नालुग कोटोंग भूमिणों नुनाले-नालुग कोटोंग भूमिणो...गोंडी छट्टी गीत
ग्राम-टेकामेट्टा, तहसील-पखांजूर, जिला-उत्तर बस्तर कांकेर (छत्तीसगढ़) से सन्नी उसेंडी के साथ दुलोशा, डबसा और लहरों एक गोंडी छट्टी गीत सुना रहे हैं, इस गीत को जब बच्चे का जन्म होता है तब गाया जाता है:
री री लोयो री री लोयो री री ला री री लोयो री री ला-
नालुग कोटोंग भूमिणों नुनाले-नालुग कोटोंग भूमिणों-
चारो समधी बिसार हो नुनाले-चारो समधी बिसार हो...
Posted on: Sep 18, 2018. Tags: CG CHILDREN GONDI KANKER PAKHANJUR SONG SUNNY USENDI
मोला दगा दिये दगा वाली ओ, तै खाले कमाले मजा उडाले का नजर भर देख तो लेले...गीत-
ग्राम-कोटया, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से मेवालाल देवांगन एक एक गीत सुना रहे हैं :
मोला दगा दिये दगा वाली ओ, तै खाले कमाले-
मजा उडाले का नजर भर देख तो लेले-
सजा के रुख मा बैठे हे खुसरा, हमर पीरत बने रही का करबो दूसरा-
बोहावत के नरवा मा लेहे पड़वा, हय-
तोर दमके जवानी गड़ाले मडवा-
मोला दगा दिये दगा वाली हो तै खाले कमाले...
Posted on: Sep 18, 2018. Tags: CG CHHATTISGARHI MEWALAL DEWANGAN SONG SURAJPUR VICTIMS REGISTER
कोन बने साजा बीजा, कोन बने धवारले...डोमकच गीत
ग्राम-कोटया, जिला-सरगुजा (छत्तीसगढ़) से मेवालाल देवांगन एक डोमकच गीत सुना रहे हैं :
कोन बने साजा बीजा, कोन बने धवारले-
कोन बने धवारगे, कोन बने सरई फूला शिकारी धरालक-
कोन बने सरई फूला, शिकारी धरालय मैना शिकारी धरालय-
साजा बने साजा बीजा, दिक बने धवारगे-
माझे बने सरई फूला, शिकारी डरालक...
Posted on: Sep 17, 2018. Tags: CG DOMKACH MEWALAL DEWANGAN SONG SURGUJA SURGUJIHA VICTIMS REGISTER
रुचा-रुचा रे साथी बोले, खोंदो पहारे बांसा काट...कर्मा गीत-
ग्राम-धुमाडांड, पोस्ट-गोविंदपुर, थाना-चंदोरा, ब्लाक-प्रतापपुर, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से शिवबालक सिंह श्यामले एक कर्मा गीत सुना रहे हैं, जिसे भादो के महीने में गाया जाता है :
रुचा-रुचा रे साथी बोले, खोंदो पहारे बांसा काट-
रुचा-रुचा रे साथी बोले, बडखा पहारे बांसा काटे-
बडखा पहारे बांसा काटे हाय रे-
रुचा-रुचा रे राती बोले बडखा पहारे बांस काटे हाय रे...
Posted on: Sep 17, 2018. Tags: CG KARMA SHIVEBALAK SINGH SHYAMLE SONG SURAJPUR VICTIMS REGISTER
हय रे पीया यहा बैमान खुदसी-खुदसी जिव ला ले...सरगुजिया फागुन गीत
ग्राम पंचायत-बेकारीडांड, विकासखंड-ओड्गी, जिला-सुरजपुर, (छत्तीसगढ़ी) से गणेश सिंह आयाम सरगुजिया भाषा में एक फागुन गीत सुना रहे हैं:
नही तो लिखे नही पढे ये नही कलम धरे-
कलम धरत मोके लाज लागे-
काला लिख के दिखांव खुदसी-खुदसी जिव ला ले-
हय रे पीया यहा बैमान खुदसी-खुदसी जिव ला ले-
नही तो लिखे नही पाढे ये नही कलम चलाय-
कलम चलते मोला लाज लागे...

