रुक जा पंक्षी मत इतरा, नहीं चलेगा कल से बस तेरा...कविता-
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसग) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक कविता सुना रहे हैं:
रुक जा पंक्षी मत इतरा-
नहीं चलेगा कल से बस तेरा-
मद मस्त मौला बन पथ में जरा-
पग-पग फनकारों का पहरा-
ये दुनिया रहती खफा खफा-
तेरा यहां नहीं चलेगा कोई सफा...
Posted on: Apr 23, 2019. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI POEM RAIGARH SONG VICTIMS REGISTER
गावत रईथे गावत रईथे, भागवत गीता ला मै गावत रईथे जी...कविता-
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक कविता सुना रहे हैं :
गावत रईथे गावत रईथे-
भागवत गीता ला मै गावत रईथे जी-
कोनो सुनईया रहतिन ता रामायण ला-
मै गावत रईथे जी-
कोनो घर मा आंट नईये-
नइये कोनो हांथ के बचईया...
Posted on: Apr 21, 2019. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI POEM RAIGARH SONG VICTIMS REGISTER
चौकीदार को दमदार और होसियार होना चाहिये...कहानी-
एक दिन की बात है| एक प्यासा शेर पानी की तलास में निकला| काफी दूर चलने के बाद उसे एक नदी मिला| वह पानी पिया और आराम करने के लिये एक बरगद के पेड़ के नीचे बैठ गया, और गहरी नीद सो गया | जब शेर जगा सूर्यास्त होने वाला था| नदी पास ही एक गांव था| वह सोचा थोड़ा घूमकर आया जाय| और चल पड़ा गांव में एक कुत्ता घूम रहा था| शेर ने पूछा तुम कौन हो भाई कुत्ता बोला मै गांव का चौकीदार हूँ| लोग मुझे चाहते हैं| खाने को देते हैं| कुत्ते के पूछने पर शेर बोला मै जंगल का राजा हूँ| मुझसे सभी डरते हैं| कुत्ता बोला इधर कैसे आये| मै तुम्हे नहीं आने दूंगा| तब शेर ने उस पर वार करने को सोचा | लेकिन कुत्ता होसियार था| वह भागकर जोर से भौकने लगा| आवाज सुनाकर दूसरे कुत्ते और गांव के लोग आ गये, जिसे देखकर शेर को जान बचाकर भागना पड़ा|
Posted on: Apr 15, 2019. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI RAIGARH SONG STORY VICTIMS REGISTER
लोग दिखाते तो अच्छे हस्ती वाले हैं, पर उनका क्रियाकलाप इतना घटिया होता है...कविता-
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी एक कविता सुना रहे हैं:
लोग दिखाते तो अच्छे हस्ती वाले हैं-
पर उनका क्रियाकलाप इतना घटिया होता है-
कि छोटे बच्चे भी हँसने लगते हैं-
बात इतनी ऊँची-ऊँची करते हैं कि-
कोई सीमा नहीं होता, पर करते कुछ नही...
Posted on: Apr 14, 2019. Tags: CG KANHAIYALAL PADIYARI POEM SONG SURAJPUR VICTIMS REGISTER
लोग अकेले में डरते हैं, पर मुझे भीड़ भाड़ से डर लगता है...कविता-
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ियारी अपने विचारो को कविता के माध्यम से प्रस्तुत कर रहे हैं :
लोग अकेले में डरते हैं-
पर मुझे भीड़ भाड़ से डर लगता है-
सैतानी भी भीड़ भाड़ में ही होती है-
एकांत तो संत महात्माओ का है-
एकांत में रहने से ईश्वर का भी ध्यान होता है-
इसीलिए तो संत गुरु एकांत में रहते हैं...
