नोट हमारे डंडे उनके, वाह रे वाह हथकंडे उनके...नोटबंदी पर कविता
ग्राम-मालीघाट, जिला-मुज्जफरपुर बिहार से सुनील कुमार दिलीप पंकज की हाल में हुई नोटबंदी पर एक कविता सुना रहे है :
वाह रे वाह हथकंडे उनके-
नोट हमारे डंडे उनके-
वाह रे वाह हथकंडे उनके-
समझ न पाए आखिर हम सब-
आखिर क्या हैं फंडे उनके-
नचा रहे हे आज देश को-
वाह रे वाह हथकंडे उनके...
Posted on: Nov 19, 2016. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
Today's news from newspapers in Gondi: 19th November 2016-
अनुपस्थित रहने वाले 6 मतदान कर्मी निलंबित-
शहडोल लोकसभा उपचुनाव के लिए मतदान जारी-
जमीन के पुराने विवाद पर कट्टे से पिता व पुत्र को मारी गोली-
झांसी के किले में मिली डकैतों की लोकेशन-
Posted on: Nov 19, 2016. Tags: CHANDAN KUMAR NEWS
मन के मईलिया जे ना दोई...भोजपुरी गीत
सुनील कुमार, मालीघाट, मुजफ्फरपुर, (बिहार) से एक भोजपुरी गीत सुना रहे हैं :
मन के मईलिया जे ना दोई-
अंत समय ऊ बहुते रोई-
मन के महल में हरी के बसेरा-
हरी के बिना मन उजरल बेला-
काजी जहरिया जहरिबोई-
अंत समय बहुते रोई-
मन के मईलिया अवद ना दे अस गुनका पाई-
बिना निर्गुन नहीं आई-
करले जैसन बरनी होई-
मन के मई लिया जे ना रोई...
Posted on: Nov 19, 2016. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
कोऊ कहे लाल बत्ती जलत वे...बघेलखंडी लोकगीत
ग्राम-पोस्ट-उलहिखुद, तहसील-मनगवां, जिला-रीवा (मध्यप्रदेश) से रमेश कुमार गुप्ता एक गीत सुना रहे हैं,इस गीत में वे ये बताना चाहते हैं कि सन दो हजार आठ में मुंह नचवा की कहानी फैलाई गयी थी जो बिलकुल झूठ थी वे इसके बारे में गीत के माध्यम से बता रहे हैं:
कोऊ कहे लाल बत्ती जलत वे-
मोहू खाए लिहिस मोहू नचाओ मोहुस बै ना दे-
मोऊ नचवावो आँसों के साल जैसे दुर्गा बिराजन-
हाँ तबसे नहीं आबा मोहू नचवाओ-
मोहे खाए लिहिस मोहों नचवाओ-
हो बुढ़व लाठी लेके ईतिन-
अब कभाऊ ना आई मोहू नचवाओ-
मोहू खाए लिहिस मोंहू नचवाओ-
हाँ ठाकुर का ठकुराइन खाइन-
अरे सुबचा सबको लिसोचवाओ-
मोहों खाए लिहिस मोंहों नचवाओ...
Posted on: Nov 18, 2016. Tags: RAMESH KUMAR GUPTA SONG VICTIMS REGISTER
Today's News from Newspapers in Gondi: 18th November 2016...
10 प्रत्याशियों को खर्च नहीं बताने पर जारी किए गए नोटिस-
चार घंटे के सफर में लग रहे 8-10 घंटे-
विधायक के बीच भाषण में मासूम बोला: बाबूजी कई दिनों से स्कूल नहीं लग रहा बताओ कहां पढ़े-
नोट नहीं मिले तो 30 किमी पैदल अपने गांव गईं आदिवासी महिलाएं-
नोटबंदी से घबराए नहीं, बल्कि बदल दिया धंधे का तरीका -
