स्वास्थ्य स्वर : पेशाब रुक जाने की समस्या का घरेलू उपचार-
जिला-टीकमगढ (मध्यप्रदेश) से वैद्य राघवेंद्र सिंह राय पेशाब रुक जाने की समस्या का घरेलू उपचार बता रहे हैं, पलास के फूल को इकट्ठ कर लें उसके बाद उसे पानी में डुबो दें उसके बाद चटनी जैसा बना लें और उस लेप पेशाब वाले जगह पर मेहंदी जैसा लेप कर लें, पेशाब की समस्या में आराम हो सकता है, नुस्खा उपयोग करने से पहले संबंधित विषय पर पूरी जानकारी लें : संपर्क नंबर@9424759941.
Posted on: Feb 20, 2020. Tags: HEALTH MP RAGHVENDRA SINGH RAI SONG TIKAMGARDH VICTIMS REGISTER
बागे बगीचा देखेला हरियर...गीत-
ग्राम-ताराडांड, जिला-अनूपपूर (मध्यप्रदेश) से बाबूलाल नेटी एक छत्तीसगढ़ी गीत सुना रहे हैं:
बागे-बगीचा देखेला हरियर-
दुरुग वाले नई दिखे बदेव नरियर-
मोरे जूनतुरी, मोरे जूनतुरी गेंदा-
इंजन गाड़ी सेमर फूलगे-
सेमर फूलगे आकाश मोर किटको गाड़ी-
नरवा मा, नरवा मा अगौर लेबे रे-
चांदी के मुंदरी चिन्हारी करले-
मैं हर रहिथौं दुरुग मा चिन्हारी करले...
Posted on: Feb 19, 2020. Tags: ANUPPUR BABULAL NETI MP SONG VICTIMS REGISTER
कहमा जनम फूल कहाँ मा जनमे साहू...गीत-
ग्राम-हरदौंहा, पंचायत-तेंदुनी, ब्लाक-जवा, जिला-रीवा (मध्यप्रदेश) से रंजना वर्मा एक गीत सुना रही हैं:
कहमा जनम फूल कहाँ मा जनमे साहू-
आप कहमा जनमे हा भीमा-
जो दलितों का मसीहा-
जो दलितों का मसीहाई हो-
कठकुड मा जनमेहा फूल-
कोल्हापुर मा साहू हो...
Posted on: Feb 18, 2020. Tags: MP RANJANA VARMA REWA SONG VICTIMS REGISTER
सासू सपने में सब ने बिचारा सपन बड़े सुंदर हो...सोहर गीत-
ग्राम-नोनारी, जिला रीवा (मध्यप्रदेश) से सुषमा एक सोहर गीत सुना रही हैं:
सोबत अपने महालिया सपन एक देखेव सपन एक देखेव हो-
सासू सपने में सब ने बिचारा सपन बड़े सुंदर हो-
कलशा मा देखेव चाउट पर दियना दिपट पर दियना हो-
आबे हथिनी पर घुमाये दुआरे चढ़े हैं राजा दशरथ हो-
कलशा अहिं तुहूँरे ललना दियने तुहूँरे लक्ष्मीनि हो-
बहु हथिनी पयाहीं महारानी चढ़े हैं राजा दशरथ हो-
सोबत अपने महालिया सपन एक देखेव सपन एक देखेव हो...
Posted on: Feb 18, 2020. Tags: MP REWA SONG SUSHAMA VICTIMS REGISTER
हम लोग हैं ऐसे दीवाने, दुनिया को बदलकर मानेंगे...गीत-
रीवा (मध्यप्रदेश) से छोटू कोल एक देशभक्ति गीत सुना रहे हैं :
हम लोग हैं ऐसे दीवाने, दुनिया को बदलकर मानेंगे-
मंज़िल की धुन में आये हैं, मंज़िल को पाकर जायेंगे-
दो दिन की बहारें है जग में, क्या जुर्म किसी का चलता है-
जो जुर्म का सूरज लाख तपे,हर शाम को लेकिन ढलता है-
नफरथ के शोले दिल में है, हम उनको बुझाकर मानेंगे-
हम लोग हैं ऐसे दीवाने, दुनिया को बदलकर मानेंगे...
