ये पीके केंजा मिकदिनल रा...गोंडी प्रेम गीत
ग्राम-छोटे गुमला, पोस्ट माटवाड़ा, तहसील-भैरमगढ़, जिला-बीजापुर (छत्तीसगढ़) से सुनीता एमला एक गोंडी गीत सुना रही हैं | जब लड़की लड़का के सामने नहीं दिखती हैं तब गाया जाता हैं:
ये पीके केंजा मिकदिनल रा-
इके भी नास्ता सिकी निक उडो-
मिकदिनल रा येर किकी वरुंग वरुंग रा-
मंगलवार रेल उदी वरा पीके मावा नार-
ये पीके केंजा मिकदिनल रा...
Posted on: Feb 28, 2018. Tags: SONG SUNITA EMLA VICTIMS REGISTER
बाबा हरिहर नाथ सोनपुर में रंग लूटे...होली गीत
मालीघाट, मुजफ्फरपुर (बिहार) से सुनील कुमार एक गीत सुना रहे हैं :
बाबा हरिहर नाथ सोनपुर में रंग लूटे-
बाबा गरीब नाथ मुजफ्फरपुर में रंग लूटे-
बाबा जलेश्वर नाथ जनकपुर में रंग लूटे-
बाबा वैधनाथ झारखंड में रंग लूटे-
बाबा तपेश्वरनाथ बलरामपुर में रंग लूटे-
बाबा तपेश्वरनाथ छत्तीसगढ़ में रंग लूटे-
बाबा पशुपतिनाथ नेपाल में रंग लूटे-
बाबा पशुपतिनाथ काठमांडू में रंग लूटे...
Posted on: Feb 27, 2018. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
पाप क्षमा का जीवन दे दे, दया की याचना करूँ...धर्म गीत
सुमन, जिला-बीजापुर छत्तीसगढ़ से एक धर्म गीत गा रही है जिसे चर्च में प्रार्थना की तरह गाया जाता है :
तेरी आराधना करूँ – पाप क्षमा का जीवन दे दे – दया की याचना करूँ – तेरी आराधना करूँ-
तू है महान सशक्तिमान-
तुही है मेरे जीवन का संगीत – रिदम के तार छेड़े चमकार – तेरी आराधना है मधुगीत-
तेरी आराधना करूँ...
Posted on: Feb 27, 2018. Tags: SONG Suman Bijapur VICTIMS REGISTER
मोतियों के माला निशनिया रे जाम...चुनाव गीत
मालीघाट,जिला-मुजफ्फरपुर (बिहार) से उमेश भारती बिहार में चल रहे पंचायत चुनाव के उपलक्ष्य में एक चुनाव गीत सुना रहे हैं:
मोतियों के माला निशनिया रे जाम-
रे जाम मोतियों के माला निशनिया रे जाम-
रे जाम मिश्राम भैया के यही पर मोहर लगयन रे-
हमरो गाँव तोलवा के मैया बहिनिया रे जाम-
अरे मैया बहिनिया रे जाम मिश्राम भैया के-
मोती के माला निशनिया रे...
हर माता बहिनिया के गले के हार रे जाम-
मोती के माला निशनिया रे जाम...
Posted on: Feb 27, 2018. Tags: SONG Sunil Kumar VICTIMS REGISTER
बांसुरी के इतिहास में उन कीड़ों का कोई जिक्र नही...कविता
मालीघाट, जिला-मुजफ्फरपुर (बिहार) से सुनील कुमार नरेश सक्सेना की एक कविता बांसुरी सुना रहे हैं:
बांसुरी के इतिहास में उन कीड़ों का कोई जिक्र नही-
जिन्होंने भूख मिटाने लिए बांसों मे छेद कर दिए थे-
और जब-जब उन हवा छेदों से गुजरती तो बांसों का रोना सुनाई देता-
कीड़ो को तो पता ही नही था कि वे संगीत के इतिहास में हस्तक्षेप कर रहे हैं-
और एक ऐसे वाद्य का आविष्कार जिसमे बजाने वाले की सांसे बजती है-
मैंने कभी लिखा था बांसुरी में बांस नही बजती साँस नही बजता-
बजाने वाला बजता है अब जब-जब बजता हूँ बांसुरी तो राग चाहे जो हो-
उसमे तोड़ो की भूख और बांसों का रोना भी सुनाई देता है...


