जहां पहाड़ पर्वत निर्जीव वस्तुओ की पूजा होती हो...कविता-
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक कविता सुना रहे हैं :
जहां पहाड़ पर्वत निर्जीव वस्तुओ की पूजा होती हो-
उस देश से महान और कौन सा देश हो सकता है-
जिस देश में नदी नाला की पूजा होती हो-
उस देश जैसा और कौन देश हो सकता है-
जिस देश में पेड़ पौधों की पूजा होती हो-
उस देश जैसा धर्मात्मा देश और कौन देश हो सकता है...
Posted on: Apr 15, 2019. Tags: CG KANHIAYALAL PADIYARI POEM RAIGARH SONG VICTIMS REGISTER
लोग दिखाते तो अच्छे हस्ती वाले हैं, पर उनका क्रियाकलाप इतना घटिया होता है...कविता-
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक कविता सुना रहे हैं:
लोग दिखाते तो अच्छे हस्ती वाले हैं-
पर उनका क्रियाकलाप इतना घटिया होता है-
कि छोटे बच्चे भी हँसने लगते हैं-
बात इतनी ऊँची-ऊँची करते हैं कि-
कोई सीमा नहीं होता, पर करते कुछ नही...
Posted on: Apr 14, 2019. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI POEM SONG SURAJPUR VICTIMS REGISTER
लोग अकेले में डरते हैं, पर मुझे भीड़ भाड़ से डर लगता है...कविता-
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी अपने विचारो को कविता के माध्यम से प्रस्तुत कर रहे हैं :
लोग अकेले में डरते हैं-
पर मुझे भीड़ भाड़ से डर लगता है-
सैतानी भी भीड़ भाड़ में ही होती है-
एकांत तो संत महात्माओ का है-
एकांत में रहने से ईश्वर का भी ध्यान होता है-
इसीलिए तो संत गुरु एकांत में रहते हैं...
Posted on: Apr 14, 2019. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI POEM RAIGARH SONG VICTIMS REGISTER
मुझे इतना शक्ति दे दो हे धरती माँ, कि मै नील गगन से उड़ अऊँ...कविता-
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक कविता सुना रहे हैं :
मुझे इतना शक्ति दे दो हे धरती माँ-
कि मै नील गगन से उड़ अऊँ-
बादलों से लोहा लेकर फिर जमीं पर लौट आऊ-
पर्वतों से टकराकर चट्टानों को काटकर राह बना सकूं-
फूल बनकर शहीदों के शवों पर स्वागत में इठलाऊ-
मुझे इतना शक्ति दे दो हे धरती माँ-
कि मै नील गगन से उड़ अऊँ...
Posted on: Apr 13, 2019. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI POEM RAIGARH SONG VICTIMS REGISTER
एसी शक्ति भर दो माँ, मुझपे कृपा करके माँ...कविता-
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक गीत सुना रहे हैं :
एसी शक्ति भर दो माँ, मुझपे कृपा करके माँ-
बनके पतंग उड़ जाऊं मै-
नील गगन में इठलाऊं मै-
फिर नील गगन के नीचे आ-
धरती में बस जाऊं-
तन मन धन से सेवा करके धरती माँ को सुंदर बनाऊ...
