मईया के दुवारिया चला-चला...देवी गीत
ग्राम-तिमरा बजार, जिला-मुज्जफरपुर (बिहार) से चन्दन कुमार एक देवी गीत सुना रहे हैं :
चला-चला बहिना चला-चला बहिना हो-
मईया के दुवारिया चला-चला,
धूपवा जराइब मईया-
दियरी जरइब आउर जराइब अगरबतीया-
मानवा त माना मईया,मानवा त माना हो-
मानवा त माना देवी मईया-
निर्धन के इबतिया, चला-चला बहिना-
चला-चला बहिना चला-चला ऐ बहिना ,मईया के दुवारीया...
Posted on: Nov 20, 2016. Tags: CHANDAN KUMAR SONG VICTIMS REGISTER
नोट हमारे डंडे उनके, वाह रे वाह हथकंडे उनके...नोटबंदी पर कविता
ग्राम-मालीघाट, जिला-मुज्जफरपुर बिहार से सुनील कुमार दिलीप पंकज की हाल में हुई नोटबंदी पर एक कविता सुना रहे है :
वाह रे वाह हथकंडे उनके-
नोट हमारे डंडे उनके-
वाह रे वाह हथकंडे उनके-
समझ न पाए आखिर हम सब-
आखिर क्या हैं फंडे उनके-
नचा रहे हे आज देश को-
वाह रे वाह हथकंडे उनके...
Posted on: Nov 19, 2016. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
मन के मईलिया जे ना दोई...भोजपुरी गीत
सुनील कुमार, मालीघाट, मुजफ्फरपुर, (बिहार) से एक भोजपुरी गीत सुना रहे हैं :
मन के मईलिया जे ना दोई-
अंत समय ऊ बहुते रोई-
मन के महल में हरी के बसेरा-
हरी के बिना मन उजरल बेला-
काजी जहरिया जहरिबोई-
अंत समय बहुते रोई-
मन के मईलिया अवद ना दे अस गुनका पाई-
बिना निर्गुन नहीं आई-
करले जैसन बरनी होई-
मन के मई लिया जे ना रोई...
Posted on: Nov 19, 2016. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
कोऊ कहे लाल बत्ती जलत वे...बघेलखंडी लोकगीत
ग्राम-पोस्ट-उलहिखुद, तहसील-मनगवां, जिला-रीवा (मध्यप्रदेश) से रमेश कुमार गुप्ता एक गीत सुना रहे हैं,इस गीत में वे ये बताना चाहते हैं कि सन दो हजार आठ में मुंह नचवा की कहानी फैलाई गयी थी जो बिलकुल झूठ थी वे इसके बारे में गीत के माध्यम से बता रहे हैं:
कोऊ कहे लाल बत्ती जलत वे-
मोहू खाए लिहिस मोहू नचाओ मोहुस बै ना दे-
मोऊ नचवावो आँसों के साल जैसे दुर्गा बिराजन-
हाँ तबसे नहीं आबा मोहू नचवाओ-
मोहे खाए लिहिस मोहों नचवाओ-
हो बुढ़व लाठी लेके ईतिन-
अब कभाऊ ना आई मोहू नचवाओ-
मोहू खाए लिहिस मोंहू नचवाओ-
हाँ ठाकुर का ठकुराइन खाइन-
अरे सुबचा सबको लिसोचवाओ-
मोहों खाए लिहिस मोंहों नचवाओ...
Posted on: Nov 18, 2016. Tags: RAMESH KUMAR GUPTA SONG VICTIMS REGISTER
आज है मन चाहता लौट आऊं मैं...नदी पर कविता
जिला-मुज़फ्फरपुर बिहार से सुनील कुमार नदी पर आधारित कविता सुना रहे हैं:
आज है मन चाहता लौट आऊं मैं-
तुम्हारी स्नेह सिंचित सी वाटिका में-
और तुम्हारे तीर आकर फिर नहा लूँ-
गुन्गुना लूँ खिलखिला लूँ – फिर कुलांचे मारता सा एक बचपन-
तट बंधी एक नाव का तटबंध को ले-
मछलियों सी नाव नदियों में मचलती जा रही हो...
