कुछ और भी दूँ मन समर्पित तन समर्पित और यह जीवन समर्पित..कविता-

ग्राम-कोटानपुर,जिला-जशपुर,राज्य-छत्तीसगढ़ से सूरदास पैकरा कविता सुना रहें हैं:
मन समर्पित तन समर्पित और यह जीवन समर्पित
चाहता हूँ देश कि धरती तुझे कुछ और भी दूँ
माँ तुम्हारा रीड बहुत हैं मैं अह किन चन
किन्तु इतना कर रहा फिर भी निवेदन
लाऊ थाल में सजा कर भाल जब
कर दया स्वीकार लेना वह समर्पण
गान अर्पित प्राण अर्पित रक्त का कण कण समर्पित
ID (182053)R.M

Posted on: Dec 01, 2020. Tags: POEM SONG VICTIMS REGISTER

अपने आँचल कि छैंया में जब भी मुझे सुलाओ माँ...भजन-

राज्य-राजिस्थान बीकानेर से नारायण भजन सुना रहें हैं:
अपने आँचल कि छैंया में हो हो-
अपने आँचल कि छैंया में जब भी मुझे सुलाओ माँ-
तुम लोरी कि जगह में श्याम कि पावन कथा सुनाओ माँ-
रोज सवेरे जय बाबा कि बोलके मुझे जगाओ माँ-
तुम लोरी कि जगह में श्याम कि पावन कथा सुनाओ माँ-
समर भूमि में श्री कृष्णा ने राश लीला रचाई थी-
ID(182057)R.M

Posted on: Dec 01, 2020. Tags: BHAJAN SONG SONG VICTIMS REGISTER

जमीन का समस्या है बोलने पर भी ध्यान नही दे रहें है, कृपया मदद करें-

ग्राम-विजयपुर, पंचायत-बिटमा, जनपद पंचायत-मजगवा, जिला-सतना (मध्यप्रदेश) से अजय कुमार कोल बता रहें है की वहा आदिवासी 3 साल से बसे है, 144/1 144/4 144/8 145 पुरे आदिवासी मिस्टार करते है, दबंग ब्राम्हण द्वारा 126,127,128, 130, कहकर हटाया जा रहा है, इसके लियें उन्होनें कलेक्टर SDM को आवेदन किये लेकिन अभी तक कोई कारवाही नहीं हुई| इसलिये वे सीजीनेट के साथियों से निवेदन कर रहे हैं कि दिये नंबरों पर बात कर समस्या को हल कराने में मदद करें: संपर्क अजय कुमार कोल@7676939077, कलेक्टर@7587979300, SDM@8827266004, तहसीलदार@7587979320, सुरेश कोल@ 6266289901. (182028) GT

Posted on: Dec 01, 2020. Tags: LAND PROBLEM SONG VICTIMS REGISTER

विश्व एड्स जागरूकता दिवस...

राजनांदगाँव (छत्तीसगढ़) से विरेंद्र गंधर्व आज विश्व एड्स जागरूकता दिवस पर संदेस दे रहे हैं| ये बीमारी छुआ छूट से नहीं फैलती है| इसके फैलने का कारण दूषित रक्त लेने और असुरक्षित यौन संबंध से फैलता है| माँ से बच्चे में हो सकता है| इस बीमारी से बचे रहने के लिये सुरक्षा रखनी चाहिये| आज नागालैंड का स्थापना दिवस है और आदिवासी दिवस भी शुरू हो चुका है| (AR)

Posted on: Dec 01, 2020. Tags: SONG STORY VICTIMS REGISTER

डरा सहमा सा बेटा है एक नन्हा सा...कविता-

बड़वानी (मध्यप्रदेश) से सुरेश कुमार एक कविता सुना रहे हैं:
डरा सहमा सा बेटा है एक नन्हा सा-
पक्षी अपने पंखो को दबाये अपने घोसले में-
माँ उसकी आकर सिखाती है उड़ने की कला-
पर वह डरा-डरा सा विश्वाश नही है अपने पंखो पर-
देती है माँ हौसला उसे कोशिश तो कर...(AR)

Posted on: Dec 01, 2020. Tags: POEM SONG VICTIMS REGISTER

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