भाषा जो प्रकृति की समझे मैं हूं वो आदिवासी...आदिवासी गीत

सुनील कुमार,जिला मुजफ्फरपुर (बिहार) से आदिवासी पर एक गीत सुना रहे हैं:
रीयु रीयु री री ला, री री री ला-
भाषा जो प्रकृति की समझे मैं हूं वो आदिवासी-
कोई कहे वनवासी कोई मूलनिवासी-
सीना तानकर खड़ा रहा हूं, न सहा मैंने अत्याचार-
निंस्वार्थ तीरो के दम पर, दिलाया हूं अधिकार-
ना की चमचागिरी अंग्रेजो की, ना गोलियो की बरसात-
सब कर्म को करनेवाला,सब गुणों को रखनेवाला-
प्रकृति पुत्र पुरखा बननेवाला, स्वतंत्रता का अधिकार-
न कि कर्मकांड की वकालत, लोकतंत्र और स्वराज...

Posted on: Jul 01, 2017. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER

छोड़ो छोड़ो छोड़ो छोड़ो अंग्रेजो भारत छोड़ो...आन्दोलन गीत

भारत छोड़ो आंदोलन की 75 वीं वर्षगाँठ के अवसर पर समस्त देशवासियों को ढ़ेर सारी शुभकामनाओं के साथ गीत :
छोड़ो छोड़ो छोड़ो छोड़ो अंग्रेजो भारत छोड़ो-
आंदोलन की चिंगारी फैली, अंग्रेजो भारत छोड़ो-
9 अगस्त 1942 को हुआ व्यापक आंदोलन-
अंग्रेजो के शाषण को हिलाने सब ने लगाया तन मन-
गाँधी जी ने मंत्र दिया करो या मरो-
भारत को आजाद कराने का हुआ था यह संकल्प-
अब गुलामी नहीं सहेंगे, आजादी का न विकल्प-
भारत को आजाद करने का, लिया सभी ने संकल्प-
मुंबई के ग्वालियर टैंक में समर्थन लोगो ने दिया भारी-
आँपरेशन जीरो आवर के तहत हुई सबकी गिरफ्तारी-
किसान मजदूर और छात्रो ने वैकल्पिक दिया सरकार...

Posted on: Jul 01, 2017. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER

मैं तो सो रहा था मुझे किसने जगाया...बाल कविता

ग्राम-चंगरिया, विकासखंड-बिछिया, जिला-मंडला (म.प्र.) से कक्षा पहली के छात्र वासु यादव एक बाल कविता सुना रहा हैं:-
मैं तो सो रहा था मुझे किसने जगाया-
मुझे मुर्गा ने जगाया बोला कुकरुंग खू-
मैं तो सो रहा था मुझे किसने जगाया-
मुझे कुत्ता ने जगाया बोला भू भू भू-
मैं तो सो रहा था मुझे किसने जगाया-
मुझे तो बिल्ली ने जगाया बोला म्याऊ-म्याऊ...

Posted on: Jul 01, 2017. Tags: SONG VASU YADAV VICTIMS REGISTER

संगी समाज ला बताबो, हमर समाज में दारु महुआ ला छोड़ाबो...जागरूकता गीत

कैलाश सिंह पोया ग्राम-देवरी, जिला-सूरजपुर (छतीसगढ़) से नशामुक्ति पर एक जागरूकता गीत सुना रहे हैं:
संगी समाज ला बताबो-
हमर समाज में दारु महुआ ला छोड़ाबो-
संगी समाज ला बताबो-
रिकिम-रिकिम खाना पीना सब्ज़ी ला बनाबो-
समाज ला बताबो-
छोला रोटी सब कुछ खवाबो-
संगी समाज ला...

Posted on: Jun 30, 2017. Tags: KAILASH SINGH POYA SONG VICTIMS REGISTER

ऐसन जानत होले रे गोरिया तोर से दिल न लगाते...सादरी प्रेम गीत

झारखंड एवं उड़ीसा के आदिवासी समुदाय द्वारा बोले जाने वाली भाषा सादरी में प्रेम गीत सुना रहे हैं सुनील कुमार, मालीघाट, जिला-मुजफ्फरपुर (बिहार ) से :
ऐसन जानत होले रे गोरिया तोर से दिल न लगाते-
तोके में चाँद कहीं ,तोके मैं सूरज-
असरा में धोखा खाली, हाय हम बड़ी पछताली-
तोर से दिवाना भेली, दिल जब तोके देली-
जब से तोके पाली, दुनिया भूलाए गेली-
आज तोय काल्हे बतलाले-
अचके काले दगा देले-
मीठा मीठा बात बोली, सब भेद ले ले लूटी-
सोचली न बुझली हम सब कुछ तोके बता देली-
आज तोइ मोके भूल गेले-
आज के दोसर संग गेले...

Posted on: Jun 30, 2017. Tags: SONG SUNIL KUMAR VICTIMS REGISTER

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