आग लगे सोलह श्रृंगार हो, पापी दहेज़ के कारण...बघेली दहेज़ विरोधी गीत
ग्राम-पौढ़ी, जिला-सीधी (मध्यप्रदेश) से फूल कुमारी तिवारी एक दहेज़ विरोधी गीत सुना रही है :
आग लगे सोलह श्रृंगार हो, पापी दहेज़ के कारण-
विधि का विधान पंडित, भेद हुइगा सारा-
पाए कम दहेज समधी, गरम हुइगा पारा-
मढ़ई एतर बैठे दुल्हे, गलवा फुलाए-
जब तक हीरो होन्डा, सामने न आए-
मंगिया ना भर हम, कुरितिया हो-
पापी दहेज़ के कारण...
Posted on: May 29, 2017. Tags: FULKUMARI TIWARI SONG VICTIMS REGISTER
बुद्ध संग जो अधम पे जो शरणागत होए...बुद्ध के दोहे -
सुनील कुमार गिरीश पंकज द्वारा लिखित बुद्ध के दोहे सुना रहे हैं :
बुद्ध संग जो अधम पे जो शरणागत होए-
सत्संगति का फल मिले वह पापों को धोये-
पहले बस करुणा जगे फिर अन्तः का ज्ञान-
बिन इसके बनता नहीं नेक कोई इन्सान-
नहीं मिटा है वैर से ,कभी वैर दुष्कर्म-
शांति-स्नेह से मिले यही सनातन धर्म-
प्रेम-विजय हो क्रोध पर कंजूसी पर दान-
हारता सत्य से साधु से शैतान-
सत्य प्रेम और दान से मानव शुद्ध-
मनुजो में श्रेष्ठ कहते हैं यह बुद्ध-
बोले तो पहले करें, उस पर तनिक विचार-
ऐसे मितभाषी बने धरती के श्रृंगार-
रटने से क्या फायदा धरम-करम की बात-
अगर आचरण में रचा तो सच्ची सौगात...
Posted on: May 29, 2017. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
ज़िंदगी ने बहुत सिखाया कभी हँसाया कभी रूलाया...कविता -
मालीघाट, जिला-मुजफ्फरपुर (बिहार) से सुनील कुमार किरण चावला की रचना सुना रहे हैं :
ज़िंदगी ने बहुत सिखाया-
कभी हँसाया कभी रूलाया-
वक़्त के हथौड़े खाकर-
हमें नेक इंसान बनाया-
हमने औरों का ग़म चुराया-
कोशिश की सबक़ों हँसाया-
फिर चाहे ख़ुद ग़म ही पाया-
दिल में बस सुकून तो आया...
Posted on: May 28, 2017. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
गाँव के सुना सब नारी, संगठन के करा तैयारी...जागरूकता गीत-
मालीघाट, जिला-मुजफ्फरपुर (बिहार) से रिंकी कुमारी एक जागरुकता गीत सुना रही हैं :
गाँव के सुना सब नारी, संगठन के करा तैयारी – बिना रे संगठनमा के बने नहीं काममा-
कर ला लड़ैया अपन जारी,सुना हे बहिना करा तैयारी-
एक-एक ईटा मिलके बने ले मकानमा-
कर ला संगठन अपन जारी...
Posted on: May 26, 2017. Tags: RINKY KUMARI SONG VICTIMS REGISTER
विधवा एक जिन्दा लाश, भारत की एक कुप्रथा : हमें अधिक विधवा विवाह का प्रयास करना चाहिए...
विधवा एक जिन्दा लाश: जब कोई महिला विधवा हो जाती है तो हमारा समाज ही उसकी दयनीय स्थिति के लिए परम्परा के नाम पर सबसे अधिक गुनहगार होता है जबकि दोष उस विधवा के ऊपर थोप दिया जाता है और उसकी सम्पूर्ण जिन्दगी को एक सफ़ेद कफ़न के साथ धकेल दिया जाता है इसका जिम्मेदार हमारा समाज ही है, हिन्दुस्तान की इस परंपरा को बदलना होगा ताकि विधवा भी अपनी जिन्दगी को एक नयी राह पर ला सके इसके लिए हमे विधवा के पुनर्विवाह के बारे में ऐसे कार्यक्रम करने होंगे और उन्हें एक नयी जिन्दगी देनी होगी, कह रहे हैं सुनील कुमार@9308571702 मालीघाट मुजफ्फरपुर बिहार से. वे कह रहे हैं हमारा देश हर मामले में आगे जा रहा है हमारी विधवा बहने भी पीछे नहीं रहनी चाहिये। सुनील कुमार@9308571702


