ग्राम सभा में सब बोले, बन्द जबानो को खोले...कविता
ग्राम-देवरी, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से कैलाश सिंह पोया ग्राम सभा को लेकर एक कविता सुना रहे है:
ग्राम सभा में सब बोले, बन्द जबानो को खोले-
साफ रहेगा जल जीवन, स्वस्थ रहेगा जन-जन उतना-
एक आदमी एक औरत को, हमने तो जाना-
एक चादर का ताना पूजा है, चादर का बाना...
Posted on: Sep 01, 2017. Tags: KAILASH SINGH POYA SONG VICTIMS REGISTER
पानी बरसे अषाढ़ हरा हरा दिखथे पहाड़...गीत
ग्राम-देवरी, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से कैलाश सिंह पोया एक गीत सुना रहे हैं :
पानी बरसे अषाढ़ हरा हरा दिखथे पहाड़-
नार बेवार जमे जमथे गाय के अहार-
जंगल झाड़ दिखे, दिखथे फहाड़-
देखके सगा जन पर्वत के झाड़-
जंगल में गाय भैस चरथे असाड-
हमार जीव हरियर दिखथे पहाड़...
Posted on: Sep 01, 2017. Tags: KAILASH SINGH SONG VICTIMS REGISTER
यह बात समझ में आई नही, और मम्मी ने समझाई नही...
ग्राम-देवरी, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से कैलाश सिंह पोया कविता सुना रहे है:
यह बात समझ में आई नही-
और मम्मी ने समझाई नही-
मै कैसे मीठी बात करू, अब मीठी चीजें खाएं नही-
आपा भी पकाती है हलवा, वह आखिर क्यों हलवाई नही-
भाया की मंगनी हो गई कल, क्यों कल ही दुल्हन मंगवाई नही-
यह बात समझ में आई नही...
Posted on: Aug 31, 2017. Tags: KAILASH POYA
एक बच्ची स्कूल नहीं जाती, बकरी चराती है, वह लकडियां बटोरकर घर लाती है...
ग्राम-देवरी, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से कैलाश सिंह पोया श्याम बहादुर नम्र की एक कविता सुना रहे है:
एक बच्ची स्कूल नहीं जाती, बकरी चराती है-
वह लकडियां बटोरकर घर लाती है-
फिर मां के साथ भात पकाती है-
एक बच्ची किताब का बोझ लादे स्कूल जाती है-
शाम को थकी मांदी घर आती है-
वह स्कूल से मिला होमवर्क मां-बाप से करवाती है-
बोझ किताब का हो या लकडी का-
बच्चियां ढोती हैं-
लेकिन लकडी से चूल्हा जलेगा-
तब पेट भरेगा-
लकडी लाने वाली बच्ची यह जानती है-
वह लकडी की उपयोगिता पहचानती है-
किताब की बातें कब किस काम आती हैं-
स्कूल जाने वाली बच्ची-
बिना समझे रट जाती है-लकडी बटोरना,
बकरी चराना और मां के साथ भात पकाना-
जो सचमुच घरेलू काम हैं-
होमवर्क नहीं कहे जाते-
लेकिन स्कूलों से मिले पाठों के अभ्यास-
भले ही घरेलू काम न हों-
होमवर्क कहलाते हैं-
कब होगा जब किताबें-
सचमुच होमवर्क से जुडेंगी-
और लकडी बटोरने वाली बच्चियां भी-
ऐसी किताबें पढेंगी...
Posted on: Aug 30, 2017. Tags: KAILASH POYA
ले मशाले चल पड़े है, लोग मेरे गाँव के, अब अँधेरा जीत लेंगे, लोग मेरे गाँव के...गीत
ग्राम-देवरी, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से कैलाश सिंह पोया एक जागृति गीत सुना रहे हैं :
ले मशाले चल पड़े है, लोग मेरे गाँव के-
अब अँधेरा जीत लेंगे, लोग मेरे गाँव के-
पूछती है झोपड़ी और, पूछते है खेत भी-
कब तलक लूटते रहेंगे, लोग मेरे गाँव के-
ले मशाले चल पड़े है, लोग मेरे गाँव के-
बिन लड़े कुछ भी नही मिलता यह जानकर-
अब लड़ाई लड़ रहे है, लोग मेरे गाँव के – लाल सूरज अब उगेगा, देश के हर गाँव में-
अब इकट्टा हो चले है, लोग मेरे गाँव में...
