Today's News from newspapers in Gondi : 14th May 2017 -

चना दाल, काबुली चना फिर महंगे- रायपुर, नईदुनिया-
गुजरात के अमरेली में किसानों ने हजारों क्विंटल प्याज सड़क पर फेंका – अहमदाबाद-
एक साल में नहीं हुई स्कूल की मरम्मत- भानुप्रतापपुर, नईदुनिया-
बांसला में संकुल भवन अधूरा, ग्रामीणों में रोष- भानुप्रतापपुर कांकेर-
डोंगरकट्टा में पंचायत कार्यालय तीन माह से बंद, पंचों में रोष – भानबेडा कांकेर छतीसगढ़-

Posted on: May 14, 2017. Tags: NEWS SUMANLATA ACHALA

अमवाँ महुअवा के झूमे डलिया...झूमर विवाह गीत

मालीघाट, जिला-मुजफ्फरपुर (बिहार) से सुनील कुमार, झूमर विवाह गीत सुना रहे हैं :
अमवाँ महुअवा के झूमे डलिया-
तनी ताक न बलम वा हमार ओरिया-
अमवा मोजर गईले महुआ कोचाई गईले-
रसवा से भरी गईले फूल डरिया-
तनी ताक न बलमुआ हमार ओरिया-
महुआ बिनन हम गईली महुआ बगिया-
रहिया जे छेकले देवर पपिया-
तनी ताक न बलमुआ हमार ओरिया-
कोयली के बोली सुनी मन बऊराई गईले-
नाही अईले हमरो बलम रसिया-
तनी ताक न बलमुआ हमार ओरिया...

Posted on: May 14, 2017. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER

चला गौरी तोहका, बजरिया घुमाय दे...बघेली गीत

ग्राम-पाली, पोस्ट-जामुह, जिला-रीवा (मध्यप्रदेश) से शिव कुमार द्विवेदी बघेलखंडी भाषा में एक गीत सुना रहे है :
चला गौरी तोहका, बजरिया घुमाय दे-
घुमत बनिना तो, घुमत बताई दे-
हार बनवाई दे, चेन दिलवाई दे-
पहिनत बनिना तो, पहिन के बताई दे-
चला गौरी तोहका, बजरिया घुमाय दे-
होटल देखाई दे, बजरिया घुमाय दे-
चुनरी देवाई दे, साड़ी देवाई दे...

Posted on: May 14, 2017. Tags: SHIVKUMAR DWIVEDI SONG VICTIMS REGISTER

सुख का सूरज यहाँ नही ढलता है, जिन्दगी को सुकून यहाँ मिलता है...गीत -

ग्राम-गोविन्दपुर, पोस्ट-तेजपुर, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से अरविन्द कुमार यादव एक गीत सुना रहे है :
सुख का सूरज यहाँ नही ढलता है, जिन्दगी को सुकून यहाँ मिलता है-
माँ के आँचल की ठण्डी छाया है, पिता के प्यार का सर पे साया है-
थाम कर हाथ चलना सिखाया हमें, प्यार की थपकियों से सुलाया हमें-
यहाँ आसान नही चुकाना इनको हम पर, जो क़र्ज़ है-
माता पिता के चरणों में स्वर्ग है, माता-पिता के चरणों में स्वर्ग है...

Posted on: May 14, 2017. Tags: ARVIND KUMAR YADAV SONG VICTIMS REGISTER

ये बिकते हैं वो बिकते हैं,तक्षक के कमान बिक जाते हैं...कविता -

ग्राम-रजवाड़ा, थाना-साहेबगंज, जिला-मुजफ्फरपुर (बिहार) से विजय प्रकाश लोकप्रिय एक स्वरचित कविता सुना रहे हैं :
ये बिकते हैं वो बिकते हैं,तक्षक के कमान बिक जाते हैं-
बेचने वाले क्या नहीं बेचते पूरे हिंदुस्तान बिक जाते हैं-
आन बिकते हैं मन बिकते हैं मानव का सम्मान बिक जाते हैं-
बेचने वाले क्या नहीं बेचते यहाँ तो इंसान बिक जाते हैं-
मंदिर बिकते हैं,मस्जिद बिकते हैं, उसमे स्थित भगवान् बिक जाते हैं-
बेचने वाले क्या नहीं बेचते साधू,भगवान बिक जाते हैं-
प्राण बिकते हैं निशान बिकते है किसी गरीबों का कत्लेआम बिक जाते हैं-
बेचने वाले क्या नहीं बेचते मानवता का प्रमाण बिक जाते हैं-
शान बिकते हैं सम्मान बिकते है,बेचने वाले क्या नहीं बेचते-
इंसानियत का फरमान बिक जाते हैं-
धन बिकते हैं तन बिकते हैं सोने का खान बिक जाते हैं-
बेचने वाले क्या नहीं बेचते देश का आर्थिक लगान बिक जाते हैं-
अमीन बिकते हैं,जमीन बिकते हैं,खया की गिरेबान बिक जाते हैं-
बेचने वाले क्या नहीं बेचते गरीबों का दालान बिक जाते हैं-
मन बिकते हैं,तन बिकते हैं ,गरीबों का शरन बिक जाते हैं-
बेचने वाले क्या नहीं बेचते धोबी का चाँद बिक जाते हैं-
मांग बिकते हैं समांग बिकते हैं राजगद्दी का टांग बिक जाते हैं-
बेचने वाले क्या नहीं बेचते जनता का अरमान बिक जाते हैं-
ये बिकते हैं वो बिकते हैं,गद्दारों के ईमान बिक जाते हैं-
बेचने वाले क्या नहीं बेचतेहैवानो से हिंदुस्तान बिक जाते हैं-

Posted on: May 14, 2017. Tags: SONG VICTIMS REGISTER Vijay Kumar Lokpriya

« View Newer Reports

View Older Reports »