बेटियां ये बेटियां, सारे जहाँ की बेटियां...बेटियों पर आधारित गीत

जिला-राजनांदगाँव (छत्तीसगढ़) से वीरेंद्र गन्धर्व बेटियों के ऊपर आधारित एक गीत सुना रहे हैं:
बेटियां ये बेटियां, सारे जहाँ की बेटियां-
अन्याय अत्याचार की शिकार क्यों हैं बेटियां-
कई घरो में उनको तो जन्म न लेने दिया-
जन्म भी लिया अगर तो बाल तन कुचल दिया-
सेवा सम्मान करके भी बाहर क्यों हैं बेटियां-
बेटियां ये बेटियां...

Posted on: Jun 15, 2017. Tags: SONG VICTIMS REGISTER VIRENDRA GANDHARV

गांव-गांव में झूमे गायें, और बजाये ताली...खुशहाली गीत

सुनील कुमार ग्राम-मालीघाट, जिला-मुजफ्फरपुर, बिहार से एक खुशहाली गीत सुना रहे हैं :
हरियाली हैं खुशहाली, गांव-गांव में झूमे गायें-
और बजाये ताली. हो हो हो हो हो-
चूड़ी की खन-खन, पायल की छन-छन-
बैलो के गले में, बाजें टन-टन-
हैं रोज यहाँ इस दुनिया में, होली और दिवाली-
हो हो हो हो हो-बांसुरी की तान...
खान-पान, रस्म-रिवाज, सबके पास
बेहतर बनाए दुनिया को-हो हो हो हो-
सब ओर हो खुशहाली, हरियाली है खुशहाली...

Posted on: Jun 15, 2017. Tags: SONG Sunil Kumar VICTIMS REGISTER

हम भी भेज दिए हैं, साथियों मंगल गृह को यह सन्देश...बाल कविता

ग्राम-पड़ेगाँव, तहसील-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से डॉ पी एस पुष्प एक बाल कविता सुना रहे हैं:
हम भी भेज दिए हैं साथियों-
मंगल गृह को यह सन्देश-
सकल जगत से कम नहीं हैं-
अपना प्यारा भारत देश-
सकल जहाँ से कम नहीं है-
अपना प्यारा भारत देश-
मंगल गृह के राजा को हम-
देश का हाल सुनायेंगे-
देश कैसे आगे बढेगा-
सब यही सिखलायेंगे...

Posted on: Jun 15, 2017. Tags: DR PS PUSHP SONG VICTIMS REGISTER

गांव हमारा-गांव हमारा, गांव हमारा राज...आदिवासी जागरूकता गीत

पेसा कानून 1996-हमारा गांव हमारा राज पर आदिवासी जागरुकता गीत
सुनील कुमार, जिला-मुजफ्फरपुर (बिहार) से सुना रहे हैं:
गांव हमारा गांव हमारा ,गांव हमारा राज-
लोकतंत्र हैं हमारे क्षेत्र में और हैं स्वराज-
परंपरा संस्कृति की रक्षा करना हैं हमारा अधिकार-
स्थानिय विवादो को सुलझाना हैं हमारा अधिकार-
सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करना हैं हमारा अधिकार-
विकास योजनाओ की स्वकृति देना हैं हमारा अधिकार-
खनन के लिए लाइसेंस देना हैं हमारा अधिकार-
भूमि अधिग्रहण के मुद्दो पर हैं हमारा अधिकार-
गांव हमारा...

Posted on: Jun 15, 2017. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER

ओढ़ना लत्ता पहिन के चलेन बरात का काकू...बघेली हास्य कविता

ऋषभ मिश्रा ग्राम-ओझापुरवा, ब्लाक-जवा, तहसील-त्योथर, जिला-रीवा, मध्यप्रदेश से बघेलखंडी में एक हास्य कविता सुना रहे है:
ओढ़ना लत्ता पहिन के चलेन बरात का काकू-
अधबीचेन म टेक्टर फसगा बट गुठुआ भर काकू-
दुआर चार तक ठीके रहा भीड़ भड़क्का-
नहीं मेहररुन और बिटियन खाना त ठीकै रहा-
भये झिंगुरन के मशाला-
ओढ़ना लत्ता पहिन के चलेन बरात का काकू...

Posted on: Jun 15, 2017. Tags: Rishabh Mishra SONG VICTIMS REGISTER

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