कम हो रही है चिड़िया, गुम हो रही है गिलहरियां, अब दिखती नही है तितलियां...कविता
मालीघाट, जिला-मुजफ्फरपुर, (बिहार) से सुनील कुमार साथी सुनील भाई की याद में राजेन्द्र राजेन्द्र की कविता विकास सुना रहे हैं – कम हो रही है चिड़िया, गुम हो रही है गिलहरिया-
अब दिखती नही है तितलिया, लुप्त हो रही है जाने कितनी, जीवन की प्रजातिया-
कम हो रहा है धरती के घड़े में जल, पौधो में रस, अन्न में स्वाद-
कम हो रही है फलों में मिठास, फूलो में खुशबु, शरीर में सेहत-
कम हो रहा है जमींन में उपजाऊ पन, हवा में आक्सीजन सबकुछ कम हो रहा है-
जो जरुरी है जीने के लिए मगर चुप रहो, विकास हो रहा है...
Posted on: Apr 21, 2017. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
बाज के उड़ने की कहानी...
बहुत समय पहले की बात है, एक राजा को उपहार में किसी ने बाज के दो बच्चे भेंट किये वे बड़ी ही अच्छी नस्ल के थे, और राजा ने कभी इससे पहले इतने शानदार बाज नहीं देखे थे राजा ने उनकी देखभाल के लिए एक अनुभवी आदमी को नियुक्त कर दिया। जब कुछ महीने बीत गए तो राजा ने बाजों को देखने का मन बनाया, और उस जगह पहुँच गए जहाँ उन्हें पाला जा रहा था। राजा ने देखा कि दोनों बाज काफी बड़े हो चुके थे और अब पहले से भी शानदार लग रहे थे |राजा ने बाजों की देखभाल कर रहे आदमी से कहा, मैं इनकी उड़ान देखना चाहता हूँ, तुम इन्हे उड़ने का इशारा करो । आदमी ने ऐसा ही किया। इशारा मिलते ही दोनों बाज उड़ान भरने लगे, पर जहाँ एक बाज आसमान की ऊंचाइयों को छू रहा था, वहीँ दूसरा, कुछ ऊपर जाकर वापस उसी डाल पर आकर बैठ गया जिससे वो उड़ा था। ये देख, राजा को कुछ अजीब लगा, क्या बात है जहाँ एक बाज इतनी अच्छी उड़ान भर रहा है वहीँ ये दूसरा बाज उड़ना ही नहीं चाह रहा राजा ने सवाल किया। जी हुजूर इस बाज के साथ शुरू से यही समस्या है, वो इस डाल को छोड़ता ही नहीं राजा को दोनों ही बाज प्रिय थे, और वो दूसरे बाज को भी उसी तरह उड़ना देखना चाहते थे। अगले दिन पूरे राज्य में ऐलान करा दिया गया, कि जो व्यक्ति इस बाज को ऊँचा उड़ाने में कामयाब होगा उसे ढेरों इनाम दिया जाएगा।फिर क्या था, एक से एक-एक करके विद्वान् आये और बाज को उड़ाने का प्रयास करने लगे, पर हफ़्तों बीत जाने के बाद भी बाज का वही हाल था, वो थोडा सा उड़ता और वापस डाल पर आकर बैठ जाता। फिर एक दिन कुछ अनोखा हुआ, राजा ने देखा कि उसके दोनों बाज आसमान में उड़ रहे हैं। उन्हें अपनी आँखों पर यकीन नहीं हुआ और उन्होंने तुरंत उस व्यक्ति का पता लगाने को कहा जिसने ये कारनामा कर दिखाया था। वह व्यक्ति एक किसान था अगले दिन वह दरबार में हाजिर हुआ। उसे इनाम में स्वर्ण मुद्राएं भेंट करने के बाद राजा ने कहा, मैं तुमसे बहुत प्रसन्न हूँ, बस तुम इतना बताओ कि जो काम बड़े-बड़े विद्वान् नहीं कर पाये वो तुमने कैसे कर दिखाया। मालिक ! मैं तो एक साधारण सा किसान हूँ, मैं ज्ञान की ज्यादा बातें नहीं जानता, मैंने तो बस वो डाल काट दी जिसपर बैठने का बाज आदि हो चुका था, और जब वो डाल ही नहीं रही तो वो भी अपने साथी के साथ ऊपर उड़ने लगा।
Posted on: Apr 20, 2017. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
काहे गाडी भागे बोल गरीबी दुनिया मा रे...गरीबी गीत -
ग्राम-हर्चोका, तहसील-भरतपुर, जिला-कोरिया, (छत्तीसगढ़) से संजय कुमार सिंह
गरीबी को लेकर एक गीत सुना रहे है :
काहे गाडी भागे बोल गरीबी दुनिया मा रे-
जंगल मा जंगलिहा लूटे खेतन मा पटवारी-
नून तेल मा बनिया लुटे कपड़ा मा व्यापारी...
Posted on: Apr 20, 2017. Tags: SANJAY KUMAR SONG VICTIMS REGISTER
गाँव बचाये, गाँव बचाये...गीत-
मालीघाट, जिला-मुज़फ़्फरपुर (बिहार) से सुनील कुमार संजय पंकज की एक रचना सुना रहे है :
गाँव बचाये, गाँव बचाये-
जलते हुए समय में साथी-
वट पीपल की छाँव बचायें-
टूट रहा है भाई चारा-
संबंधो की नदी तैरकर-
मजधारो में नांव बचाए-
मदिर मस्जिद के झगड़े क्या-
उच्च-नीच पिछड़े अगडे क्या-
भारत माँ की सब संताने-
इंसा बनकर भाव बचाएं-
सूर्य चन्द्र नभ एक विधाता-
एक सभी की धरती माता-
एक रंग के लहू पसीने-
एक ह्रदय के सद्भाव बचाए-
गले-गले सब मिलकर देखो-
फूलो सब खिलकर देखो-
देखो सब के मन प्राणों का-
समवेदन के पाँव बचाए...
Posted on: Apr 18, 2017. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
लटक मटक के झूमें लीचिया लाल-पियर-हरियरिया...लीची फल गीत-
फलों की रानी लीची के कारण मुजफ्फरपुर को स्वीट सिटी के नाम से जाना जाता हैं और इसी के सन्दर्भ में सुनील कुमार एक भोजपुरी गीत सुना रहें है :
लटक-मटक के झूमें लीचिया-
लाल-पियर-हरियरिया-
स्वीट सीटी इहे कारण से कहाले-
मुजफ्फरपुर भईया-
खट्टी मिठी बतिया ई-
बचपन के याद दिलावे-
झूम-झूम के नाचे-
कोयली के कुक सुनावे-
आ जा रे परदेशी बालम-
मिलजुल खाई लीचीया-
कोई कहें फलो की रानी-
कोई कहें दवईया-
बहुते रोग में काम आवे-
लीची खाल सब लोगीया-
विटामिन से भरपूर इ फल बा-
भागी सर्दी बुखरिया-
चैत मास में मोजराये लागे-
बैसाख में लागे फलिया-
जेठ मास तैयार हो जाये-
खाल साथी -संघतिया-
गुणों के खान लीची फल-
शाही चायना बा एकर किसिमिया...



