राम भजन गुण गाओ रे अब बीते उमारिया...भजन-
ग्राम-ढोकाम,पंचायत-बिरगाली,तहसील-बास्तानार,जिला-बस्तर,राज्य-छत्तीसगढ़ से जीवन कुमार जी राम भजन सुना रहे है:
राम भजन गुण गाओ रे अब बीते उमारिया-
बीते उमारिया हो बीते उमारिया-
याद आयी है कागज कि पुडियां-
हवा लग उड़ जाई रे अब बीते उमारिया-
बीते उमारिया हो बीते उमारीया-
ये जीवन है माटी का डेला-
पानी लग गुल जाई रे अब बीते उमारिया...ID(181868 )R.M
Posted on: Dec 01, 2020. Tags: BHAJAN SONG SONG VICTIMS REGISTER
हरा हरा तोता पेड़ में जाके सोता...कविता-
ग्राम देवरी जिला सूरजपुर राज्य छत्तीसगढ़ से प्रितम कविता सुना रहें हैं:
हरा हरा तोता पेड़ में जाके सोता
मिटा जामुन खाता बड़े मजे से उड़ जाता
ऊपर पंखा चलती हैं नीचे बेबी सोती हैं
सोते सोते भूख लगी खा ले बेटा मूंगफली
मूंगफली में दाना नही हम तुम्हारे मामा नही
Posted on: Dec 01, 2020. Tags: POEM SONG VICTIMS REGISTER
फूलों से नित हँसना सीखो, भौंरों से नित गाना...बाल कविता-
ग्राम पंचायत-कतियारास, जिला-दंतेवाड़ा, छत्तीसगढ़ से साई एक कविता सुना रहें है:
फूलों से नित हँसना सीखो, भौंरों से नित गाना-
तरु की झुकी डालियों से नित, सीखो शीश झुकाना-
सीख हवा के झोकों से लो, हिलना, जगत हिलाना-
दूध और पानी से सीखो, मिलना और मिलाना-
सूरज की किरणों से सीखो, जगना और जगाना-
लता और पेड़ों से सीखो, सबको गले लगाना...(181999) GT
Posted on: Dec 01, 2020. Tags: POEM SONG VICTIMS REGISTER
कुछ और भी दूँ मन समर्पित तन समर्पित और यह जीवन समर्पित..कविता-
ग्राम-कोटानपुर,जिला-जशपुर,राज्य-छत्तीसगढ़ से सूरदास पैकरा कविता सुना रहें हैं:
मन समर्पित तन समर्पित और यह जीवन समर्पित
चाहता हूँ देश कि धरती तुझे कुछ और भी दूँ
माँ तुम्हारा रीड बहुत हैं मैं अह किन चन
किन्तु इतना कर रहा फिर भी निवेदन
लाऊ थाल में सजा कर भाल जब
कर दया स्वीकार लेना वह समर्पण
गान अर्पित प्राण अर्पित रक्त का कण कण समर्पित
ID (182053)R.M
Posted on: Dec 01, 2020. Tags: POEM SONG VICTIMS REGISTER
अपने आँचल कि छैंया में जब भी मुझे सुलाओ माँ...भजन-
राज्य-राजिस्थान बीकानेर से नारायण भजन सुना रहें हैं:
अपने आँचल कि छैंया में हो हो-
अपने आँचल कि छैंया में जब भी मुझे सुलाओ माँ-
तुम लोरी कि जगह में श्याम कि पावन कथा सुनाओ माँ-
रोज सवेरे जय बाबा कि बोलके मुझे जगाओ माँ-
तुम लोरी कि जगह में श्याम कि पावन कथा सुनाओ माँ-
समर भूमि में श्री कृष्णा ने राश लीला रचाई थी-
ID(182057)R.M
