पीड़ितों का रजिस्टर: नक्सलियों के आतंक से ग्रामीण परेशान गाँव छोड़कर भागने को मजबूर...

आमा बेड़ा जिला-कांकेर (छत्तीसगढ़) से मनीष कुमार बता रहे हैं कि उनके बड़े भाई और बड़े पिता जी को नक्सलियों ने जान से मार दिया | जिसके कारण वे अपने गाँव छोड़ दिए हैं वे पहले अपने गाँव में खेती करके अपना जीवन चला रहे थे अब मजदूरी करके अपना जीवन गुजार रहे हैं| वे अपने भाई-बहन के साथ रह रहे हैं| सम्पर्क नम्बर@6260066093.

Posted on: Jan 24, 2021. Tags: CG KANKER SONG VICTIMS REGISTER VICTIM REGISTER

पीड़ितों का रजिस्टर: नक्सल हिंसा के कारण गाँव छोड़े हैं सरकार हमें मदद नही कर रहा है...

प्रतापपुर, जिला-कांकेर,(छत्तीसगढ़) से सहदेव चालकी बता रहे हैं कि उनके गाँव में उन्ही के घर को नक्सलियों द्वारा जला दिया गया | वे अपने गाँव से डर के कारण छोड़कर भानुप्रतापपुर में रहने लगे यहाँ पीड़ित परिवार को सरकार के तरफ से किसी तरह का मदद नही मिला है| जबकि वे सरकार से मदद चाहते हैं|

Posted on: Jan 24, 2021. Tags: CG KANKER SONG VICTIMS REGISTER VICTIM REGISTER

वनांचल स्वर: आदिवासियों के बीच कुसुम का वित्तीय महत्व...

ग्राम-चाहचढ, तहसील-भानुप्रतापुर, जिला-कांकेर (छतीसगढ़), से लच्छूराम सलाम कुसुम का पेड़ के बारे में जानकारी दे रहे हैं| कुसुम का पेड़ को साल में दो बार छ:-छ: माह के अंतराल पर उगाया जाता है| छ: महीने में तैयार हो जाने पर काटते हैं| बाज़ार में इसकी कीमत 420 रुपया प्रति किलो है| समय के साथ दाम भी बढ़ता है| गाँव में हर आदमी लगभग 15 पेड़ उगाते हैं, वनवासी अपने ही पेड़ों को काटते हैं| 2-3 क्विंटल का उत्पादन होता है|
संपर्क@7647070617. (185559) GT

Posted on: Jan 09, 2021. Tags: CG KANKER LACHHURAM SALAM VANANCHAL SWARA

वनांचल स्व: त्योहारो पर वन की भूमिका...

ग्राम-धनेली कन्हार, तहसील-भानुप्रतापपुर, जिला-कांकेर (छत्तीसगढ़) ग्राम पटेल सुन्दर नरेटी बताते हैं कि वो नयी फसल खाने से पहले देवी देवताओं को चावल, दूध और शक्कर से अच्छा पकवान बनाकर चढ़ातें हैं, फिर उसके बाद ही वो खाते हैं। साजा के पेड़ को अपना इष्टदेव मानकर उस पर महुआ चढातें हैं। सभी आदिवासी मिलकर पूजा अर्चना भी करते हैं, उसके बाद सभी आदिवासी उसको खातें हैं। हरियाली पर भेलवा का पत्ता खेत में चढातें हैं माना जाता है कि भेलवा बहुत उपकारी होता है। कहीं कहीं पर भेलवा कि जगह नीम चढ़ाया जाता है। आज से 30-35 वर्ष पहले जंगल से बांस लाकर उसकी गेड़ी बनाकर 2 किलोमीटर दूर तक जाकर खेलते थे। दीपावली पर खेत से ढाल लाकर घर के आंगन में सजाते हैं। वन से पत्ता लाकर उसकी माला बनाकर जानवरो को पहनाते थे।(RM)

Posted on: Jan 02, 2021. Tags: CG KANKER SUNDAR NARETI VANANCHAL SWARA

वनांचल स्वर: आदिवासी गाँव कि आधुनिक सोच...

ग्राम-धनेली कन्हार, तहसील-भानुप्रतापपुर, जिला-कांकेर (छत्तीसगढ़) समधर नरेटी कहतें है जल, जंगल हमारा है| त्यौहार, घर बनाने के लिए जरुरतमंद चीज़े जंगल से ही मिलती हैं| हम सभी जंगल से जुड़े हुए लोग हैं, जंगल से ही जीवन हैं| हमारे यहाँ 12 जातियां एक साथ रहती हैं, इसी से गाँव का निर्माण होता हैं| गाँव में हम सबको लेकर ही चलते हैं| जात पात कुछ नही होता है| सभी जातियों के लोग एक साथ रहेंगे, एक दुसरे की मदद करेंगे तभी गाँव सही से चल पाएगा|(RM)

Posted on: Jan 02, 2021. Tags: CG KANKER SAMDHAR NARETI VANANCHAL SWARA

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