधर घूमते रहे हैं| जगह-जगह राखियों और साड़ियों का दूकान सजा है | बहन राखियां और मिठाइयां खरीद रहे हैं|भाई राखी के बदले पैसे और उनकी रक्षा के लिए आशीर्वाद देकर बहन का मन जीत लेता है |इसलिए त्यौहार हमारे जीवन में महत्वपूर्ण है| क्योंकि यह बीते पलों की याद दिलाती है|
