कोऊ कहे लाल बत्ती जलत वे...बघेलखंडी लोकगीत
ग्राम-पोस्ट-उलहिखुद, तहसील-मनगवां, जिला-रीवा (मध्यप्रदेश) से रमेश कुमार गुप्ता एक गीत सुना रहे हैं,इस गीत में वे ये बताना चाहते हैं कि सन दो हजार आठ में मुंह नचवा की कहानी फैलाई गयी थी जो बिलकुल झूठ थी वे इसके बारे में गीत के माध्यम से बता रहे हैं:
कोऊ कहे लाल बत्ती जलत वे-
मोहू खाए लिहिस मोहू नचाओ मोहुस बै ना दे-
मोऊ नचवावो आँसों के साल जैसे दुर्गा बिराजन-
हाँ तबसे नहीं आबा मोहू नचवाओ-
मोहे खाए लिहिस मोहों नचवाओ-
हो बुढ़व लाठी लेके ईतिन-
अब कभाऊ ना आई मोहू नचवाओ-
मोहू खाए लिहिस मोंहू नचवाओ-
हाँ ठाकुर का ठकुराइन खाइन-
अरे सुबचा सबको लिसोचवाओ-
मोहों खाए लिहिस मोंहों नचवाओ...
Posted on: Nov 18, 2016. Tags: RAMESH KUMAR GUPTA SONG VICTIMS REGISTER
Today's News from Newspapers in Gondi: 18th November 2016...
10 प्रत्याशियों को खर्च नहीं बताने पर जारी किए गए नोटिस-
चार घंटे के सफर में लग रहे 8-10 घंटे-
विधायक के बीच भाषण में मासूम बोला: बाबूजी कई दिनों से स्कूल नहीं लग रहा बताओ कहां पढ़े-
नोट नहीं मिले तो 30 किमी पैदल अपने गांव गईं आदिवासी महिलाएं-
नोटबंदी से घबराए नहीं, बल्कि बदल दिया धंधे का तरीका -
Posted on: Nov 18, 2016. Tags: CHANDAN KUMAR NEWS
आज है मन चाहता लौट आऊं मैं...नदी पर कविता
जिला-मुज़फ्फरपुर बिहार से सुनील कुमार नदी पर आधारित कविता सुना रहे हैं:
आज है मन चाहता लौट आऊं मैं-
तुम्हारी स्नेह सिंचित सी वाटिका में-
और तुम्हारे तीर आकर फिर नहा लूँ-
गुन्गुना लूँ खिलखिला लूँ – फिर कुलांचे मारता सा एक बचपन-
तट बंधी एक नाव का तटबंध को ले-
मछलियों सी नाव नदियों में मचलती जा रही हो...
Posted on: Nov 18, 2016. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
Today's news from newspapers in Gondi: 17th November 2016-
इस डॉक्टर ने फेंका 500 का नोट, बोला-
जाओ PM MODI से करा लो इलाज-
दिन में भी दिखने लगा ठंड का असर-
गोदामों में न पंडाल लगे, न की गई पेयजल की व्यवस्था...
Posted on: Nov 17, 2016. Tags: CHANDAN KUMAR NEWS
अहा बुझीछी न हमर परेशानी...मैथिली लोकगीत
मनोज मिश्रा ग्राम-झंझारपुर, जिला-मधुबनी, बिहार से एक मैथिली लोकगीत सुना रहे है:
अहा बुझीछी न हमर परेशानी-
अहाते छोटकी बहिन छे दीवानी-
कि व्याह कह दियो भौजी ए हमरो-
पढ़े लिखए में मन न लगई ए-
अत्छी अहुरिया ए दिनहर तकिये नजर परे ये-
वहिके छोटकी बहिनिया ए-
अहा कारियों न आपन मनमानी-
छोटके देवर पे कारियों दयावानी-
अहा बुझीछी न हमर...
