अमर जवां सिपाहियों वतन तुम्हारे साथ है...देश भक्ति गीत-
जिला-रीवा (मध्यप्रदेश) से राजकुमार काछी एक देश भक्ति गीत सुना रहे हैं :
अमर जवां सिपाहियों वतन तुम्हारे साथ है-
वतन तुम्हारे साथ-
सूनी भष्म के नगर ये कैदियों की रानियां-
डगर-डगर पे जगमगाती फूल की कहानियां-
जो जिंदगी बसाये हो पवन तुम्हारे पास है-
अमर जवां सिपाहियों वतन तुम्हारे साथ है-
वतन तुम्हारे साथ...
Posted on: Jun 09, 2019. Tags: MP RAJKUMAR KACHHI REWA SONG VICTIMS REGISTER
बिती जात उमरिया धीरे-धीरे... बुंदेली लोक गीत-
जबलपुर (मध्यप्रदेश) से राजकुमार काछी एक बुंदेली लोक गीत सुना रहे हैं :
बिती जात उमरिया धीरे-धीरे-
बाल पान लडकन संग खेले-
पुतरा और पुतरिया कि धीरे-धीरे-
बिती जात उमरिया धीरे-धीरे...
Posted on: Jun 08, 2019. Tags: JABALPUR MP RAJKUMAR KACHHI SONG VICTIMS REGISTER
बिना राम रघुनंदन अपनो कोउ नईया रे...भजन गीत-
जबलपुर (मध्यप्रदेश) से राजकुमार काछी एक भजन गीत सुना रहे हैं :
कोयलिया बोली रे, अमवा के डार अपनो कोई नईया रे-
बिना राम रघुनंदन अपनो कोउ नईया रे-
बाग लगाये बगीचा लगाये और लगाये केला रे बालम-
जिस दिन राम प्राण निकल गयो रह गयो चांम अकेला-
अपना कोई नहींआ रे-
बिना राम रघुनंदन अपना कोई नहींआ,
कोयलिया बोली रे...
Posted on: Jun 08, 2019. Tags: JABALPUR MP RAJKUMAR KACHHI SONG VICTIMS REGISTER
त्यौहार हमारे जीवन में महत्वपूर्ण है, बीते पलों की याद दिलाती है...काव्य
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से एक मनकाव्य सुना रहा है:
आज गाँव शहर में चहल-पहल और पूर्णिमा है |आज रक्षाबंधन का दिन वर्ष में एक ही बार आता है |इस दिन बहन अपने भाई के कलाई में राखी बांधकर भाई के लम्बी उम्र का कामना करती है |लडकियां नया पोशाग पहनकर इधर से उधर घूमते रहे हैं| जगह-जगह राखियों और साड़ियों का दूकान सजा है | बहन राखियां और मिठाइयां खरीद रहे हैं|भाई राखी के बदले पैसे और उनकी रक्षा के लिए आशीर्वाद देकर बहन का मन जीत लेता है |इसलिए त्यौहार हमारे जीवन में महत्वपूर्ण है| क्योंकि यह बीते पलों की याद दिलाती है|
Posted on: May 23, 2019. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI POEM RAIGARH CHHATTISGARH SONG VICTIMS REGISTER
सो रही थी नन्ही सी जान, दुबक बीच के अन्दर...कविता
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक कविता सुना रहे हैं:
सो रही थी नन्ही सी जान, दुबक बीच के अन्दर
पडी धरती मै ही, जाग उठी उसके अन्दर
खूब भीगी नहाई फूली, आ गई वो बाहर
पली बढ़ी जवान हुई, दिखने लगी वह सुन्दर
कलि बनी फूल बना, फुला फला एक सुन्दर
एक बीज आया एक बीज अपना जैसा , डाली उसके अंधार ...
