चाह नहीं, मैं सुरबाला के गहनों में गूँथा जाऊँ...कविता-
ग्राम-छुलकारी, पोस्ट-पसला, जिला-अनूपपुर (मध्यप्रदेश) से भागवती केवट एक कविता सुना रही हैं:
चाह नहीं, मैं सुरबाला के गहनों में गूँथा जाऊँ-
चाह नहीं प्रेमी-माला में बिंध प्यारी को ललचाऊँ-
चाह नहीं सम्राटों के शव पर हे हरि डाला जाऊँ-
चाह नहीं देवों के सिर पर चढूँ भाग्य पर इठलाऊँ-
मुझे तोड़ लेना बनमाली, उस पथ पर देना तुम फेंक-
मातृ-भूमि पर शीश- चढ़ाने, जिस पथ पर जावें वीर अनेक...
Posted on: Sep 16, 2019. Tags: ANUPPUR LALLU KEWAT MP SONG VICTIMS REGISTER
Impact : संदेश रिकॉर्ड कराने के बाद काम का पैसा मिल गया-
ग्राम-हटका चारामा, ब्लाक-नरहरपुर, जिला-कांकेर (छत्तीसगढ़) से वासुदेव बता रहे हैं रोजगार गारंटी के तहत 2016 में रोड और डबरी निर्माण में गाँव के लोगो ने काम किया था, जिसका मजदूरी का पैसा उन लोगो को नहीं मिला था, तब उन्होंने अपनी समस्या को सीजीनेट में रिकॉर्ड किया था, जिसके 12 दिन के बाद उनका मजदूरी का भुगतान हो गया, इसलिये वे सीजीनेट के मदद करने वाले साथियों और संबंधित अधिकारियों को धन्यवाद दे रहे हैं : संपर्क नंबर@9399764969.
Posted on: Sep 15, 2019. Tags: CG IMPACT STORY KANKER SONG VASHUDEV NETAM VICTIMS REGISTER
भारत माता का सपूत आजादी का दीवाना था...कविता-
ग्राम-छुलकारी, पोस्ट-पसला, जिला-अनूपपुर (मध्यप्रदेश) से तरंग, कविता, भागवती केवट एक कविता सुना रहे हैं:
भारत माता का सपूत आजादी का दीवाना था-
हंस कर झूल गया फांसी पर भगतसिंह मस्ताना था-
नौ जवान वह पंजाबी गजब शेर का दिल वाला था-
देश, प्रेम का रस पीकर वह बना हुआ था मतवाला-
दिन में चैन, रात में नींद कभी उसे नही आती थी...
Posted on: Sep 15, 2019. Tags: ANUPPUR LALLU KEWAT MP POEM SONG VICTIMS REGISTER
मोर महुवा उतरी गये...ददरा गीत-
ग्राम-साहपुर, पोस्ट, तहसील-त्योथर, थाना-सोहागी, जिला-रीवा (मध्यप्रदेश) से विनीत कुमार यादव एक दादरा गीत सुना रहे हैं :
अरे निबिया करे के नऊवा हो-
मोर महुवा उतरी गये-
जेठ न जागे देवरनिया न जागे-
न जागे लहुरी ननदिया हो-
मोर महुवा उतरी गये-
अरे जेठ न जागे, देवरवा न जागे-
न जागे मोर बलमवा हो, मोर महुवा उतरी गये...
Posted on: Sep 14, 2019. Tags: MP REWA SONG VICTIMS REGISTER VINIT KUMAR YADAV
दे सलामी इस तिरंगे को जिससे तेरी शान है...कविता-
ग्राम-डभौरा, ब्लाक-जवा, जिला-रीवा (मध्यप्रदेश) से पार्थ प्रताप सिंह एक देशभक्ति कविता सुना रहे हैं:
दे शलामी इस तिरंगे को जिससे तेरी शान है-
सर हमेशा ऊँचा रखना जब-तक दिल में जान है-
एक सैनिक ने क्या खूब कहा है-
किसी गजरे की खुशबू को महकता छोड़ आया हूँ-
अपनी नन्ही सी चिड़िया को चहकता छोड़ आया हूँ-
मुझे छाती से अपने तू लगा लेना ऐ भारत माँ-
मै अपनी माँ के बांहों को तरसता छोड़ आया हूँ...
