मोर दिल मा तय आजा मोर दिल में सामा जा...येशु मसीह गीत
ग्राम पंचायत भोजपुर, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से घासी दास माहांत एक येशु मसीह का गाना सुना रहें है:
मोर दिल मा तय आजा मोर दिल में सामा जा-
ताय आजा एक बार तरसत हवे मोर जिंदगी के डोर-
आके कर दे मोर ह्रदय ला ताय इंजोर-
मोर दिल मा तय आजा मोर दिल में सामा जा-
ताय आजा एक बार तरसत हवे मोर जिंदगी के डोर...(181308) GT
Posted on: Nov 17, 2020. Tags: JAS GEET SONG VICTIMS REGISTER
शौचालय नहीं होने से समस्या होती है शौचालय दिलाने में मदद करें...
ग्राम पंचायत-नेटानार, ब्लाक-जगदलपुर, जिला-बस्तर (छत्तीसगढ़) से आयतु बता रहे है कि उन्हें स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय नही मिला है शौचालय न होने से कई समस्या ये होती हैं, ज्यादातर बरसात के दिनों में बहुत ही दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है इसलिये वे सीजीनेट के सुनने वाले सभी साथियों से अपील कर रहे हैं कि अधिकारियों से बात कर शौचालय दिलाने में मदद करें : संपर्क@9302348350, सरपंच@8815883734, CEO@9004037600. (181294) GT
Posted on: Nov 17, 2020. Tags: SONG TOILET PROBLEM VICTIMS REGISTER
मोर रामा ला करदे गंगा पार गा केवट भईया...भजन गीत
ग्राम पंचायत-अमनदुला, जिला-जांजगीर चापा छत्तीसगढ़ से चंद्रकांत लहरे एक भजन गीत सुना रहें है:
मोर रामा ला करदे गंगा पार गा केवट भईया-
मोर प्रभु ला कर दे डोंगा पास गा केवट भईया-
मोर केवट भईया गा मोर केवट भईया-
राम लखन बने मिलें है भारत ला राज पाठ जी-
मोर रामा ला करदे गंगा पार गा केवट भईया...(181315) GT
Posted on: Nov 17, 2020. Tags: BHAJAN SONG SONG VICTIMS REGISTER
कोरोना माहा मरी अब भुलाई...कविता
ग्राम पंचायत-देवरी, ब्लाक-प्रतापपुर, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से कैलाश पोया एक कविता सुना रहें है:
कोरोना माहा मरी अब भुलाई-
अब आगू कवन हाल होई-
भुलायें जुग में आगू कोन हाल आयें-
मजदुर किसान वेपारी सब पस्तायें-
गोड मुड़ सोड़ पैर में टागी चलायें-
कोरोना माहा मरी अब भुलाई...(181326) GT
Posted on: Nov 17, 2020. Tags: POEM SONG VICTIMS REGISTER
निर्बल के प्राण पुकार रहे, जगदीश हरे जगदीश हरे...भजन सुना
पवन कुमार बिहार से एक भजन सुना रहें है:
निर्बल के प्राण पुकार रहे, जगदीश हरे जगदीश हरे-
स्वांसों के स्वर झंकार रहे ,जगदीश हरे जगदीश हरे-
आकाश हिमालय सागर ने, पृथ्वी पाताल चराचर ने-
ये मधुर बोल गुँजार रहे, जगदीश हरे जगदीश हरे-
जब दया दृष्टि हो जाती है , सुखी खेती लहराती है-
इस आस से जन ऊंचार् रहे , जगदीश हरे जगदीश हरे-
सुख – दुखो की चिंता है ही नहीं , है है विश्वाश न जाए कहीं...(181328) GT
