ढूँढ रहे हैं सारे बच्चे, कहां खो गया प्यारा बचपन...

ग्राम-छतरपुर, तहसील-घुघुरी, जिला-मंडला, मध्यप्रदेश से बच्चों की शिक्षा-दीक्षा व उनके बालपन पर आधारित एक कविता प्रस्तुत कर रहे हैं:
ढूँढ रहे हैं सारे बच्चे, कहां खो गया प्यारा बचपन-
काम-कमाई के चक्कर में, दफन हो गया प्यारा बचपन-
कूड़े मे ढूँढता कबाड़ है, होटल मे है बर्तन धोता-
जूतों पर है पालिस करता है, सड़कों पर बोझा ढोता-
जंगल-जंगल धूर चराता, फिरता मारा-मारा बचपन-
ढूँढ रहे हैं सारे बच्चे, कहां खो गया प्यारा बचपन-
खेतों-खलियानों में खोटकर, खप जाता है प्यारा बचपन-
पुरखों से मृग लिया, उसी को पाट रहा बेचारा बचपन-
काम सीखना धूर चराना, भात पकाना बुरा नहीं है-
खुशी-खुशी श्रम के कामों में, हाथ बटाना बुरा नहीं है-
लेकिन बच्चों को शिक्षा से दूर हटाना बहुत बुरा है-
श्रम लेकर के संघ बनाकर, उन्हें कसाना बहुत बुरा है-
पड़ते-पड़ते काम सीखते, तो हो जाता न्यारा बचपन
ढूँढ रहे हैं सारे बच्चे, कहां खो गया प्यारा बचपन...

Posted on: Jul 27, 2015. Tags: Mohan Maravi SONG VICTIMS REGISTER

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