देश की माटी देश का जल, हवा देश की देश के फल...कविता -
ग्राम-देवरी, पोस्ट, थाना-चंदोरा, तहसील-प्रतापपुर, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से कैलाश सिंह पोया एक कविता सुना रहे हैं :
देश की माटी देश का जल, हवा देश की देश के फल – सरस बने प्रभु सरस बने देश की माटी देश का जल – देश के घर और देश के घाट देश के वन और देश के बात – सरल बने प्रभु सरल बने देश में तन और देश के मन – देश के घर में भाई बहन बिमल बने प्रभु बिमल बने...
Posted on: Dec 20, 2017. Tags: KAILASH SINGH POYA SONG VICTIMS REGISTER
की भरल जवानी में हो गए बवाल...फागुन गीत -
ग्राम-देवरी, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से कैलाश सिंह पोया एक फागुन गीत सुना रहे है:
की भरल जवानी में हो गए बवाल-
चना रे उरद करी दाल-
मन महिना चना बटुरा दाल-
की भरल जवानी में हो गए बवाल...
Posted on: Dec 18, 2017. Tags: KAILASH SINGH POYA SONG VICTIMS REGISTER
हरि बिना निचटे हरान्जिला रे...सरगुजिया लोकगीत
कैलाश सिंह पोया ग्राम-देवरी, जिला-सूरजपुर, छत्तीसगढ़ से एक सरगुजिया लोकगीत सुना रहे हैं, इस गीत को भादों के महीने में करमा का पेड़ लगाकर उसके आगे करमा नृत्य की शैली में गाते और नाचते हैं – हरि बिना निचटे हरान्जिला रे-
बिना मछरी पानी बिना धान-
एक ठे पुतरा बिना कलपे परान जिला-
बात बाते बात बाढ़े तरकी से बाढ़े कान-
तेल-फुलेल से लरका बाढ़े-
पानी से बाढ़े धान-
हरि बिना निचटे हरान्जिला रे...
Posted on: Dec 15, 2017. Tags: KAILASH SINGH POYA SONG VICTIMS REGISTER
सावन-भादों की झरिया...सरगुजिया कर्मा गीत
कैलाश सिंह पोया ग्राम-देवरी, जिला-सूरजपुर, छत्तीसगढ़ से एक सावन गीत सुना रहे हैं यह गीत सावन भादों में डांड गाड़ते समय सभी किसान गाते और नाचते हैं:
रे हो मत भिजू रे गोरिया-
सावन-भादों की झरिया-
कहाकर भीजे भाई लाली पगरिया-
काकर भीजे रेशम डोरिया-
कौंडा का भीजे लाली पगरिया-
ससिया कर भीजे रेशम डोर-
कहाँ सुखावे लाली पगरिया-
कहाँ सुखावे रेशम डोरिया-
घोरना सुखावे लाली पगरिया-
कनिहा सुखावे रेशम डोरिया-
मत भिजू रे गोरिया-
सावन-भादों की झरिया...
Posted on: Dec 07, 2017. Tags: KAILASH SINGH POYA SONG VICTIMS REGISTER
भरे जिन्दगी जवानी ला गवाए...कविता -
ग्राम-देवरी, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से कैलाश सिंह पोया एक कविता सुना रहे है:
भरे जिन्दगी जवानी ला गवाए-
आज तक समाज कर भेद नहीं पाए-
बड़े भाग से मनुष्य तन ला पाए-
अपने पुरखा के माने देवी देवता ला बुलाये-
आज देखा दूसरे के रीति रिवाज अपनाये-
होई ले आज हर कुछ बीमारी झेलाए-
जय सेवा मंत्र ला अपनाए-
दुःख पीड़ा सब हर बुलाये...
