चलो बुलावा आया है, माता ने बुलाया है...देवी गीत -
ग्राम-पालीघाट, पोस्ट-पड़ेगाँव, जिला-रायग़ढ (छत्तीसगढ़) से रमेश कुमार चौधरी एक देवी गीत सुना रहे है :
चलो बुलावा आया है, माता ने बुलाया है-
पूछते तेरे वत रानी माँ में दरबार लगाया है-
चलो बुलावा आया है, माता बुलाया है, जय मातादी-
सारे जग में एक ठिकाना, सारे गम के मरो का-
रस्ता देख रही है माता, अपनी आँख के तारों का-
मस्त हवाओं का झोका, यह संदेसा लाया है-
चलो बुलावा आया है, माता ने बुलाया है...
Posted on: May 15, 2017. Tags: RAMESH KUMAR CHOUDHARY SONG VICTIMS REGISTER
आपका स्वास्थ्य आपके मोबाइल में : डायरिया या दस्त का घरेलू उपचार -
ग्राम-अंजनी, विकासखंड-मवई, जिला-मंडला (म.प्र.) से वैद्य सग्गन शाह मरकाम जानकारी दे रहे हैं कि वर्षा ऋतु में तालाब, नदी व कुओं का पानी गन्दा हो जाता है जिसे छानकर पीना चाहिए अन्यथा गन्दा पानी पीने से डायरिया या दस्त शुरू हो जाते हैं यदि दस्त हो जाए तो जंगल में पाई जाने वाली बेलकार जड़ी जिसकी पत्तियां हरी एवं गोल होती है. बेलाकार जड़ी को पाढन जड़ भी बोलते है | उसके जड़ को खोदकर निकाल ले और उसकी जड़ी 10 से 15 इंच लम्बी होती है उस जड़ को निकालकर धोले, धोने के पश्चात् उस जड़ को रोजाना खाली पेट जब तक दस्त ठीक न हो जाये तब तक खाए | उसकी जड़ कडवी होती है | उसके जड़ को खाने से डायरिया या दस्त ठीक हो जाता है | मरकाम@9479003194
Posted on: May 15, 2017. Tags: SAGGAN SHAH MARAKAM SONG VICTIMS REGISTER
1965 तक 1 लाख 10 हजार प्रकार में से आज देश में धान की 3-4 हज़ार प्रजातियां ही बची हैं...
मंडला (मध्यप्रदेश) से जगदीश बीज बचाओ, कृषि बचाओ यात्रा से बोल रहे हैं यह यात्रा ५५ दिवसीय है और मध्यप्रदेश के ३५ जिलो में जाएगी। यात्रा का मकसद पारम्परिक बीजो को बचाना है उनके साथी बाबूलाल दहिया बता रहे हैं कि १९६५ तक देश में १ लाख १० हजार धान के बीजो के प्रकार थे उसमे से अभी देश में मात्र ३ से ४ हजार किस्मे ही बची है अगर इन्हें जल्द ही नही बचाया गया तो कुछ सालों में यह भी खत्म हो जाएगी. इस यात्रा का मकसद यही है कि जो देसी बीज बचे है उन्हें बचाया जाए जैसे लाल धान, कोदो, कुटकी, सवा, रागी, धान, कंगनी, कुटकी, मकई, ज्वार, बाजरा. बाबूलाल दहिया जी ने एक सौ दस किस्म की धान बचाकर रखी है, इस काम को आगे बढ़ाने की ज़रुरत है जगदीश@7697448583
Posted on: May 14, 2017. Tags: JAGDISH SONG VICTIMS REGISTER
मातृ देवो भव : माताओं के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने के लिए मदर्स डे 1908 से मनाया जा रहा है...
मातृ देवो भव : मालीघाट, जिला-मुजफ्फरपुर (बिहार) से सुनील कुमार मातृत्व दिवस पर बात कर रहे है वह बता रहे है कि माँ का क़र्ज़ कभी भी संतान नही चुका सकती है, इस दिवस से जुड़े पहलुओं पर बताने चाहते है, छात्रा केथरीन द्वारा शोध करते हुए एक माँ ऐना के बारे में जाना कि अपनी माँ के त्यागपूर्ण जीवन को अहसास बनाए रखने के लिए ऐना ने मदर्स डे मनाने की अवधारणा को जन्म दिया उन्होंने गवर्नर आदि कई प्रमुखों को पत्र लिखा कि माताएं अपने बच्चों को जन्म देते समय जो कष्ट झेलती है, उन्हें सुयोग्य नागरिक बनाने के लिए प्रयतनशील रहती है और उसके प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करने के लिए मदर्स डे मनाना चाहिए | सुनील@9308571702
Posted on: May 14, 2017. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER
अमवाँ महुअवा के झूमे डलिया...झूमर विवाह गीत
मालीघाट, जिला-मुजफ्फरपुर (बिहार) से सुनील कुमार, झूमर विवाह गीत सुना रहे हैं :
अमवाँ महुअवा के झूमे डलिया-
तनी ताक न बलम वा हमार ओरिया-
अमवा मोजर गईले महुआ कोचाई गईले-
रसवा से भरी गईले फूल डरिया-
तनी ताक न बलमुआ हमार ओरिया-
महुआ बिनन हम गईली महुआ बगिया-
रहिया जे छेकले देवर पपिया-
तनी ताक न बलमुआ हमार ओरिया-
कोयली के बोली सुनी मन बऊराई गईले-
नाही अईले हमरो बलम रसिया-
तनी ताक न बलमुआ हमार ओरिया...
