रोको शिक्षा के व्यापार को रोको, रोको निजीकरण के प्रहार को रोको...शिक्षा गीत
ग्राम-मोतीझील, जिला-मुजफ्फरपुर (बिहार) से श्रवण कुमार एक संघर्ष गीत सुना रहे हैं:
रोको शिक्षा के व्यापार को रोको – रोको निजीकरण के प्रहार को रोको – वैज्ञानिक जनवादी शिक्षा यही हमारा नारा हैं-
स्वास्थ्य शिक्षा सबको शिक्षा ये अधिकार हमारा हैं-
शिक्षा संकोचन के वार को रोको – रोको निजीकरण के प्रहार...
मेहनत वर को शासक बारूद का ढेर समझते हैं-
इसलिए वो शिक्षा की चिंगारी से डरते हैं – रोको निजीकरण के प्रहार...
Posted on: Sep 02, 2016. Tags: SHRAVAN KUMAR SONG VICTIMS REGISTER
नया-नया वैकल्पिक मीडिया अब आया है भाई...वैकल्पिक मीडिया गीत
जिला-बलरामपुर (छत्तीसगढ़) से सुनील कुमार के साथ मोहन कुमरा तथा और साथी हैं जो मिलकर वैकल्पिक मीडिया पर एक जोगिया गीत सुना रहे हैं:
नया-नया वैकल्पिक मी डिया अब आया है भाई-
नया-नया वैकल्पिक मीडिया अब आया हैं भाई-
समझ बूझलो इसको भैया होगी बहुत भलाई-
समझ बूझलो इसको भैया होगी बहुत भलाई-
तुम अपना बात रखोगे जोगीरा सारा रा रा...
Posted on: Sep 01, 2016. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
ए जी पटने से मुडिया मंगाया...झूमर विवाह गीत
ग्राम-विसेंद्र्पुर, जिला-मुजफ्फरपुर, बिहार से गीता देवी एक झूमर विवाह गीत सुना रही हैं:
ए जी पटने से मुडिया मंगाया-
दुल्हे राजा को सैरा पहनाया-
दुल्हे राजा खिलने लगे जीजा हसने लगे-
छोटे साले का दिल हरसाया-
ए जी पटने से चैन मंगाया-
दुल्हे राजा को पहनाया-
दुल्हे राजा खिलने लगे जीजा हसने लगे-
छोटे साले का दिल हरसाया-
ए जी पटने से मुडिया मंगाया...
Posted on: Aug 30, 2016. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
चलो मुसाफिर अपने घर अब तो पूरा हुआ सफ़र...हिंदी गीत
मालीघाट मुजफ्फरपुर बिहार से सुनील कुमार एक गीत सुना रहे हैं:
चलो मुसाफिर अपने घर अब तो पूरा हुआ सफ़र-
बुला रहा है वतन तुम्हारा मुख का रुख अब करों उधर-
चलो मुसाफिर अपने घर अब तो पूरा हुआ सफ़र-
दिन वों कितने प्यारे थे, सुख के भरे नज़ारे थे-
धरती अंम्बर चाँद-सितारे सारे हुए हमारें थे-
कब आयेंगे दिन फिर कर याद आते है रह-रहकर-
चलो मुसफ़िर अपने घर...
Posted on: Aug 29, 2016. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
नाम जपन क्यों छोड़ दिया, झूठ न छोड़ा, क्रोध न छोड़ा...भक्ति गीत
मालीघाट, जिला-मुजफ्फरपुर (बिहार) से सुनील कुमार एक भक्ति गीत सुना रहे हैं:
नाम जपन क्यों छोड़ दिया-
झूठ न छोड़ा, क्रोध न छोड़ा-
सत्यवचन क्यों छोड़ दिया-
झूठे जग में दिल ललचाकर-
असल वतन क्यों छोड़ दिया-
जिहि सुमिरन से अति सुख पावे-
सो सुमिरन क्यों छोड़ दिया-
खालस इक भगवान भरोसे-
तन-मन-धन क्यों न छोड़ दिया...
