बाप कह्य्या बेटा, पढ्या, केना जन्य्या ऊ की कर्र्य्या...भोजपुरी कविता
ग्राम-बिसनपुर बकरी, जिला-मुजफ्फरपुर (बिहार) से सुनील कुमार एक भोजपुरी कविता सुना रहे है :
बाप कह्य्या बेटा, पढ्या, केना जन्य्या ऊ की कर्र्य्या-
आठ बजे सूत के उठ्य्या, बिना मुह धोइले चाय पियय्या-
खैनी खाएला लूस फूस, कर्र्य्या-
बिना नहेला, किना जव्य्या-
कहेला की आत्मा में, पढ्या-
लेकिन सात के पहाडा में, आठ बार भुलय्या...
Posted on: Feb 14, 2019. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
Impact : तीन साल से हमारे वार्ड क्रमांक 4 का हैण्डपम्प खराब था सुन नहीं रहे थे, सीजीनेट में शिकायत करने क
ग्राम-भुइयापारा, पंचायत-भेड़िया, ब्लाक-प्रतापपुर, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से साथ रमेश बता रहे है कि उनके गाँव का वार्ड क्रमांक 4 का हैण्डपम्प 3 साल से ख़राब पड़ा था उसके लिए उन्होंने अधिकारियो के पास शिकायत भी किये थे पर कोई ध्यान नहीं दे रहे थे उन्होंने सीजीनेट स्वर में चुनाव के 20 दिन पहले एक सन्देश रिकॉर्ड किये के बाद सीजीनेट के साथियों की मदद से उनके वार्ड का हैण्डपम्प सुधार दिया गया है| उसमे 17 घर के लोग पानी पी रहे है| वे लोग खुश इसलिए सीजीनेट के साथियों को और जिला अधिकारियो को धन्यवाद दे रहे है| जिन्होंने उनकी मदद की...
Posted on: Feb 14, 2019. Tags: CG IMPACT PRATAPPUR RAMESH SONG SURAJPUR VICTIMS REGISTER
ओरे जो गेंदा रामानुका बावे रे दाईने भुजा फरके...फागुन सुमरनी गीत
ग्राम-भाडी, ब्लाक-ओडगी, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से रूपलाल मरावी के साथ में पनवेश्वर एक फागुन सुमरनी गीत सुना रहे है:
ओरे जो गेंदा रामानुका-
बावे रे दाईने भुजा फरके-
एके तो अवय अंता जानिला-
पिपरी जी को धाम-
देह्गता या से झुंडा हरना-
रे कुमडिया के देव-
अकरा में स्वती ला बलाऊँ...
Posted on: Feb 14, 2019. Tags: CG FAGUN GEET ROOPLAL MARAVI SONG SURAJPUR VICTIMS REGISTER
उनको मालूम न कर, सताने की हद...रचना
मालीघाट, जिला-मुजफ्फरपुर (बिहार) से सुनील कुमार सुजीत कुमार की रचना सुना रहे है :
उनको मालूम न कर सताने की हद-
आप भी रखिए अपनी दीवानगी की हद-
इससे पहले की कोई रुसवाई हो-
जानिए इश्क को जनाते की हद-
अश्क बह जाना भी कभी, जरुरी है-
उनको मालूम न कर, सताने की हद...
Posted on: Feb 14, 2019. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
भूख को रोटी दाल पै आना पड़ता है, जानबूझकर जाल पै आना पड़ता है...गज़ल
मालीघाट, जिला-मुजफ्फरपुर, (बिहार) से सुनील कुमार महेश कटारे सुगम की गज़ल सुना रहे है:-
भूख को रोटी दाल पै आना पड़ता है-
जानबूझकर जाल पै आना पड़ता है-
आसमान में चाहे जितना भी उड़ ले-
पंछी को फिर डाल पै आना पड़ता है-
ऐश करेगा कब तक कोई रहमत पर-
लौट के अपने हाल पै आना पड़ता है-
सच्चाई इक हद तक ढाँपी जाती है-
इक दिन तो पड़ताल पै आना पड़ता है-
अनदेखा कब तलक करोगे रिश्तों का-
जल्दी इस्तकबाल पै आना पड़ता है...

