तुम्हारे मजदूर दिवस का मजदूर इतना सस्ता क्यो !
तुम्हारे मजदूर दिवस का मजदूर इतना सस्ता क्यो !
हर गली हर चौराहा यह खुद से पूछ्ता है
क्या तुम्हारे मुल्क मे भीं कोइ मजदूर बिकता है
ये श्रम का भी क्या अजीब धंधा है
यहाँ इंसान ही इंसान के हाथों बिकता है
तुम्हारे मुल्क मे रोटी इतनी सस्ती क्यो
कि थाली का झूठन हमारें पेट का निवाला बनता है
साहब और मजदूर का भी ये कैसा अटूट रिस्ता है
कि महलो के बीच हमारा बच्चा भूखा मरता है
तुम्हारे घर का कांच टूटे तो आवाज संसद तक उठती है
हमारी मौत पर एक आह तक नही निकलतीं
ये लोकतंत्र का भी क्या फलसफा है
लोक के नाम पर यहाँ तंत्र बिकता है
हमारे श्रम पर फल कोई और चखता है
ये जिस्म की आबरू का खेल कैसा
तुम्हारे घर का हर कोना परदे मे रहता है
और हमारे जिस्म का सौदा खुलेआम होता है
हर गली हर चौराहा यह खुद से पूछ्ता है
क्या तुम्हारे मुल्क मे भीं कोइ मजदूर बिकता है
Posted on: May 01, 2014. Tags: KM Yadav
कब आएगा लोकतंत्र एक रिक्शे वाले का...
कब आएगा लोकतंत्र एक रिक्शे वाले का
कब आएगा लोकतंत्र एक चाय वाले का
कब आएगा लोकतंत्र एक मजदूर का
कब आएगा लोकतंत्र एक किसान का
कब आएगा लोकतंत्र एक कूड़ा बीनने वाले का
कब आएगा लोकतंत्र बोझा ढोने वाले का
कब आयेगा लोकतंत्र हमारा मल उठाने वाले का
कब आयेगा लोकतंत्र एक बेबस महिला का
कब आयेगा लोकतंत्र एक आदिवासी का
कब आयेगा लोकतंत्र एक कमजोर दुखियारे का
कब आयेगा लोकतंत्र एक खुशहाल भारत का
Posted on: Apr 25, 2014. Tags: KM Yadav
रंग से रंग मिलाकर,चलो खुशी में सराबोर हो जाएं...
रंग से रंग मिलाकर,चलो खुशी में सराबोर हो जाएं
प्रेम के दो मीठे गीत गाकर , चलो होली मनाएं
अबीर गुलाल उड़ाकर, चलो आसमां रंग आएं
हाथों में हाथ मिलाकर, चलो होली मनाएं
मीठे में नमकीन का तड़का लगाकर, चलो जश्न मनाएं
चार दीवारी से बाहर निकलकर, चलो होली मनाएं
पानी में रंग का नशा घोलकर, चलो आज मदहोश हो जाएं
यारों की टोली लेकर गली-गली, चलो होली मनाएं
ढोल, नगाड़े से ठुमके की ताल मिलाकर, चलो रंगीन हो जाएं
शर्म लिहाज के सारे बंधन तोड़कर, चलो होली मनाएं
मस्ती में जोश का स्वाद भरकर, चलो आज आनंद में डूब जाएं
उम्र की सीमाओं को तोड़कर, चलो होली मनाएं
चलो होली मनाएं , चलो खुशियां मनाएं…
Posted on: Mar 17, 2014. Tags: KM Yadav
वो गणतंत्र था, आज भ्रष्ट्रतंत्र है !
एक और गणतंत्र
फिर से वही तिरंगा
कुछ भाषण और कुछ गीत
एक दिन का जोश और उमंग
अधूरे वादे और क्षूठे अहंकार का प्रदर्शन
सड़को पर पिछलग्गू भीड़ का जमावड़ा
सफ़ेद चादरों में लूटेरे मन की बर्बर शालीनता
बदबूदार ख़ददरों से नैतिकता की ढोंगी महक
मंडी में बिकता देश का धर्म और ईमान
पैरो तले कुचलता देश का सम्मान
1950 कल था, आज 2014 है
वो गणतंत्र था, आज भ्रष्ट्रतंत्र है
कल का लोकतंत्र एक सवेरा था
आज एक मरा हुआ लोकतंत्र है
आज एक मरा हुआ लोकतंत्र है
Posted on: Jan 26, 2014. Tags: KM Yadav
बस्तर के भाग जागे रे हिल मिल के आगो आओ रे...
लालललाल लाल लाल ला ला ला ला लाला रे
बस्तर के भाग जागे रे हिल मिल के आगो आओ रे
अंधियारी रात पहाए रे बस्तर बिहान होवे रे
माटी तोरे चन्दन लागि अमृत जैसे पानी
अमृत जैसे पानी रे साथी अमृत जैसे पानी
केसे गाई धरती दाई तोर हम कहानी तोरे हम कहानी
बस्तर के भाग जागे रे मिल जुल के आगो आबो रे
यहाँ के लकड़ी हीरा मोती, पथरा भई गे सोना
जन्मभूमि के नाम जगाबे मिल के हम ला रहना
माटी के हम ला पुतला रे संगी माटी के गुण गाबो
हमर ऊपर दया करसे तोर नाम जगाबो
