पुती के बेरा उतरगे न गेरा, उठो-उठो भोजली दाई दर्शन के बेरा...भोजली गीत-
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक भोजली गीत सुना रहे हैं :
पुती के बेरा, उतरगे न गेरा-
उठो-उठो भोजली दाई दर्शन के बेरा-
आहो देवी गंगा – एक बेट हर्दी ला घोटी-घोटी पीसेन-
हमरे भोजली दाई ला हंसी हंसी पिटेन...
Posted on: Mar 26, 2019. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI RAIGARH SONG VICTIMS REGISTER
एक दूसरे का मदद करने से जीवन सरल हो जाता है...कहानी-
गंगा किनारे एक अंधा और एक गूंगा रहते थे| एक देख नहीं सकता था| दूसरा बोल नहीं सकता था| दोनों एक दूसरे की मदद कर साथ जीवन व्यतीत करते थे| गूंगा अंधे को राह दिखता था| अंधा द्वार-द्वार पर आवाज लगाकर भीख मांगता था| इस तरह से दोनों झोली लेकर भीख मांगते थे| लोग उनको भिक्षा देते थे | दोनों का घर नहीं था| वे प्रसाद खाकर मंदिर में ही पड़े रहते थे| साथ ही वे मंदिर की साफ़ सफाई भी कर लेते थे| इस तरह से उनका जीवन गुजर रहा था| उनकी बेबसी ने उन्हें संत बना दिया|
Posted on: Mar 25, 2019. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI RAIGARH SONG STORY VICTIMS REGISTER
ये जिनगी के नई आय ठिकाना गा संगी...गीत-
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक गीत सुना रहे हैं:
ये जिनगी के नई आय ठिकाना गा संगी-
आनी बानी के रोग आगे-
मुश्किल होगे जीना गा संगी-
ठौर-ठौर मा खुलगे कारखाना-
किसिम किसिम के कल कारखाना गा संगी-
पर्यावरण ला दूषित करथे, नई आये कोखरो ठिकाना...
Posted on: Mar 25, 2019. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI RAIGARH SONG VICTIMS REGISTER
मेरी मम्मी प्यारी मम्मी मुझको बहोत भाती है...कविता-
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक कविता सुना रही हैं:
मेरी मम्मी प्यारी मम्मी मुझको बहोत भाती है-
अपने आंचल के छांव में, लोरी सुनाकर सुलाती है-
अपने तन से दूध पान कराकर-
अपने आंचल से ढक लेती है-
गीले में खुद सोती पर सूखे में मुझे सुलाती है-
थोड़ा भी अस्वस्थ्य होने पर झट अस्पताल ले जाती है...
Posted on: Mar 24, 2019. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI POEM RAIGARH SONG VICTIMS REGISTER
सर पर बोझ पड़ने पर ही जिम्मेदारी का पता चलता है...कहानी-
एक गांव था| गांव के मुखिया का नाम बंतराम था| उसके छोटे भाई का नाम सगिर्तन था| दोनों में गहरा प्रेम था| दोनों का परिवार एक साथ एक घर में रहते थे| दोनों भाई के दो लडके और एक लड़की थी| सब कुछ अच्छा चल रहा था| सभी का विवाह हो गया| लेकिन बच्चो का आपस में मेल नहीं था| जिसके कारण घर का बटवारा हो गया| सभी अलग-अलग रहने लगे| जिससे उनका समय एक ही काम को करने बर्बाद होने लगा| खर्च बढ़ गये| मुखिया और उसका भाई दोनों बूढ़े हो चुके थे| फिर भी काम करने जाते थे| और जवान बेटे कोई काम नहीं करते थे| समय बीता और एक दिन दोनों भाई का देहांत हो गया| अब बच्चो पर जिम्मेदारी आई | तब उनको पता चला घर चलाने के लिये कितना मेहनत करना पड़ता है|
